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दबे ‘पांव’ गांवों में आ रही ‘तबाही’
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:10 PM IST
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पंचायत घर के पास बहती रामगंगा
- फोटो : अमर उजाला
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गांव खरगपुर में रामगंगा पंचायत घर के मुहाने पर बह रही हैं। गांव से चंद कदमों की दूरी पर ही रामगंगा के बहने से किनारे झोपड़ी और कच्चे मकान बनाकर रह रहे ग्रामीण चिंतित हैं। इनका कहना है कि रामगंगा और बढ़ीं तो उन्हें कच्चे मकान और झोपड़ी खाली कर ऊंचे स्थान पर जाना होगा।
गांव खरगपुर निवासी शिशुपाल, रामऔतार, रामविलास, सोनपाल, भूरे, रामप्रकाश, शिवकिशोर, रमेश और मुनीम झोपड़ी और कच्चे मकान बनाकर रह रहे हैं। पानी बढ़ने से रामगंगा खरगपुर किनारे तक पहुंच गई हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो मजबूरी में उन्हें मकान व झोपड़ी खाली कर ऊंचे स्थान पर जाने को मजबूर होना होगा।
शिशुपाल, रामऔतार, रामविलास का कहना था कि पहले वह पड़ोस के गांव नाहरैया में रहते थे। पांच साल पहले आई बाढ़ में उनके मकान कट गए तो वह लोग खरगपुर में आकर बस गए। रामगंगा अगर बढ़ीं तो यहां भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं पंचायत घर के आगे की ओर परकोपाइन और पीछे की ओर बालू भरी बोरियां लगी हैं। रामगंगा का पानी बढ़ने से पंचायत घर के पास धार तेजी से बह रही है।
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अगर पानी बढ़ना कम न हुआ तो पंचायत घर को खतरा हो सकता है। गांव के विशेश्वर सिंह ने बताया कि यदि पिछले साल सिंचाई विभाग की ओर से कोई काम कराया गया होता तो इस बार कटान का खतरा नहीं रहता। गंगा सिंह, रघुवीर, प्रेम सिंह, दिनेश यादव, चंदू, रघुवीर, रक्षपाल, लालसिंह और ठेकेदार ने बताया कि उनके खेत के पास से रामगंगा बह रही हैं। बाढ़ आई तो खेत कटेंगे।
जलस्तर बढ़ने से अलादपुर भटौली किनारे रामगंगा बहने लगी हैं। बाढ़ के खतरे को देखते हुए सोमवार को लेखपाल राजीव पांडेय ने अमरचंद्र, महावीर, मोरपाल, नन्हें, राजेश, रामदीन, दयाराम, कल्लू, मनोज कुमार, शिवरतन को नोटिस जारी कर मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कटान शुरू नहीं होता, तब तक वह लोग मकान खाली नहीं करेंगे।
वहीं रामगंगा ने गांव बिचपुरिया में रामभजन, अमर सिंह, लोकनाथ, जगपाल के खेतों का काटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वीरपुर गांव के सामने धारा मोड़ी गई थी लेकिन इस बार धारा वापस बिचपुरिया लौट आई है। रामगंगा किनारे लगाई गई परकोपाइन काफी पहले ही बह चुकी है। वहीं गंगा में पानी बढ़ने से कुड़री सारंगपुर, करनपुर घाट, फुलहा, सुंदरपुर और हरसिंगपुर कायस्थ गांव के किनारे पानी पहुंच गया है। अगर पानी बढ़ना कम न हुआ तो यह गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
लगातार गंगा में छोड़े जा रहे पानी से ब्लाक शमसाबाद क्षेत्र में बाढ़ का असर दिखने लगा है। सोमवार को गांव अचानकपुर में गंगा की धार से दिलासाराम का करीब 14 बीघा खेत, दीनदयाल का आठ बीघा, गंगाधर का सात बीघा, रामकिशोर का पांच बीघा, बादशाह का चार बीघा, प्रभुदयाल का तीन बीघा और वेदराम का करीब आठ बीघा खेत कट गया।
खेत कटने से इनके खेतों में खड़ी गन्ना की फसल भी बह गई। इन पीड़ित किसानों का कहना है कि सोसाइटी से लोन लेकर गन्ना की फसल में खाद डाली थी। कर्जा लेकर गन्ना की फसल बोयी थी। सोचा था कि फसल बेचकर कर्ज चुका देंगे। लेकिन बाढ़ ने कर्जदार बना दिया। अब कर्जा कैसे चुकाएंगे।
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गांव खरगपुर निवासी शिशुपाल, रामऔतार, रामविलास, सोनपाल, भूरे, रामप्रकाश, शिवकिशोर, रमेश और मुनीम झोपड़ी और कच्चे मकान बनाकर रह रहे हैं। पानी बढ़ने से रामगंगा खरगपुर किनारे तक पहुंच गई हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो मजबूरी में उन्हें मकान व झोपड़ी खाली कर ऊंचे स्थान पर जाने को मजबूर होना होगा।
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शिशुपाल, रामऔतार, रामविलास का कहना था कि पहले वह पड़ोस के गांव नाहरैया में रहते थे। पांच साल पहले आई बाढ़ में उनके मकान कट गए तो वह लोग खरगपुर में आकर बस गए। रामगंगा अगर बढ़ीं तो यहां भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं पंचायत घर के आगे की ओर परकोपाइन और पीछे की ओर बालू भरी बोरियां लगी हैं। रामगंगा का पानी बढ़ने से पंचायत घर के पास धार तेजी से बह रही है।
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अगर पानी बढ़ना कम न हुआ तो पंचायत घर को खतरा हो सकता है। गांव के विशेश्वर सिंह ने बताया कि यदि पिछले साल सिंचाई विभाग की ओर से कोई काम कराया गया होता तो इस बार कटान का खतरा नहीं रहता। गंगा सिंह, रघुवीर, प्रेम सिंह, दिनेश यादव, चंदू, रघुवीर, रक्षपाल, लालसिंह और ठेकेदार ने बताया कि उनके खेत के पास से रामगंगा बह रही हैं। बाढ़ आई तो खेत कटेंगे।
जलस्तर बढ़ने से अलादपुर भटौली किनारे रामगंगा बहने लगी हैं। बाढ़ के खतरे को देखते हुए सोमवार को लेखपाल राजीव पांडेय ने अमरचंद्र, महावीर, मोरपाल, नन्हें, राजेश, रामदीन, दयाराम, कल्लू, मनोज कुमार, शिवरतन को नोटिस जारी कर मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कटान शुरू नहीं होता, तब तक वह लोग मकान खाली नहीं करेंगे।
वहीं रामगंगा ने गांव बिचपुरिया में रामभजन, अमर सिंह, लोकनाथ, जगपाल के खेतों का काटना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वीरपुर गांव के सामने धारा मोड़ी गई थी लेकिन इस बार धारा वापस बिचपुरिया लौट आई है। रामगंगा किनारे लगाई गई परकोपाइन काफी पहले ही बह चुकी है। वहीं गंगा में पानी बढ़ने से कुड़री सारंगपुर, करनपुर घाट, फुलहा, सुंदरपुर और हरसिंगपुर कायस्थ गांव के किनारे पानी पहुंच गया है। अगर पानी बढ़ना कम न हुआ तो यह गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
लगातार गंगा में छोड़े जा रहे पानी से ब्लाक शमसाबाद क्षेत्र में बाढ़ का असर दिखने लगा है। सोमवार को गांव अचानकपुर में गंगा की धार से दिलासाराम का करीब 14 बीघा खेत, दीनदयाल का आठ बीघा, गंगाधर का सात बीघा, रामकिशोर का पांच बीघा, बादशाह का चार बीघा, प्रभुदयाल का तीन बीघा और वेदराम का करीब आठ बीघा खेत कट गया।
खेत कटने से इनके खेतों में खड़ी गन्ना की फसल भी बह गई। इन पीड़ित किसानों का कहना है कि सोसाइटी से लोन लेकर गन्ना की फसल में खाद डाली थी। कर्जा लेकर गन्ना की फसल बोयी थी। सोचा था कि फसल बेचकर कर्ज चुका देंगे। लेकिन बाढ़ ने कर्जदार बना दिया। अब कर्जा कैसे चुकाएंगे।