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दाम गिरने से आलू पर 2000 रुपए प्रति बीघे घाटा
Farrukhabad
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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फर्रुखाबाद। अगैती आलू बोने वाले किसानों का हाल बुरा हो चला है। बाजार में भाव के उतार से इन्हें प्रति बीघा 2 हजार के आसपास घाटा उठाना पड़ रहा है। नए आलू की आवक ने पुराने आलू पर खतरा खड़ा कर दिया है। इसके भाव ऊपर नहीं आ पा रहे हैं। नए आलू से पुराने के भाव और ज्यादा कम हैं।
सोमवार को नए आलू के भाव 1200 से 1300 रुपए प्रति कुंतल खुले थे। अब यह 961 से 1000 रुपए प्रति कुंतल की दर से बिक रहा है। मंझना के आलू किसान रणवीर सिंह का कहना है कि इस बाजार भाव से मुनाफा तो दूर, लागत तक नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि प्रति बीघा 2000 रुपए के करीब का नुकसान हो रहा है। मंझना के ही किसान संजीव कुमार का भी यही कहना है। वह कहते हैं कि नई फसल से बहुत उम्मीदें थीं। इसने चौपट कर दिया है। पुराने आलू के भाव भी नीचे ही हैं। शनिवार को 825 रुपए प्रति कुंतल की दर से पुराना आूल बिका है। पुराने आलू की बिक्री करने आए खिमसेपुर के रमेश चंद्र मायूस दिखे। उनका कहना था कि इस दर से काफी घाटा हुआ है। कोल्डस्टोर भाड़ा व मंडी तक आलू लाने के दाम जोड़ लिए जाएं तो 5 हजार बीघा का नुकसान उठाना पड़ा है।
पंजाब के आलू ने बिगाड़ा खेल
खाद की किल्लत से जिले में इस बार आलू की बुवाई 20 दिन लेट हुई है। इससे पंजाब प्रांत के आलू ने परंपरागत मंडियों पर कब्जा कर लिया। जिले का आलू बिहार, उत्तरांचल, मध्यप्रदेश, दिल्ली जाता है। पंजाब का आलू 20 दिन पहले ही बाजार में आ गया था। सातनपुर मंडी के आलू कारोबारी सुधीर कुमार वर्मा का कहना है कि इस बार दूसरे प्रांतों से मांग कम आ रही है। इससे मंदी का माहौल है।
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सोमवार को नए आलू के भाव 1200 से 1300 रुपए प्रति कुंतल खुले थे। अब यह 961 से 1000 रुपए प्रति कुंतल की दर से बिक रहा है। मंझना के आलू किसान रणवीर सिंह का कहना है कि इस बाजार भाव से मुनाफा तो दूर, लागत तक नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि प्रति बीघा 2000 रुपए के करीब का नुकसान हो रहा है। मंझना के ही किसान संजीव कुमार का भी यही कहना है। वह कहते हैं कि नई फसल से बहुत उम्मीदें थीं। इसने चौपट कर दिया है। पुराने आलू के भाव भी नीचे ही हैं। शनिवार को 825 रुपए प्रति कुंतल की दर से पुराना आूल बिका है। पुराने आलू की बिक्री करने आए खिमसेपुर के रमेश चंद्र मायूस दिखे। उनका कहना था कि इस दर से काफी घाटा हुआ है। कोल्डस्टोर भाड़ा व मंडी तक आलू लाने के दाम जोड़ लिए जाएं तो 5 हजार बीघा का नुकसान उठाना पड़ा है।
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पंजाब के आलू ने बिगाड़ा खेल
खाद की किल्लत से जिले में इस बार आलू की बुवाई 20 दिन लेट हुई है। इससे पंजाब प्रांत के आलू ने परंपरागत मंडियों पर कब्जा कर लिया। जिले का आलू बिहार, उत्तरांचल, मध्यप्रदेश, दिल्ली जाता है। पंजाब का आलू 20 दिन पहले ही बाजार में आ गया था। सातनपुर मंडी के आलू कारोबारी सुधीर कुमार वर्मा का कहना है कि इस बार दूसरे प्रांतों से मांग कम आ रही है। इससे मंदी का माहौल है।
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