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किंग मेकर बनते ही कसा अनुपम पर शिकंजा

Sun, 03 Oct 2021 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Oct 2021 11:42 PM IST
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As soon as he became a king maker, how did he screw up Anupam?
डॉ. अनुपम दुबे। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। बसपा नेता अनुपम दुबे जिले की राजनीति का जाना पहचाना चेहरा है। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक उसका दखल रहा। अनुपम खुद एक बार नगर पालिका अध्यक्ष और दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुका है। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में वह किंग मेकर बनकर उभरा। भाजपा समर्थित मोनिका यादव की जीत के बाद खुद भाजपाइयों ने उनकी तारीफों के पुल बांधे। इसके कुछ ही दिनों बाद राजनीति उसकी चमकती राजनीति का ग्रहण लग गया और एक के बाद एक उस पर व दो भाइयों पर कई मुकदमे दर्ज हो गए।
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फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी डॉ.अनुपम दुबे ने 2012 में फर्रुखाबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। मेजर सुनील दत्त द्विवेदी भाजपा और विजय सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े थे। विजय सिंह ने मेजर को 147 वोट से हराया था। अनुपम एक बार फर्रुखाबाद नगर पालिका से अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ चुका है।
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वर्ष 2017 में बसपा की टिकट पर हरदोई जिले के सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर पर रहा। इस बार फिर वह फर्रुखाबाद विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरने की तैयारी में था।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव सपा को हराने के लिए भाजपा नेताओं ने अनुपम से नजदीकियां बढ़ाईं। भाजपा के समर्थन से सपा सरकार में मंत्री रहे नरेंद्र सिंह यादव की पुत्री मोनिका यादव मैदान में उतरीं। चुनाव की कमान अनुपम दुबे के हाथ में दी गई। मतदान वाले दिन मोनिका समर्थक जिला पंचायत सदस्य ठंडी सड़क स्थित अनुपम के होटल में रोके ही गए थे।
चुनाव में मोनिका के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद जिले की राजनीति में अनुपम का कद बढ़ गया। इससे विपक्ष के साथ जिला पंचायत चुनाव में साथ रहे नेताओं की धड़कने भी बढ़ गईं। ऐसे नेताओं में भाजपा के एक विधायक भी हैं। इससे जिला पंचायत चुनाव में एक दूसरे के विरोधी कुछ नेता भी अंदर-अंदर लामबंद हो गए।
जिला पंचायत अध्यक्ष की जीत का जश्न चल ही रहा था इसी बीच 26 वर्ष पुराने इंस्पेक्टर हत्याकांड में अनुपम दुबे की कुर्की की कार्रवाई शुरू हो गई। कुर्की से बचने के लिए अनुपम ने दूसरे मुकदमे (शमीम हत्याकांड) में कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद बसपा नेता अनुपम और उनके भाइयों के खिलाफ एक के बाद एक कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
इनसेट
एक वर्ष बाद जुड़ा मुकदमे में नाम
व्यापारी मोहन अग्रवाल के घर पर अक्तूबर 2020 में हमला हुआ था। मोहन ने कुछ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तब अनुपम और उनके परिवार का कोई सदस्य नामजद नहीं था। एक वर्ष मुकदमा ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। अनुपम के जेल जाने के बाद अनुपम और उनके भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन का नाम भी मुकदमे में जुड़ गया। इसी मामले में डब्बन जेल में हैं।
शपथग्रहण समारोह गढ़े गए थे तारीफों के कसीदे
अध्यक्ष के चुनाव के मतदान के दौरान अनुपम और भाजपा सांसद मुकेश राजपूत के बीच कचहरी तिराहे गुफ्तगू भी चलती रही। अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में भी भाजपाइयों ने अनुपम की तारीफों के पुल बांधे थे। कुछ दिनों बाद एसपी ने उन पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया। अनुपम ने कोर्ट में हाजिर होने के बाद एसपी ने मीडिया को बताया था कि 2004 के बाद अनुपम के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। जो दर्ज हुए थे, उसमें ज्यादातर खत्म हो चुके हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में डब्बन एक सदस्य के हेल्पर बनाकर वोट डालने गए थे। इसकी अनुमति उन्हें हेल्पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने दी थी।

भाई निर्विरोध बना था ब्लाक प्रमुख
बसपा नेता अनुपम दुबे का भाई अमित दुबे मोहम्मदाबाद से निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुनाव गया है। पिछली बार भी वह ब्लाक प्रमुख था। एक भाई जीतू और एक बहू (छोटे भाई की पत्नी) क्षेत्र पंचायत सदस्य है। मां कई बार गांव की प्रधान रह चुकी हैं। इस बार प्रधानी की सीट आरक्षित होने से परिवार की करीबी महिला को निर्विरोध प्रधान बनवाया था।
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