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सत्य बोलने से ही कल्याण संभव-देवाचार्य
Updated Thu, 11 Oct 2018 10:58 PM IST
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फर्रुखाबाद। श्री दुर्वासा महाराज एवं श्री टापर वाले त्यागी महाराज की पुण्य स्मृति पर पांचाल घाट स्थित नारायण आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन गुरुवार को भीड़ रही। संत डॉ. राजेंद्र देवाचार्य ने कहा कि सत्य बोलने से कल्याण संभव है।
उन्होेंने कहा कि महाभारत युद्ध में जब द्रोणाचार्य को मारना कठिन हुआ तो पांडवों के मन में विचार आया कि यदि द्रोणाचार्य को उनके पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनाया जाए तो वह अस्त्र-शस्त्र रख देंगे। उनके पुत्र का नाम अश्वत्थामा था तो एक हाथी का नाम भी यही था। धर्मराज युधिष्ठिर को यह सूचना देने के लिए कहा गया लेकिन वह सत्यवादी थे तो उन्होंने मना कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर भीम ने अश्वत्थामा नामक हाथी को मार डाला। युधिष्ठिर ने जब द्रोणाचार्य को जाकर सूचना दी तो श्रीकृष्ण ने इतनी तेज शंख बजाया कि वह यह नहीं सुन सके कि अश्वत्थामा हाथी मारा गया या उनका पुत्र।
इतना सुनते ही द्रोणाचार्य ने अस्त्र-शस्त्र रख दिए और पांडवों ने उनका वध कर दिया। पर थोड़ा सा असत्य बोलने पर भी युधिष्ठिर का चेहरा कुछ समय के लिए कांतिहीन होकर काला पड़ गया। इतना ही नहीं महाप्रयाण के बाद थोड़े से झूठ के लिए युधिष्ठिर को नरक के रास्ते से गुजरना पड़ा। इस मौके पर समाजसेवी मिथलेश अग्रवाल, ओंकारदास ब्रह्मचारी, चंद्रप्रकाश अग्रवाल पिक्कोबाबू, सत्यप्रकाश अग्रवाल, रीता रस्तोगी, रामानंद पांडेय, अशोक रस्तोगी, आरएसएस के सह विभाग कार्यवाह उमेश गुप्ता, पवन गुप्ता, अवधेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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उन्होेंने कहा कि महाभारत युद्ध में जब द्रोणाचार्य को मारना कठिन हुआ तो पांडवों के मन में विचार आया कि यदि द्रोणाचार्य को उनके पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनाया जाए तो वह अस्त्र-शस्त्र रख देंगे। उनके पुत्र का नाम अश्वत्थामा था तो एक हाथी का नाम भी यही था। धर्मराज युधिष्ठिर को यह सूचना देने के लिए कहा गया लेकिन वह सत्यवादी थे तो उन्होंने मना कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर भीम ने अश्वत्थामा नामक हाथी को मार डाला। युधिष्ठिर ने जब द्रोणाचार्य को जाकर सूचना दी तो श्रीकृष्ण ने इतनी तेज शंख बजाया कि वह यह नहीं सुन सके कि अश्वत्थामा हाथी मारा गया या उनका पुत्र।
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इतना सुनते ही द्रोणाचार्य ने अस्त्र-शस्त्र रख दिए और पांडवों ने उनका वध कर दिया। पर थोड़ा सा असत्य बोलने पर भी युधिष्ठिर का चेहरा कुछ समय के लिए कांतिहीन होकर काला पड़ गया। इतना ही नहीं महाप्रयाण के बाद थोड़े से झूठ के लिए युधिष्ठिर को नरक के रास्ते से गुजरना पड़ा। इस मौके पर समाजसेवी मिथलेश अग्रवाल, ओंकारदास ब्रह्मचारी, चंद्रप्रकाश अग्रवाल पिक्कोबाबू, सत्यप्रकाश अग्रवाल, रीता रस्तोगी, रामानंद पांडेय, अशोक रस्तोगी, आरएसएस के सह विभाग कार्यवाह उमेश गुप्ता, पवन गुप्ता, अवधेश पांडेय आदि मौजूद रहे।
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