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Farrukhabad News: आंधी में पेड़ों से गिर गए 15 फीसदी आम के बौर
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कायमगंज। मंगलवार रात आई आंधी से आम की बौर को नुकसान हुआ है। करीब 15 फीसदी आम गिर गया है। मौसम में उतार-चढ़ाव की वजह से बागों में आम आधा ही रह गया है। जानकारों का कहना है कि कम फसल के चलते इस बार आम का स्वाद बेहतर और आकार बड़ा होगा।
वैसे तो पिछले साल की तुलना में इस साल पेड़ों पर आम की फसल कम आई। किसी किसी बाग में किल्ली निकल आई है। इससे पेड़ पर इक्का-दुक्का आम ही नजर आ रहे हैं। जानकार बताते हैं एक साल कम तो दूसरे साल भरपूर आम की पैदावार होती है। इस साल कम पैदावार है। पैदावार कम होने से आम महंगा बिकने की उम्मीद जताई जा रही है।
कम पैदावार के चलते मंगलवार रात हल्की बूंदाबांदी के साथ आंधी ने छोटा आम गिरा दिया। गांव बरझाला निवासी बागवान दिनेश गंगवार ने बताया कि इस साल मौसम ने साथ छोड़ दिया। इस समय आम बढ़वार पर है। ऐसे में बागों में नमी ज्यादा है।
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आम की फसल को पछुआ हवा की जरूरत है। पछुआ हवा से आम मोटा होगा। ऐसे में आंधी आने से छोटे आम में चेंपी नहीं बनी। डंठल कमजोर होने की वजह से करीब 15 फीसदी आम गिर गया, इसे बीनने में मजदूरी भी नहीं निकली। मजदूर न मिलने से आम एकत्र भी नहीं किया जा सका। बागों में फसल 60 प्रतिशत मुश्किल से बची। कुछ फसल को भुनगा खा गया।
हालांकि इस साल आम पर कीटनाशक का कम इस्तेमाल हुआ है। इससे यह माना जा रहा है कि आम साइज में बेहतर, रसीला और स्वाद में बेहतर होगा। मंडी में आढ़ती इफ्तिखार खां ने बताया कि आंधी में गिरा हुआ करीब 20 क्विंटल आम आया था, जो 3-4 रुपये किलो बिका है। मजदूर न मिलने से आम पूरी तरह एकत्र नहीं हुआ। फसल की पैदावार इस साल कम बताई जा रही है।
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वैसे तो पिछले साल की तुलना में इस साल पेड़ों पर आम की फसल कम आई। किसी किसी बाग में किल्ली निकल आई है। इससे पेड़ पर इक्का-दुक्का आम ही नजर आ रहे हैं। जानकार बताते हैं एक साल कम तो दूसरे साल भरपूर आम की पैदावार होती है। इस साल कम पैदावार है। पैदावार कम होने से आम महंगा बिकने की उम्मीद जताई जा रही है।
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कम पैदावार के चलते मंगलवार रात हल्की बूंदाबांदी के साथ आंधी ने छोटा आम गिरा दिया। गांव बरझाला निवासी बागवान दिनेश गंगवार ने बताया कि इस साल मौसम ने साथ छोड़ दिया। इस समय आम बढ़वार पर है। ऐसे में बागों में नमी ज्यादा है।
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आम की फसल को पछुआ हवा की जरूरत है। पछुआ हवा से आम मोटा होगा। ऐसे में आंधी आने से छोटे आम में चेंपी नहीं बनी। डंठल कमजोर होने की वजह से करीब 15 फीसदी आम गिर गया, इसे बीनने में मजदूरी भी नहीं निकली। मजदूर न मिलने से आम एकत्र भी नहीं किया जा सका। बागों में फसल 60 प्रतिशत मुश्किल से बची। कुछ फसल को भुनगा खा गया।
हालांकि इस साल आम पर कीटनाशक का कम इस्तेमाल हुआ है। इससे यह माना जा रहा है कि आम साइज में बेहतर, रसीला और स्वाद में बेहतर होगा। मंडी में आढ़ती इफ्तिखार खां ने बताया कि आंधी में गिरा हुआ करीब 20 क्विंटल आम आया था, जो 3-4 रुपये किलो बिका है। मजदूर न मिलने से आम पूरी तरह एकत्र नहीं हुआ। फसल की पैदावार इस साल कम बताई जा रही है।