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न सांसद का चेहरा देखा, न हुए विधायक के दर्शन
Farrukhabad
Updated Fri, 28 Mar 2014 05:32 AM IST
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अमृतपुर। गांव है कुड़री सारंगपुर। यह अमृतपुर विधानसभा का हिस्सा है। यहां की 65 साल की जगरानी कहती हैं कि गांव में न कभी सांसद का चेहरा देखा और न ही विधायक का। 24 साल के मुनीश चंद्र भी ऐसा ही कुछ कहते हैं। वह कहते हैं कि चुनाव में नेताओं के शार्गिद वोट मांगने आते हैं। उन्हें भी याद नहीं पड़ता कि आखिरी बार गांव में नेता जी के कब पांव पड़े हैं। यह कहते हैं कि जिन्हें वोट दिया उनके दीदार को आंखें पथरा रही हैं।
कुड़री सारंगपुर गांव कटरी का है। बाढ़ में पानी गांव में घुसता है। रास्ताें पर जलभराव हो जाता है। तब मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल होता है। गंाव से फकरपुर तक सड़क नहीं है। कच्चा रास्ता है। नाली, सड़क व खडंजा की मांग पूरी नहीं हुई । 4 साल पहले गांव में बिजली पहुंची थी। वर्ष 2010-2011 की बाढ़ में बिजली पोल धराशायी हो गए। तार पता नहीं किसने पार कर दिए। तार व पोल दोबारा नहीं लग पाए। बिल बराबर आ रहे हैं। गांव में 700 वोटर हैं। गांव के बाशिंदाें का कहना है कि नेता जी आते ही नहीं है। इनके शार्गिद वादा कर जाते हैं। बाद में यह भी नहीं दिखाई देते हैं। अपना दर्द कहें भी तो किससे।
विद्यालय तो हैं, पर ताले में कैद
गांव के रामवीर 30 साल के हैं बंटाई पर खेती करते हैं। वह कहते हैं कि गांव में स्कूल है लेकिन ताला नहीं खुलता है।
कभी नहीं देखा नेता जी को
शौकीन की उम्र 19 साल है। वह कहते हैं कि किसी भी पार्टी के नेता को गांव में कभी नहीं देखा। इस बार पहली बार वोट डालेंगे। यह जवाब होगा।
70 साल के खेतिहर जयराम क हते हैं कि हर चुनाव में वोट देते हैं। समस्याएं वैसी की वैसी ही रहती हैं। कोई नहीं सुनता है। जिन्हें वोट देते रहे उनके इंतजार में आंखें पथरा रही हैं।
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कुड़री सारंगपुर गांव कटरी का है। बाढ़ में पानी गांव में घुसता है। रास्ताें पर जलभराव हो जाता है। तब मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल होता है। गंाव से फकरपुर तक सड़क नहीं है। कच्चा रास्ता है। नाली, सड़क व खडंजा की मांग पूरी नहीं हुई । 4 साल पहले गांव में बिजली पहुंची थी। वर्ष 2010-2011 की बाढ़ में बिजली पोल धराशायी हो गए। तार पता नहीं किसने पार कर दिए। तार व पोल दोबारा नहीं लग पाए। बिल बराबर आ रहे हैं। गांव में 700 वोटर हैं। गांव के बाशिंदाें का कहना है कि नेता जी आते ही नहीं है। इनके शार्गिद वादा कर जाते हैं। बाद में यह भी नहीं दिखाई देते हैं। अपना दर्द कहें भी तो किससे।
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विद्यालय तो हैं, पर ताले में कैद
गांव के रामवीर 30 साल के हैं बंटाई पर खेती करते हैं। वह कहते हैं कि गांव में स्कूल है लेकिन ताला नहीं खुलता है।
कभी नहीं देखा नेता जी को
शौकीन की उम्र 19 साल है। वह कहते हैं कि किसी भी पार्टी के नेता को गांव में कभी नहीं देखा। इस बार पहली बार वोट डालेंगे। यह जवाब होगा।
70 साल के खेतिहर जयराम क हते हैं कि हर चुनाव में वोट देते हैं। समस्याएं वैसी की वैसी ही रहती हैं। कोई नहीं सुनता है। जिन्हें वोट देते रहे उनके इंतजार में आंखें पथरा रही हैं।
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