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अनुपम दुबे के भाई डब्बन की सशर्त जमानत मंजूर
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फर्रुखाबाद। जिला जज चवन प्रकाश ने व्यापारी पर हमला करने के आरोप में बसपा नेता अनुपम दुबे के भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन समेत तीन की जमानत अर्जी सशर्त मंजूर कर दी है। एक-एक लाख रुपये के निजी बंधपत्र और इसी समान धनराशि की दो प्रतिभूति संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल करने का आदेश दिया है।
शहर के मोहल्ला मजीद स्ट्रीट निवासी व्यापारी मोहन अग्रवाल के घर पर रंगदारी वसूली के लिए फायरिंग करने के आरोप में मोहल्ला वृंदावन गली निवासी अभिषेक रस्तोगी उर्फ सोनू, पंकज रस्तोगी उर्फ बंशी, फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी अनुराग दुबे उर्फ डब्बन जेल में निरुद्घ हैं। अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने अभिषेक व पंकज और अधिवक्ता जितेंद्र सिंह चौहान ने डब्बन की जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायालय में दायर की थी। बुधवार को जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई।
अधिवक्ता दीपक ने अभिषेक व पंकज को झूठा फंसाने और इसी मुकदमे के आरोपी गौरव गुप्ता द्वारा मोहन अग्रवाल के खिलाफ लिखाई गई रिपोर्ट में एफआर लगाने का तर्क दिया। वकील जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आरोपी डब्बन को शहर में लोग जानते हैं। घटना के समय अगर वह मौजूद थे तो मोहन अग्रवाल द्वारा नामजद किया जाता।
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मोहन ने एक साल बाद 17 सितंबर 2021 को घटना में अनुपम दुबे व अनुराग दुबे के शामिल होने संबंधी पुलिस को हलफनामा दिया। इस आधार पर पुलिस ने दोनों भाइयों को आरोपी बना दिया। डब्बन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बचाव पक्ष के वकील व जिला शासकीय अधिवक्ता सुदेश प्रताप सिंह की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने तीनों आरोपियों की सशर्त जमानत मंजूर कर दी।
कोर्ट ने रखी यह शर्त
आरोपी विवेचना और मुकदमा के विचारण में पूर्ण सहयोग करेंगे। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे। न्यायालय की अनुमति के बिना देश के बाहर नहीं जाएंगे।
दो मुकदमों में अधीनस्थ न्यायालय से जमानत खारिज
अनुराग दुबे उर्फ डब्बन की धोखाधड़ी व जानमाल की धमकी देने के मुकदमे में अधीनस्थ न्यायालय से जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है।
मोहम्मदाबाद कोतवाली से शस्त्र लाइसेंस बनवाने में तथ्यों को छिपाने और अलग-अलग जन्म तिथि अंकित करने के मुकदमे में अनुराग की जमानत अर्जी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (त्वरित न्यायालय) में दायर की गई थी। जान से मारने की धमकी और स्टांपों पर हस्ताक्षर कराने के फतेहगढ़ कोतवाली में दर्ज मुकदमे में भी अनुराग की जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट में दायर की गई थी। दोनों न्यायालयों से अनुराग की जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया गया है।
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शहर के मोहल्ला मजीद स्ट्रीट निवासी व्यापारी मोहन अग्रवाल के घर पर रंगदारी वसूली के लिए फायरिंग करने के आरोप में मोहल्ला वृंदावन गली निवासी अभिषेक रस्तोगी उर्फ सोनू, पंकज रस्तोगी उर्फ बंशी, फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी अनुराग दुबे उर्फ डब्बन जेल में निरुद्घ हैं। अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने अभिषेक व पंकज और अधिवक्ता जितेंद्र सिंह चौहान ने डब्बन की जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायालय में दायर की थी। बुधवार को जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई।
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अधिवक्ता दीपक ने अभिषेक व पंकज को झूठा फंसाने और इसी मुकदमे के आरोपी गौरव गुप्ता द्वारा मोहन अग्रवाल के खिलाफ लिखाई गई रिपोर्ट में एफआर लगाने का तर्क दिया। वकील जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आरोपी डब्बन को शहर में लोग जानते हैं। घटना के समय अगर वह मौजूद थे तो मोहन अग्रवाल द्वारा नामजद किया जाता।
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मोहन ने एक साल बाद 17 सितंबर 2021 को घटना में अनुपम दुबे व अनुराग दुबे के शामिल होने संबंधी पुलिस को हलफनामा दिया। इस आधार पर पुलिस ने दोनों भाइयों को आरोपी बना दिया। डब्बन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बचाव पक्ष के वकील व जिला शासकीय अधिवक्ता सुदेश प्रताप सिंह की दलीलें सुनने के बाद जिला जज ने तीनों आरोपियों की सशर्त जमानत मंजूर कर दी।
कोर्ट ने रखी यह शर्त
आरोपी विवेचना और मुकदमा के विचारण में पूर्ण सहयोग करेंगे। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे। न्यायालय की अनुमति के बिना देश के बाहर नहीं जाएंगे।
दो मुकदमों में अधीनस्थ न्यायालय से जमानत खारिज
अनुराग दुबे उर्फ डब्बन की धोखाधड़ी व जानमाल की धमकी देने के मुकदमे में अधीनस्थ न्यायालय से जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है।
मोहम्मदाबाद कोतवाली से शस्त्र लाइसेंस बनवाने में तथ्यों को छिपाने और अलग-अलग जन्म तिथि अंकित करने के मुकदमे में अनुराग की जमानत अर्जी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (त्वरित न्यायालय) में दायर की गई थी। जान से मारने की धमकी और स्टांपों पर हस्ताक्षर कराने के फतेहगढ़ कोतवाली में दर्ज मुकदमे में भी अनुराग की जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट में दायर की गई थी। दोनों न्यायालयों से अनुराग की जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया गया है।