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जरारी पीएचसी में 130 मरीज पहुंचे, 51 की जांच
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गांव जरारी में सड़क पर भरा गंदा पानी।
- फोटो : FARRUKHABAD
जरारी पीएचसी में 130 मरीज पहुंचे, 51 की जांच
कमालगंज। जरारी व खलासपुर में बुखार फैला है। मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 130 मरीज पहुंचे। 51 लोगों की जांच की गई। नालियों के सफाई अभियान के बावजूद कुछ स्थानों पर सड़क पर गंदा पानी भरा है। गांव के तीन तालाबों की सफाई न होने से घास उगी है। इसी से शाम होते ही कीड़े उड़कर घरों में पहुंचते हैं।
कई दिनों से जरारी व उसके मजरा खलासपुर गांव में बुखार ने लोगों का चैन छीन लिया है। लोग बच्चों व महिलाओं का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। मंगलवार को गांव के पीएचसी में भी 130 मरीज पहुंचे। इनमें 51 के खून की जांच की गई। जिला मुख्यालय से भी मलेरिया विभाग की टीम लगातार दूसरे दिन गांव पहुंची। टीम ने भी मरीजों का परीक्षण किया।
प्रधान की ओर से सफाई अभियान चलाया जा रहा है। बावजूद इसके कुछ स्थानों पर गंदा पानी भर जाता है। ग्रामीण मुवीन सिद्दीकी का कहना है कि मुख्य समस्या गांव के तीन तालाबों की सफाई न हो पाना है। तालाबों में घास खड़ी है। अंधेरा होते ही यहां से कीड़े उड़कर घरों तक पहुंच जाते हैं।
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खाना खाने के दौरान महीन कीड़ों के पेट में जाने का खतरा रहता है। वहीं पीएचसी के डॉ. अनुनय कुमार ने बताया कि तेजी से बदलते मौसम से वायरल बुखार का प्रकोप है। मलेरिया व डेंगू आदि की पुष्टि नहीं हो रही है। कभी तेज धूप तो कभी बारिश में भीगने से बच्चों के बीमार होने का खतरा रहता है।
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कमालगंज। जरारी व खलासपुर में बुखार फैला है। मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 130 मरीज पहुंचे। 51 लोगों की जांच की गई। नालियों के सफाई अभियान के बावजूद कुछ स्थानों पर सड़क पर गंदा पानी भरा है। गांव के तीन तालाबों की सफाई न होने से घास उगी है। इसी से शाम होते ही कीड़े उड़कर घरों में पहुंचते हैं।
कई दिनों से जरारी व उसके मजरा खलासपुर गांव में बुखार ने लोगों का चैन छीन लिया है। लोग बच्चों व महिलाओं का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। मंगलवार को गांव के पीएचसी में भी 130 मरीज पहुंचे। इनमें 51 के खून की जांच की गई। जिला मुख्यालय से भी मलेरिया विभाग की टीम लगातार दूसरे दिन गांव पहुंची। टीम ने भी मरीजों का परीक्षण किया।
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प्रधान की ओर से सफाई अभियान चलाया जा रहा है। बावजूद इसके कुछ स्थानों पर गंदा पानी भर जाता है। ग्रामीण मुवीन सिद्दीकी का कहना है कि मुख्य समस्या गांव के तीन तालाबों की सफाई न हो पाना है। तालाबों में घास खड़ी है। अंधेरा होते ही यहां से कीड़े उड़कर घरों तक पहुंच जाते हैं।
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खाना खाने के दौरान महीन कीड़ों के पेट में जाने का खतरा रहता है। वहीं पीएचसी के डॉ. अनुनय कुमार ने बताया कि तेजी से बदलते मौसम से वायरल बुखार का प्रकोप है। मलेरिया व डेंगू आदि की पुष्टि नहीं हो रही है। कभी तेज धूप तो कभी बारिश में भीगने से बच्चों के बीमार होने का खतरा रहता है।