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खुद सुधरो समाज सुधर जाएगा
Updated Mon, 13 Nov 2017 11:54 PM IST
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फर्रुखाबाद। शेखपुर की दरगाह अहसनी महमूदी में आयोजित तीन दिवसीय उर्स का अकीदत के माहौल में समापन हो गया। कुल व फातिहा के वक्त जायरीन की भारी भीड़ उमड़ी। सभी ने महान सूफी-संतों की मजारों पर अकीदत के नजराने पेश किए और मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआ मांगी।
सोमवार को मौका था दरगाह अहसनी महमूदी में ख्वाजा अहसन अली शाह, ख्वाजा महमूद अली शाह व ख्वाजा मतलूब अली शाह के कुल व फातिहा का। सुबह होते ही शहर व ग्रामीण अंचलों के अकीदतमंदों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। भीड़ इस कदर रही कि दरगाह जाने वाले रास्ते तंग हो गए। कुल व फातिहा के वक्त दरगाह खचाखच भर गई। दरगाह प्रबंधक मकसूद अहसनमियां ने कहा कि दरगाह की निस्बत जिन बुजुर्गों से है, उनकी जिंदगी अल्लाह की याद और पैगंबरे इस्लाम के अमन-शांति के पैगाम फैलाने में गुजरी।
सूफीसंत मोहमाया से दूर रहे। उनका एक मकसद रहा कि इंसान-इंसान का मददगार बने। मौजूदा दौर में दरगाह से अमन-भाईचारे का संदेश पहुंचाया जा रहा है। सज्जादा नशीन ख्वाजा आमिर अली शाह ने कहा कि सूफी-संतों की सीरत अनुयायियों के लिए दर्पण है। जब तक लोग उनके पदचिन्हों पर चलते रहेंगे, तब तक कभी गुमराह नहीं होंगे। शिक्षा से ही तरक्की संभव है, जिसकी हमारे समाज में बेहद जरूरत है।
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शिक्षित वर्ग ही अपने समाजी व मजहबी अधिकार आसानी से हासिल कर सकता है। कहा कि खुद सुधरो जमाना सुधर जाएगा। यही सूफियों ने समाज को मूलमंत्र दिया है। इस मौके पर कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए। कुल व फातिहा के वक्त दरगाह में सन्नाटा पसर गया। सभी ने महान सूफियों को याद कर अकीदत पेश की। हाफिज खुर्शीद ने संचालन किया। इस अवसर पर फायक महमूद, शारिक महमूद, जुबैर, प्यारेमियां, आशिक अली, लतीफ अहमद, हाफिज मकसूद, चांदबाबू, नसीम खां, जमील, सरदार अहमद और मोहम्मद इशहाक आदि मौजूद रहे।
स्वास्थ्य शिविर लगाया गया
शेखपुर दरगाह में शांति व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। मरीजों के लिए स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया। शिविर में आने वाले मरीजों का डॉक्टरों ने चिकित्सीय परीक्षण कर दवा बांटी। महिलाओं ने जरूरत का सामान खरीदा तो बच्चों ने झूलों का आनंद लिया।
-दरगाह अहसनी महमूदी में उर्स का समापन, मुल्क की तरक्की व खुशहाली की मांगी दुआ
अमर उजाला ब्यूरो
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सोमवार को मौका था दरगाह अहसनी महमूदी में ख्वाजा अहसन अली शाह, ख्वाजा महमूद अली शाह व ख्वाजा मतलूब अली शाह के कुल व फातिहा का। सुबह होते ही शहर व ग्रामीण अंचलों के अकीदतमंदों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। भीड़ इस कदर रही कि दरगाह जाने वाले रास्ते तंग हो गए। कुल व फातिहा के वक्त दरगाह खचाखच भर गई। दरगाह प्रबंधक मकसूद अहसनमियां ने कहा कि दरगाह की निस्बत जिन बुजुर्गों से है, उनकी जिंदगी अल्लाह की याद और पैगंबरे इस्लाम के अमन-शांति के पैगाम फैलाने में गुजरी।
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सूफीसंत मोहमाया से दूर रहे। उनका एक मकसद रहा कि इंसान-इंसान का मददगार बने। मौजूदा दौर में दरगाह से अमन-भाईचारे का संदेश पहुंचाया जा रहा है। सज्जादा नशीन ख्वाजा आमिर अली शाह ने कहा कि सूफी-संतों की सीरत अनुयायियों के लिए दर्पण है। जब तक लोग उनके पदचिन्हों पर चलते रहेंगे, तब तक कभी गुमराह नहीं होंगे। शिक्षा से ही तरक्की संभव है, जिसकी हमारे समाज में बेहद जरूरत है।
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शिक्षित वर्ग ही अपने समाजी व मजहबी अधिकार आसानी से हासिल कर सकता है। कहा कि खुद सुधरो जमाना सुधर जाएगा। यही सूफियों ने समाज को मूलमंत्र दिया है। इस मौके पर कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए। कुल व फातिहा के वक्त दरगाह में सन्नाटा पसर गया। सभी ने महान सूफियों को याद कर अकीदत पेश की। हाफिज खुर्शीद ने संचालन किया। इस अवसर पर फायक महमूद, शारिक महमूद, जुबैर, प्यारेमियां, आशिक अली, लतीफ अहमद, हाफिज मकसूद, चांदबाबू, नसीम खां, जमील, सरदार अहमद और मोहम्मद इशहाक आदि मौजूद रहे।
स्वास्थ्य शिविर लगाया गया
शेखपुर दरगाह में शांति व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। मरीजों के लिए स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया। शिविर में आने वाले मरीजों का डॉक्टरों ने चिकित्सीय परीक्षण कर दवा बांटी। महिलाओं ने जरूरत का सामान खरीदा तो बच्चों ने झूलों का आनंद लिया।
-दरगाह अहसनी महमूदी में उर्स का समापन, मुल्क की तरक्की व खुशहाली की मांगी दुआ
अमर उजाला ब्यूरो