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आश्रय स्थलों में पशुओं को चारा-पानी नहीं
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फर्रुखाबाद। शासन के आदेश पर निराश्रित गोवंश को पकड़कर बंद करने के लिए गांव व नगर पंचायतों में अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए। इनमें बंद गोवंश अनदेखी के चलते भगवान भरोसे चल रहे हैं। कई आश्रय स्थलों में न तो चारे ही व्यवस्था है और न ही पानी की। इससे भूखे गोवंश बीमार पड़ने के साथ मर रहे हैं।
शासन के निर्देश पर पूरे जनपद में अलग-अलग स्थानों पर 26 अस्थायी गोसदनों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें 10 जनवरी तक गोवंश पकड़कर बंद किए जाने थे। अब तक किसी भी गोसदन का कार्य पूरा न होने से इनमें एक भी मवेशी नहीं बंद किया जा सका। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर 315 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए, जबकि नगरपालिका व नगर पंचायतों में भी अस्थायी बने गोसदनों में अव्यवस्था हावी है। इनमें अनदेखी के चलते गोवंश बीमार होकर मरने लगे हैं।
कमालगंज प्रतिनिधि के अनुसार, कमालगंज क्षेत्र के गांव रामपुर माझगांव में चार गाय मर चुकी हैं। कमालगंज नगर पंचायत की देखरेख में थाने के निकट बने आश्रय स्थल में गोवंश के लिए कोई इंतजाम ही नहीं किए। यहां खाली पड़े प्लाट में टिन की चादरों से बाउंड्री बनाकर 25 गाय बंद की गई हैं। चारा व पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। एक गाय पिछले चार दिन से बीमार है। इससे वह मरणासन्न है। उसे कोई देखने वाला नहीं है। चारे का कोई इंतजाम नहीं है। पानी तो आसपास नजर नहीं आता है। लोगों का कहना है कि जब से यहां अन्ना मवेशी बंद किए तब से कोई इन्हें न तो चारा डालने आया और न ही पानी पिलाने।
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नगर पंचायत कर्मी राजीव गुप्ता का कहना है कि पानी की व्यवस्था न होने से वह पड़ोस के घरों से बाल्टी भरकर पानी पिलाया जाता है। भूसा-चारा भी शुक्रवार तक आ जाएगा।
315 आश्रय स्थलों पर बंद हैं अन्ना मवेशी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि 26 अस्थायी गोसदनों का निर्माण पूरा न होने से उनमें अभी गोवंश नहीं रखे गए। जबकि ग्राम पंचायत स्तर पर बनाए गए 315 आश्रय स्थलों में बीडीओ व डीपीआरओ द्वारा 5500 गोवंश बंद होने की जानकारी दी गई है। शहर के गोसदनों में 500, मोहम्मदाबाद में 35, शमसाबाद में आठ व कमालगंज में 25 गोवंश बंद हैं। इनमें चारा, पानी व छाया की व्यवस्था नगरपालिका व नगर पंचायत स्तर से की जानी है। रामपुर माझगांव स्थित आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। आश्रय स्थल में चारों बूढ़ी गाय मरी हैं। उनका पोस्टमार्टम कराया गया है। भूख से मरने की पुष्टि नहीं हुई।
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शासन के निर्देश पर पूरे जनपद में अलग-अलग स्थानों पर 26 अस्थायी गोसदनों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें 10 जनवरी तक गोवंश पकड़कर बंद किए जाने थे। अब तक किसी भी गोसदन का कार्य पूरा न होने से इनमें एक भी मवेशी नहीं बंद किया जा सका। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर 315 अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए, जबकि नगरपालिका व नगर पंचायतों में भी अस्थायी बने गोसदनों में अव्यवस्था हावी है। इनमें अनदेखी के चलते गोवंश बीमार होकर मरने लगे हैं।
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कमालगंज प्रतिनिधि के अनुसार, कमालगंज क्षेत्र के गांव रामपुर माझगांव में चार गाय मर चुकी हैं। कमालगंज नगर पंचायत की देखरेख में थाने के निकट बने आश्रय स्थल में गोवंश के लिए कोई इंतजाम ही नहीं किए। यहां खाली पड़े प्लाट में टिन की चादरों से बाउंड्री बनाकर 25 गाय बंद की गई हैं। चारा व पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। एक गाय पिछले चार दिन से बीमार है। इससे वह मरणासन्न है। उसे कोई देखने वाला नहीं है। चारे का कोई इंतजाम नहीं है। पानी तो आसपास नजर नहीं आता है। लोगों का कहना है कि जब से यहां अन्ना मवेशी बंद किए तब से कोई इन्हें न तो चारा डालने आया और न ही पानी पिलाने।
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नगर पंचायत कर्मी राजीव गुप्ता का कहना है कि पानी की व्यवस्था न होने से वह पड़ोस के घरों से बाल्टी भरकर पानी पिलाया जाता है। भूसा-चारा भी शुक्रवार तक आ जाएगा।
315 आश्रय स्थलों पर बंद हैं अन्ना मवेशी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि 26 अस्थायी गोसदनों का निर्माण पूरा न होने से उनमें अभी गोवंश नहीं रखे गए। जबकि ग्राम पंचायत स्तर पर बनाए गए 315 आश्रय स्थलों में बीडीओ व डीपीआरओ द्वारा 5500 गोवंश बंद होने की जानकारी दी गई है। शहर के गोसदनों में 500, मोहम्मदाबाद में 35, शमसाबाद में आठ व कमालगंज में 25 गोवंश बंद हैं। इनमें चारा, पानी व छाया की व्यवस्था नगरपालिका व नगर पंचायत स्तर से की जानी है। रामपुर माझगांव स्थित आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। आश्रय स्थल में चारों बूढ़ी गाय मरी हैं। उनका पोस्टमार्टम कराया गया है। भूख से मरने की पुष्टि नहीं हुई।