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Farrukhabad News: सात माह से क्षेत्र पंचायत की बैठक नहीं, ग्राम पंचायतों में भी मनमानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कमालगंज। पंचायतें सहभागी नियोजन की आधारशिला हैं। यह देखते हुए ग्राम पंचायत की हर माह बैठक का नियम है। क्षेत्र पंचायत की बैठक दो माह में बुलाई जाती है। इन सबके विपरीत स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं में मनमानी हावी है। कुछ ग्राम पंचायतों में इस साल एक भी बैठक विधिवत तरीके से नहीं बुलाई गई।
वहीं क्षेत्र पंचायत की बैठक दो जनवरी के बाद अब तक नहीं हुई। इससे निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य(बीडीसी) व ग्राम पंचायत सदस्य अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे। शासन ने ग्राम पंचायत सदस्यों को 100 रुपए मानदेय दिए जाने की घोषणा की थी। साल भर में 12 बैठकों के नियम से उनका साल में 1200 रुपए मानदेय बनता है। हकीकत यह है कि अनेक ग्राम पंचायतों में पंचायत की बैठक नहीं बुलाई जाती।
प्रधानों को तो पांच हजार रुपए माह मानदेय मिल जाता है पर वार्ड सदस्यों को धेला भी नहीं मिलता। बैठक न होने से विकास योजना में भी वह उपेक्षित रह जाते। वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) को प्रति बैठक 500 रुपए मानदेय निर्धारित है। दो माह में बैठक के नियम से उन्हें तीन हजार रुपए साल मिल सकता है। स्थिति यह है कि साल की शुरुआत में दो जनवरी को बैठक हुई थी। इसके बाद बैठक नहीं हुई।
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ब्लाक प्रमुख शकुंतला राजपूत ने कहा कि क्षेत्र पंचायत की बैठक बुलाने की कार्रवाई बीडीओ करते हैं। वहीं बीडीओ आलोक आर्य का कहना है कि बैठक में देरी हुई। अब जल्दी ही बैठक आयोजित होगी। भोजपुर के ग्राम पंचायत सदस्य सर्वेश सिंह का कहना है कि नियमानुसार बैठक न बुलाने वाले प्रधानों का मानदेय अवरुद्ध होना चाहिए। पंचायत घर में सदस्यों के भी नाम व मोबाइल नंबर लिखवाए जाएं।
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कमालगंज। पंचायतें सहभागी नियोजन की आधारशिला हैं। यह देखते हुए ग्राम पंचायत की हर माह बैठक का नियम है। क्षेत्र पंचायत की बैठक दो माह में बुलाई जाती है। इन सबके विपरीत स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं में मनमानी हावी है। कुछ ग्राम पंचायतों में इस साल एक भी बैठक विधिवत तरीके से नहीं बुलाई गई।
वहीं क्षेत्र पंचायत की बैठक दो जनवरी के बाद अब तक नहीं हुई। इससे निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य(बीडीसी) व ग्राम पंचायत सदस्य अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे। शासन ने ग्राम पंचायत सदस्यों को 100 रुपए मानदेय दिए जाने की घोषणा की थी। साल भर में 12 बैठकों के नियम से उनका साल में 1200 रुपए मानदेय बनता है। हकीकत यह है कि अनेक ग्राम पंचायतों में पंचायत की बैठक नहीं बुलाई जाती।
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प्रधानों को तो पांच हजार रुपए माह मानदेय मिल जाता है पर वार्ड सदस्यों को धेला भी नहीं मिलता। बैठक न होने से विकास योजना में भी वह उपेक्षित रह जाते। वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) को प्रति बैठक 500 रुपए मानदेय निर्धारित है। दो माह में बैठक के नियम से उन्हें तीन हजार रुपए साल मिल सकता है। स्थिति यह है कि साल की शुरुआत में दो जनवरी को बैठक हुई थी। इसके बाद बैठक नहीं हुई।
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ब्लाक प्रमुख शकुंतला राजपूत ने कहा कि क्षेत्र पंचायत की बैठक बुलाने की कार्रवाई बीडीओ करते हैं। वहीं बीडीओ आलोक आर्य का कहना है कि बैठक में देरी हुई। अब जल्दी ही बैठक आयोजित होगी। भोजपुर के ग्राम पंचायत सदस्य सर्वेश सिंह का कहना है कि नियमानुसार बैठक न बुलाने वाले प्रधानों का मानदेय अवरुद्ध होना चाहिए। पंचायत घर में सदस्यों के भी नाम व मोबाइल नंबर लिखवाए जाएं।