{"_id":"5841b3ad4f1c1b2616de6aa2","slug":"bank-account-salary-empty-pockets","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंक खाते में वेतन, जेब है खाली ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंक खाते में वेतन, जेब है खाली
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Fri, 02 Dec 2016 11:17 PM IST
विज्ञापन
आईसीआईसीआई का बंद पड़ा एटीएम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैंक खाते में वेतन होने के बावजूद सरकारी कर्मचारियों की जेब खाली है। बैंकों में लाइन लगने के कारण वह रुपये नहीं निकाल पा रहे हैं। बैंकों में कर्मचारियों को विड्राल पर पांच हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इस धनराशि से उनको घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है।
साथ ही यह भी समस्या आ रही है कि वह ड्यूटी छोड़ें या बैंक में खड़े होकर खाते से रुपये निकालें बिजली विभाग के स्टोर प्रभारी प्रेम सिंह का कहना है कि सरकारी कर्मचारी वेतन पर निर्भर हैं। वेतन आने के बाद वह खाते से रुपये निकालते और परिवार के पालन पोषण के लिए सामग्री खरीदते हैं।
बैंक पांच हजार रुपये दे रही है। इससे घर का खर्चा चलना मुश्किल है। बैंक को सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच के स्थान पर दस हजार रुपये खाते से देने की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि कर्मचारी को दिक्कत न उठानी पड़े।
विज्ञापन
रवींद्र सिंह यादव कहते हैं कि 500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने से बैंकों में लगातार भीड़ लग रही है। सरकारी कर्मचारी अगर अपने खाते से वेतन का रुपये निकालने के लिए लाइन में खड़ा होगा तो उसको ड्यूटी करने में दिक्कत होगी।
इस कारण कोई ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों को ड्यूटी करने में भी दिक्कत न हो और उनको खाते से आसानी से वेतन की पर्याप्त धनराशि प्राप्त हो सके।
सरकारी कर्मचारी वेतन पर आधारित होने के कारण वह प्रत्येक माह वेतन आने का इंतजार करते है।
ताकि बच्चों के स्कूल की फीस व अन्य खर्चे को पूरा करने के लिए रुपये की जरूरत पड़ती है। इस कारण बैंकों में सरकारी कर्मचारियों को उनके वेतन खाते से रुपये प्राप्त करने के लिए एक के बजाय अधिक काउंटर खोले जाए और पांच हजार के स्थान पर दस हजार दिए जाने की व्यवस्था की जाए।
शमसाद अहमद का कहना है कि वेतन बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा फर्रुखाबाद, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक शाखा फर्रुखाबाद व कायमगंज से मिलता है। नोट बंदी के कारण कर्मचारियों को वेतन निकासी में दिक्कत होने के कारण उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ कलेक्ट्रेट माल विभाग के पदाधिकारियों ने डीएम को ज्ञापन भी दिया है। इसमें बैंक में सरकारी कर्मचारियों को वेतन दिए जाने के लिए अलग से एक से अधिक काउंटर खोलेे जाने की मांग उठाई है।
विज्ञापन
साथ ही यह भी समस्या आ रही है कि वह ड्यूटी छोड़ें या बैंक में खड़े होकर खाते से रुपये निकालें बिजली विभाग के स्टोर प्रभारी प्रेम सिंह का कहना है कि सरकारी कर्मचारी वेतन पर निर्भर हैं। वेतन आने के बाद वह खाते से रुपये निकालते और परिवार के पालन पोषण के लिए सामग्री खरीदते हैं।
विज्ञापन
बैंक पांच हजार रुपये दे रही है। इससे घर का खर्चा चलना मुश्किल है। बैंक को सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच के स्थान पर दस हजार रुपये खाते से देने की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि कर्मचारी को दिक्कत न उठानी पड़े।
विज्ञापन
रवींद्र सिंह यादव कहते हैं कि 500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने से बैंकों में लगातार भीड़ लग रही है। सरकारी कर्मचारी अगर अपने खाते से वेतन का रुपये निकालने के लिए लाइन में खड़ा होगा तो उसको ड्यूटी करने में दिक्कत होगी।
इस कारण कोई ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों को ड्यूटी करने में भी दिक्कत न हो और उनको खाते से आसानी से वेतन की पर्याप्त धनराशि प्राप्त हो सके।
सरकारी कर्मचारी वेतन पर आधारित होने के कारण वह प्रत्येक माह वेतन आने का इंतजार करते है।
ताकि बच्चों के स्कूल की फीस व अन्य खर्चे को पूरा करने के लिए रुपये की जरूरत पड़ती है। इस कारण बैंकों में सरकारी कर्मचारियों को उनके वेतन खाते से रुपये प्राप्त करने के लिए एक के बजाय अधिक काउंटर खोले जाए और पांच हजार के स्थान पर दस हजार दिए जाने की व्यवस्था की जाए।
शमसाद अहमद का कहना है कि वेतन बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा फर्रुखाबाद, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक शाखा फर्रुखाबाद व कायमगंज से मिलता है। नोट बंदी के कारण कर्मचारियों को वेतन निकासी में दिक्कत होने के कारण उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ कलेक्ट्रेट माल विभाग के पदाधिकारियों ने डीएम को ज्ञापन भी दिया है। इसमें बैंक में सरकारी कर्मचारियों को वेतन दिए जाने के लिए अलग से एक से अधिक काउंटर खोलेे जाने की मांग उठाई है।