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Farrukhabad News: सीएचओ की मनमानी ड्यूटी, इंसेंटिव में खेल
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फर्रुखाबाद। हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर तैनात सीएचओ मनमानी ड्यूटी कर रहे हैं। इनको हर माह मिलने वाले इंसेंटिव में भी खेल होता है। इससे सीएचओ पर जिम्मेदारों की कृपा भी बनी रहती है। सीएमओ ने इंसेंटिव के संबंध में डीसीपीएम से जवाब मांगा है।
जनपद में 165 हेल्थ वेलनेस सेंटर हैं। इन पर तैनात सीएचओ मनमानी ड्यूटी कर रहे हैं। सुबह 10 से शाम चार बजे के बजाय अधिकतर सेंटर एक से दो बजे तक बंद हो जाते हैं। कई सीएचओ तो सप्ताह में एक-दो दिन सेंटर पर जाते ही नहीं। एएनएम के गायब रहने से सेंटर में ताला जड़ा रहता है। इसके पीछे खेल यह है कि सीएचओ को प्रति माह 20 हजार रुपये मानदेय व 15 हजार रुपये इंसेंटिव मिलता है। हालांकि इंसेंटिव के लिए 15 इंडीकेटर भी निर्धारित हैं।
जांच से लेकर सभी सेवाओं के अलग-अलग 15 रजिस्टर बनने चाहिए। कुछ सीएचओ ने बताया कि उन लोगों से इंसेंटिव में दो हजार रुपये प्रति माह कटौती होना तय है। यदि किसी इंडीकेटर में कमी है तो उसका खर्च अलग से देना होता है। ड्यूटी से छूट के लिए तो पांच-पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सीएचसी प्रभारी की होती है।
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डॉक्टरों को आठ माह से नहीं मिला इंसेंटिव
नगरीय हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर डॉक्टरों की संविदा पर तैनाती है। इन्हें 55 हजार रुपये मानदेय और 20 हजार रुपये प्रति माह इंसेंटिव निर्धारित है। फरवरी से अब तक डॉक्टरों को सिर्फ मानदेय दिया जा रहा है। इंसेंटिव किसी को नहीं मिला। कुछ डॉक्टरों की मानें तो कमीशन के खेल में इंसेंटिव रोका गया है। इसके मानक या इंडीकेटर भी उन्हें नहीं बताए गए।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्हें भी कई बार हेल्थ वेलनेस सेंटरों में ताला लगा मिला। इस पर शिकंजा कसा जा रहा है। सीएचओ को इंसेंटिव किस आधार पर दिया जा रहा है और इसके मानक क्या हैं, इस संबंध में उन्होंने डीसीपीएम रणविजय प्रताप सिंह को पत्र भेजकर जवाब मांगा है। डॉक्टरों का इंसेंटिव न मिलने के संबंध में वह जानकारी करेंगे।
सीएमओ ने निरीक्षण प्लान मांगा
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सभी नोडल अधिकारियों से अग्रिम निरीक्षण प्लान मांगा है। इससे डीपीएम, डीसीपीएम व सभी एसीएमओ रोस्टर के हिसाब से संबंधित स्वास्थ्य इकाई का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देंगे। उसी हिसाब से कमियों में भी सुधार किया जाएगा।
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जनपद में 165 हेल्थ वेलनेस सेंटर हैं। इन पर तैनात सीएचओ मनमानी ड्यूटी कर रहे हैं। सुबह 10 से शाम चार बजे के बजाय अधिकतर सेंटर एक से दो बजे तक बंद हो जाते हैं। कई सीएचओ तो सप्ताह में एक-दो दिन सेंटर पर जाते ही नहीं। एएनएम के गायब रहने से सेंटर में ताला जड़ा रहता है। इसके पीछे खेल यह है कि सीएचओ को प्रति माह 20 हजार रुपये मानदेय व 15 हजार रुपये इंसेंटिव मिलता है। हालांकि इंसेंटिव के लिए 15 इंडीकेटर भी निर्धारित हैं।
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जांच से लेकर सभी सेवाओं के अलग-अलग 15 रजिस्टर बनने चाहिए। कुछ सीएचओ ने बताया कि उन लोगों से इंसेंटिव में दो हजार रुपये प्रति माह कटौती होना तय है। यदि किसी इंडीकेटर में कमी है तो उसका खर्च अलग से देना होता है। ड्यूटी से छूट के लिए तो पांच-पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सीएचसी प्रभारी की होती है।
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डॉक्टरों को आठ माह से नहीं मिला इंसेंटिव
नगरीय हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर डॉक्टरों की संविदा पर तैनाती है। इन्हें 55 हजार रुपये मानदेय और 20 हजार रुपये प्रति माह इंसेंटिव निर्धारित है। फरवरी से अब तक डॉक्टरों को सिर्फ मानदेय दिया जा रहा है। इंसेंटिव किसी को नहीं मिला। कुछ डॉक्टरों की मानें तो कमीशन के खेल में इंसेंटिव रोका गया है। इसके मानक या इंडीकेटर भी उन्हें नहीं बताए गए।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्हें भी कई बार हेल्थ वेलनेस सेंटरों में ताला लगा मिला। इस पर शिकंजा कसा जा रहा है। सीएचओ को इंसेंटिव किस आधार पर दिया जा रहा है और इसके मानक क्या हैं, इस संबंध में उन्होंने डीसीपीएम रणविजय प्रताप सिंह को पत्र भेजकर जवाब मांगा है। डॉक्टरों का इंसेंटिव न मिलने के संबंध में वह जानकारी करेंगे।
सीएमओ ने निरीक्षण प्लान मांगा
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सभी नोडल अधिकारियों से अग्रिम निरीक्षण प्लान मांगा है। इससे डीपीएम, डीसीपीएम व सभी एसीएमओ रोस्टर के हिसाब से संबंधित स्वास्थ्य इकाई का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देंगे। उसी हिसाब से कमियों में भी सुधार किया जाएगा।