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अग्नि पीड़ितों ने खुले आसमान के नीचे बिताई रात
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कायमगंज। गांव पंछी नगला में अग्नि कांड पीड़ितों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई। सरकारी मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने पीड़ितों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की।
गांव पंछी नगला निवासी अवधेश के घर से बुधवार को आग लग गई थी। तेज हवा के चलते फैली आग ने 13 झोपड़ियां स्वाहा कर दीं। घटना के बाद पीड़ित सिर्फ पहने कपड़ों में ही रह गए। वहीं लाखों रुपये का नुकसान हुआ। कुछ पशु भी झुलस गए थे। पड़ोस के ग्रामीणों ने पीड़ितों को राशन आदि भेजा, इससे उन्हें भोजन नसीब हुआ। गुरुवार को वे अपने जले घरों से बचा हुआ सामान बीनते रहे। पीड़ित धीरेंद्र, राजेश, ओमकार आदि ने बताया कि उन्हें अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। लेखपाल गांव आए थे, सभी लोगों के नाम की सूची बनाकर ले गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है आग से भारी नुकसान हुआ है। अवधेश व रंजीत की 60 हजार नगदी भी जल गई। अब दोबारा से पूरी गृहस्थी बनानी पड़ेगी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के पास पहने हुए कपड़े ही बचे हैं। तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ितों की सूची बना ली गई है। उनकी मदद के लिए गांव जाकर उन्होंने सर्वे भी कर लिया है। जल्द ही उनके खाते में राशि भेज दी जाएगी।
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गांव पंछी नगला निवासी अवधेश के घर से बुधवार को आग लग गई थी। तेज हवा के चलते फैली आग ने 13 झोपड़ियां स्वाहा कर दीं। घटना के बाद पीड़ित सिर्फ पहने कपड़ों में ही रह गए। वहीं लाखों रुपये का नुकसान हुआ। कुछ पशु भी झुलस गए थे। पड़ोस के ग्रामीणों ने पीड़ितों को राशन आदि भेजा, इससे उन्हें भोजन नसीब हुआ। गुरुवार को वे अपने जले घरों से बचा हुआ सामान बीनते रहे। पीड़ित धीरेंद्र, राजेश, ओमकार आदि ने बताया कि उन्हें अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। लेखपाल गांव आए थे, सभी लोगों के नाम की सूची बनाकर ले गए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है आग से भारी नुकसान हुआ है। अवधेश व रंजीत की 60 हजार नगदी भी जल गई। अब दोबारा से पूरी गृहस्थी बनानी पड़ेगी। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के पास पहने हुए कपड़े ही बचे हैं। तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ितों की सूची बना ली गई है। उनकी मदद के लिए गांव जाकर उन्होंने सर्वे भी कर लिया है। जल्द ही उनके खाते में राशि भेज दी जाएगी।
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