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Farrukhabad News: शराब में आजमाया भाग्य, आवेदकों के डूबे 11 करोड़
Thu, 06 Mar 2025 11:14 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:14 PM IST
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कलक्ट्रेट सभागार में शराब दुकानों की हो रही ई नीलामी।
- फोटो : कलक्ट्रेट सभागार में शराब दुकानों की हो रही ई नीलामी।
फर्रुखाबाद। शराब की दुकानों पर भाग्य आजमाने में आवेदकों के 11 करोड़ रुपये डूब गए। वहीं ई-लाटरी से हुए दुकानों के आवंटन में 14 करोड़ रुपये राजस्व की कमाई हुई। कई ठेकेदारों ने तो एक दुकान के लिए घर के कई सदस्यों के नाम आवेदन कर डाला, लेकिन दुकान हाथ न आई।
जनपद में शराब व भांग की दुकानों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए थे। इसमें देशी शराब की दुकान के लिए आवेदन की फीस करीब 40 हजार रुपये, कंपोजिट शॉप के लिए 55 हजार व मॉडल शॉप के लिए 90 हजार रुपये फीस निर्धारित थी। जिले में देसी शराब की 219 दुकानों के लिए 2132 आवेदन किए। 83 कंपोजिट शाप के लिए 724 व मॉडल शाप की दो दुकानों के लिए 4 आवेदन हुए।
वहीं भांग की आठ दुकानों पर 10 लोगों ने आवेदन किया। आवेदन फीस से आबकारी विभाग को करीब 14 करोड़ राजस्व मिला। कई ठेकेदारों ने तो अपनी बहू, बेटी व मां के नाम से भी आवेदन कर एक दुकान के लिए लाखों रुपये भाग्य आजमाने में खर्च कर डाले। गुरुवार को शासन से नामित नोडल अधिकारी परिवहन आयुक्त बृजेश नारायण सिंह की मौजूदगी में कलक्ट्रेट सभागार में ई-लाटरी से आवंटन प्रक्रिया शुरू हुई।
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जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अनुराग जैन ने तीन-तीन बार प्रक्रिया दोहराई। रैंडमाइजेशन पूर्ण होते ही जिसके नाम से दुकान मिली, उनके चेहरे खिल गए। वहीं आवेदन में लाखों गंवाने के बाद भी दुकान न मिलने वालों के चेहरे लटक गए। कुल 304 लोगों को शराब की दुकानें आवंटित हुईं। जबकि 2556 लोगों के भाग्य आजमाने में ही आवेदन फीस के 11 करोड़ से अधिक रुपये डूब गए। ई-लॉटरी के दौरान जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी, एसपी आलोक प्रियदर्शी, सहायक आयुक्त आबकारी ज्ञानेश बब्बू आदि अधिकारी मौजूद रहे।
जिला आबकारी अधिकारी जीपी गुप्ता ने बताया कि विभाग को 312 दुकानों के आवंटन में 14 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ हुआ है। लाइसेंस फीस से 40 करोड़ रुपये राजस्व मिलेगा।
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जनपद में शराब व भांग की दुकानों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए थे। इसमें देशी शराब की दुकान के लिए आवेदन की फीस करीब 40 हजार रुपये, कंपोजिट शॉप के लिए 55 हजार व मॉडल शॉप के लिए 90 हजार रुपये फीस निर्धारित थी। जिले में देसी शराब की 219 दुकानों के लिए 2132 आवेदन किए। 83 कंपोजिट शाप के लिए 724 व मॉडल शाप की दो दुकानों के लिए 4 आवेदन हुए।
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वहीं भांग की आठ दुकानों पर 10 लोगों ने आवेदन किया। आवेदन फीस से आबकारी विभाग को करीब 14 करोड़ राजस्व मिला। कई ठेकेदारों ने तो अपनी बहू, बेटी व मां के नाम से भी आवेदन कर एक दुकान के लिए लाखों रुपये भाग्य आजमाने में खर्च कर डाले। गुरुवार को शासन से नामित नोडल अधिकारी परिवहन आयुक्त बृजेश नारायण सिंह की मौजूदगी में कलक्ट्रेट सभागार में ई-लाटरी से आवंटन प्रक्रिया शुरू हुई।
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जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अनुराग जैन ने तीन-तीन बार प्रक्रिया दोहराई। रैंडमाइजेशन पूर्ण होते ही जिसके नाम से दुकान मिली, उनके चेहरे खिल गए। वहीं आवेदन में लाखों गंवाने के बाद भी दुकान न मिलने वालों के चेहरे लटक गए। कुल 304 लोगों को शराब की दुकानें आवंटित हुईं। जबकि 2556 लोगों के भाग्य आजमाने में ही आवेदन फीस के 11 करोड़ से अधिक रुपये डूब गए। ई-लॉटरी के दौरान जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी, एसपी आलोक प्रियदर्शी, सहायक आयुक्त आबकारी ज्ञानेश बब्बू आदि अधिकारी मौजूद रहे।
जिला आबकारी अधिकारी जीपी गुप्ता ने बताया कि विभाग को 312 दुकानों के आवंटन में 14 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ हुआ है। लाइसेंस फीस से 40 करोड़ रुपये राजस्व मिलेगा।