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लेंटर गिरने से नानी की दबकर मौत, चार बच्चे जख्मी
Updated Sat, 01 Sep 2018 11:08 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कायमगंज (फर्रुखाबाद)। मेरापुर थाना क्षेत्र के स्यानी गांव में नाती व नातिनों के साथ शुक्रवार रात झोपड़ी में सो रही नानी की लेंटर गिरने से दबकर मौत हो गई। नाती व नातिनें घायल हो गईं।
कन्नौज जिले के थाना छिबरामऊ के गांव खंडौली निवासी विद्यादेवी(62) पत्नी राधेश्याम दस साल से अपनी बेटी मेरापुर के गांव स्यानी निवासी निशा पत्नी श्यामवीर के पास रह रही थीं। शुक्रवार रात वह घर की छत पर बनी झोपड़ी में नातिन देवकी (11), साधना (9), अतुल (7) व आकाश(5) के साथ सो रही थीं। देर रात छत भरभराकर गिर पड़ी। इससे विद्यादेवी मलबे में दब गईं। बच्चों के भी चोटें आईं। चीखपुकार सुन परिजन व मोहल्ले के लोग एकत्र हो गए। उन्होंने विद्यादेवी को किसी तरह मलबे से बाहर निकाला और कायमगंज सीएचसी ले गए। हालत गंभीर होने पर डाक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन दूसरी एंबुलेंस को काल करते रहे, लेकिन उनका फोन नहीं मिला। इससे आधा घंटे तक विद्यादेवी सीएचसी में ही तड़पती रहीं और उनकी मौत हो गई। बच्चों का इलाज गांव में ही कराया गया।
सूचना पर सुबह तहसीलदार गजेंद्र व लेखपाल आशीष वर्मा ने जायजा लिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बताया गया कि विद्यादेवी के दो बेटे धर्मेंद्र व लालू हैं। धर्मेंद्र दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में काम करता है। लालू गांव में ही रहता है। दोनों बेटे विद्या देवी का ध्यान नहीं रखते थे। इससे परेशान होकर वह अपनी बेटी के घर आ गई थीं।
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दो घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
कायमगंज। विद्यादेवी को मोहल्ले के लोगों ने मलबे से निकालने के बाद 108 सेवा की एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन एंबुलेंस दो घंटे बाद पहुंची। इससे गांव के लोगों में आक्रोश था। उनका कहना था कि यदि एंबुलेंस समय से पहुंच जाती तो विद्यादेवी की जान बच सकती थी।
प्रधान की सीएचसी में हुई नोकझोंक
विद्यादेवी को सीएचसी लेकर स्यानी के प्रधान श्याम दीक्षित पहुंचे। सीएचसी में डाक्टर नदारद थे। फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ सो रहा था। प्रधान ने फार्मासिस्ट को जगा दिया और डाक्टर के बारे में पूछा। इस पर फार्मासिस्ट कोई जवाब नहीं दे सके तो प्रधान ने कहा कि यहां कर्मचारी व डाक्टर ड्यूटी के समय सोते ही रहते हैं। इस बात पर फार्मासिस्ट व प्रधान में नोकझोंक हो गई।
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कायमगंज (फर्रुखाबाद)। मेरापुर थाना क्षेत्र के स्यानी गांव में नाती व नातिनों के साथ शुक्रवार रात झोपड़ी में सो रही नानी की लेंटर गिरने से दबकर मौत हो गई। नाती व नातिनें घायल हो गईं।
कन्नौज जिले के थाना छिबरामऊ के गांव खंडौली निवासी विद्यादेवी(62) पत्नी राधेश्याम दस साल से अपनी बेटी मेरापुर के गांव स्यानी निवासी निशा पत्नी श्यामवीर के पास रह रही थीं। शुक्रवार रात वह घर की छत पर बनी झोपड़ी में नातिन देवकी (11), साधना (9), अतुल (7) व आकाश(5) के साथ सो रही थीं। देर रात छत भरभराकर गिर पड़ी। इससे विद्यादेवी मलबे में दब गईं। बच्चों के भी चोटें आईं। चीखपुकार सुन परिजन व मोहल्ले के लोग एकत्र हो गए। उन्होंने विद्यादेवी को किसी तरह मलबे से बाहर निकाला और कायमगंज सीएचसी ले गए। हालत गंभीर होने पर डाक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन दूसरी एंबुलेंस को काल करते रहे, लेकिन उनका फोन नहीं मिला। इससे आधा घंटे तक विद्यादेवी सीएचसी में ही तड़पती रहीं और उनकी मौत हो गई। बच्चों का इलाज गांव में ही कराया गया।
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सूचना पर सुबह तहसीलदार गजेंद्र व लेखपाल आशीष वर्मा ने जायजा लिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बताया गया कि विद्यादेवी के दो बेटे धर्मेंद्र व लालू हैं। धर्मेंद्र दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में काम करता है। लालू गांव में ही रहता है। दोनों बेटे विद्या देवी का ध्यान नहीं रखते थे। इससे परेशान होकर वह अपनी बेटी के घर आ गई थीं।
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दो घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
कायमगंज। विद्यादेवी को मोहल्ले के लोगों ने मलबे से निकालने के बाद 108 सेवा की एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन एंबुलेंस दो घंटे बाद पहुंची। इससे गांव के लोगों में आक्रोश था। उनका कहना था कि यदि एंबुलेंस समय से पहुंच जाती तो विद्यादेवी की जान बच सकती थी।
प्रधान की सीएचसी में हुई नोकझोंक
विद्यादेवी को सीएचसी लेकर स्यानी के प्रधान श्याम दीक्षित पहुंचे। सीएचसी में डाक्टर नदारद थे। फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ सो रहा था। प्रधान ने फार्मासिस्ट को जगा दिया और डाक्टर के बारे में पूछा। इस पर फार्मासिस्ट कोई जवाब नहीं दे सके तो प्रधान ने कहा कि यहां कर्मचारी व डाक्टर ड्यूटी के समय सोते ही रहते हैं। इस बात पर फार्मासिस्ट व प्रधान में नोकझोंक हो गई।