{"_id":"bd89440d9636c834bcaabf77e544403e","slug":"city-magistrate-did-not-even-doctors-had-a-warning-on-monday-dm-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिटी मजिस्ट्रेट को भी नहीं मिले डाक्टर, सोमवार को डीएम ने दी थी चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिटी मजिस्ट्रेट को भी नहीं मिले डाक्टर, सोमवार को डीएम ने दी थी चेतावनी
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Tue, 10 Mar 2015 11:26 PM IST
विज्ञापन
तमाम कवायदों के बाद भी डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का
विज्ञापन
नाम नहीं ले रही है। सोमवार को जिलाधिकारी को तमाम अव्यवस्थाएं मिलीं थीं
और उन्होंने इस बावत स्टाफ को कड़ी हिदायत भी दी थी। सीएमएस को हटाने तक की
चेतावनी दे डाली थी। बावजूद इसके मंगलवार को भी अस्पताल के हालात में कोई
सुधार नहीं दिखा।
मुआयना करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट एपी सिंह को भी कई डाक्टर गैरहाजिर मिले। कुछ डाक्टर तो तब पहुंचे जब उन्हें निरीक्षण की भनक लगी। हालांकि निरीक्षण से अस्पताल में अफरातफरी रही। डीएम एनकेएस चौहान ने सोमवार को लोहिया अस्पताल का मुआयना किया था। कई डाक्टरों के गैरहाजिर मिलने पर उन्होंने उनका वेतन काटने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी मंगलवार को अस्पताल पुराने ढर्रे पर दिखा।
सिटी मजिस्ट्रेट एपी सिंह सुबह 8.10 बजे अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे तो डाक्टरों के कक्ष खोले जा रहे थे। छापे की सूचना पर प्रभारी सीएमएस डा. राजेश तिवारी पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट ने सीएमएस कक्ष में रखे रजिस्टरों को चेक किया। उन्हाेंने डाक्टराें का हाजिरी रजिस्टर देखा। इसमें डा. बीबी पुष्कर की मेडिकल लीव लगी थी। डा. कमलेश शर्मा, डा. एसपी सिंह, डा. बीके दुबे, डा. अजय कुमार, डा. ब्रजेश सिंह उनके सामने ही पहुंचे।
डा. धर्मेंद्र, डा. योगेंद्र सिंह, और डा. विवेक सक्सेना अनुपस्थित थे। सिटी मजिस्ट्रेट ने गायब डाक्टरों के नाम अपने रजिस्टर में दर्ज कर लिए। इसके साथ ही जो डाक्टर सामने आए उनसे हस्ताक्षर के साथ समय भी डलवाया। डा. विवेक सक्सेना थे तो नहीं लेकिन रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर थे। यह देखकर प्रभारी सीएमएस से नाराजगी जाहिर की।
सिटी मजिस्ट्रेट ने आईसीटीसी रजिस्टर को देखा। इन्हें नीतू वर्मा, दीपक अवस्थी, नाजिया, फरहा नाज गायब मिलीं। आयुष विंग का हाजिरी रजिस्टर भी देखा। डा. जमीरुद्दीन के अलावा दिपांशु गुप्ता, राजेश कुमार, गौरव, रैना श्रीवास्तव, आराधना गैरहाजिर थीं। इसके बाद एनआरसी का हाजिरी रजिस्टर देखा । यहां सुषमा राठौर अनुपस्थित थीं। पैरामेडिकल रजिस्टर में अकलीम अहमद, सीएस यादव, सतीश सागर, दीपक कुमार, अनीता, बीके लाल के हस्ताक्षर नहीं थे।
उन्होंने वार्ड ब्वाय रमेश चौरसिया, सफाई कर्मी रमेश की अनुपस्थिति लगा दी। अन्य सभी के नाम रजिस्टर में दर्ज करने के बाद वह महिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर भी उन्हाेंने रजिस्टरों को चेक किया। यहां पर ंसविदा डाक्टर अंजली श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट मंजू शाक्या के अलावा निर्मला कटियार, एमपाल और टीकाकरण की ऊषा बाथम, सोमवती, कमलादेवी, संजय प्रजापति, नेहा गायब थीं।
रोज नहीं बदली जातीं चादरें
लोहिया अस्पताल के वार्डों में गंदगी है। बेड की चादरों को रोज नहीं बदला जाता है। बर्न वार्ड में तीमारदारों का जमावड़ा रहता है। मंगलवार को आपातकालीन वार्ड में गंदगी देखने को मिली। यहां भर्ती सड़क हादसे में घायल सन्नी निवासी लालदरवाजा के बेड पर चादर नहीं थी। मरीज मुनेश्वर सिंह के बेड पर भी चादर नहीं थी। नीवकरोरी निवासी गुड्डी देवी और जिला कन्नौज थाना तालग्राम के गांव निकवा निवासी बॉबी ने बताया कि उनके बेड की चादर दो दिन से नहीं बदली
गई। अस्पताल की पहली मंजिल पर बने वार्ड नंबर एक में भी गंदगी थी। इस वार्ड में भी एक मरीज की चादर दो दिन से नहीं बदली गई। बर्न वार्ड में भर्ती एक बच्चा समेत दो मरीज भर्ती हैं। यहां चादरों को तो बदला जा रहा है लेकिन तीमारदारों की खासी तादाद रहती है।
स्टाफ नर्स तबिता ने बताया कि ीमारदारों से कई बार बाहर बैठने को कहते हैं लेकिन वे नहीं सुनते हैं। यह लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। उधर, प्रभारी सीएमएस राजेश तिवारी ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। सीएमएस के आने के बाद इस बात को सामने रखा जाएगा।
मुआयना करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट एपी सिंह को भी कई डाक्टर गैरहाजिर मिले। कुछ डाक्टर तो तब पहुंचे जब उन्हें निरीक्षण की भनक लगी। हालांकि निरीक्षण से अस्पताल में अफरातफरी रही। डीएम एनकेएस चौहान ने सोमवार को लोहिया अस्पताल का मुआयना किया था। कई डाक्टरों के गैरहाजिर मिलने पर उन्होंने उनका वेतन काटने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी मंगलवार को अस्पताल पुराने ढर्रे पर दिखा।
सिटी मजिस्ट्रेट एपी सिंह सुबह 8.10 बजे अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे तो डाक्टरों के कक्ष खोले जा रहे थे। छापे की सूचना पर प्रभारी सीएमएस डा. राजेश तिवारी पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट ने सीएमएस कक्ष में रखे रजिस्टरों को चेक किया। उन्हाेंने डाक्टराें का हाजिरी रजिस्टर देखा। इसमें डा. बीबी पुष्कर की मेडिकल लीव लगी थी। डा. कमलेश शर्मा, डा. एसपी सिंह, डा. बीके दुबे, डा. अजय कुमार, डा. ब्रजेश सिंह उनके सामने ही पहुंचे।
डा. धर्मेंद्र, डा. योगेंद्र सिंह, और डा. विवेक सक्सेना अनुपस्थित थे। सिटी मजिस्ट्रेट ने गायब डाक्टरों के नाम अपने रजिस्टर में दर्ज कर लिए। इसके साथ ही जो डाक्टर सामने आए उनसे हस्ताक्षर के साथ समय भी डलवाया। डा. विवेक सक्सेना थे तो नहीं लेकिन रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर थे। यह देखकर प्रभारी सीएमएस से नाराजगी जाहिर की।
सिटी मजिस्ट्रेट ने आईसीटीसी रजिस्टर को देखा। इन्हें नीतू वर्मा, दीपक अवस्थी, नाजिया, फरहा नाज गायब मिलीं। आयुष विंग का हाजिरी रजिस्टर भी देखा। डा. जमीरुद्दीन के अलावा दिपांशु गुप्ता, राजेश कुमार, गौरव, रैना श्रीवास्तव, आराधना गैरहाजिर थीं। इसके बाद एनआरसी का हाजिरी रजिस्टर देखा । यहां सुषमा राठौर अनुपस्थित थीं। पैरामेडिकल रजिस्टर में अकलीम अहमद, सीएस यादव, सतीश सागर, दीपक कुमार, अनीता, बीके लाल के हस्ताक्षर नहीं थे।
उन्होंने वार्ड ब्वाय रमेश चौरसिया, सफाई कर्मी रमेश की अनुपस्थिति लगा दी। अन्य सभी के नाम रजिस्टर में दर्ज करने के बाद वह महिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर भी उन्हाेंने रजिस्टरों को चेक किया। यहां पर ंसविदा डाक्टर अंजली श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट मंजू शाक्या के अलावा निर्मला कटियार, एमपाल और टीकाकरण की ऊषा बाथम, सोमवती, कमलादेवी, संजय प्रजापति, नेहा गायब थीं।
रोज नहीं बदली जातीं चादरें
लोहिया अस्पताल के वार्डों में गंदगी है। बेड की चादरों को रोज नहीं बदला जाता है। बर्न वार्ड में तीमारदारों का जमावड़ा रहता है। मंगलवार को आपातकालीन वार्ड में गंदगी देखने को मिली। यहां भर्ती सड़क हादसे में घायल सन्नी निवासी लालदरवाजा के बेड पर चादर नहीं थी। मरीज मुनेश्वर सिंह के बेड पर भी चादर नहीं थी। नीवकरोरी निवासी गुड्डी देवी और जिला कन्नौज थाना तालग्राम के गांव निकवा निवासी बॉबी ने बताया कि उनके बेड की चादर दो दिन से नहीं बदली
गई। अस्पताल की पहली मंजिल पर बने वार्ड नंबर एक में भी गंदगी थी। इस वार्ड में भी एक मरीज की चादर दो दिन से नहीं बदली गई। बर्न वार्ड में भर्ती एक बच्चा समेत दो मरीज भर्ती हैं। यहां चादरों को तो बदला जा रहा है लेकिन तीमारदारों की खासी तादाद रहती है।
स्टाफ नर्स तबिता ने बताया कि ीमारदारों से कई बार बाहर बैठने को कहते हैं लेकिन वे नहीं सुनते हैं। यह लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। उधर, प्रभारी सीएमएस राजेश तिवारी ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। सीएमएस के आने के बाद इस बात को सामने रखा जाएगा।