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मुल्क के अमन और सलामती की दुआ की
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फर्रुखाबाद। हजरत शेख मखदूम बुर्राक का उर्स रविवार को कुल शरीफ के साथ समाप्त हो गया। इसमें मुल्क में अमन और सलामती की दुआ की गई। यहां आए अकीदतमंदों में तबर्रुक में लड्डू बांटे गए। उर्स में हरदोई, मैनपुरी, कानपुर, दिल्ली, मुंबई और शाहजहांपुर आदि गैर जनपदों और राज्यों के लोगों ने भी दरगाह पर हाजिरी दी और मन्नतें मानीं। मजार पर माथा टेककर मुरादें मांगी गईं।
उर्स व मेले में दोपहर को सैकड़ों छड़ीबाज दरगाह से भोजपुर चिल्लाहगाह पहुंचे। यहां दरगाह के सज्जादानशीन अजीजुल हक गालिब मियां को ऐतिहासिक विशेष लिबास पहनाया गया। उसे पहनते ही सज्जादा नशीन मूर्छित हो गए। उन्हें डोले में बैठाकर शेखपुर दरगाह ले जाया गया। दरगाह पर सज्जादानशीन को हजरत शेख मखदूम की मजार शरीफ का तवाफ कराया गया और विशेष लिबास उतारा गया। कव्वाल लतीफ शेखपुरी ने फारसी भाषा में रूबाई पढ़ी तो सज्जादानशीन अजीजुलहक होश में आ गए। सज्जादा नशीन ने कुल शरीफ के दौरान मुल्क की तरक्की व शांति की दुआ मांगी गई।
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उर्स व मेले में दोपहर को सैकड़ों छड़ीबाज दरगाह से भोजपुर चिल्लाहगाह पहुंचे। यहां दरगाह के सज्जादानशीन अजीजुल हक गालिब मियां को ऐतिहासिक विशेष लिबास पहनाया गया। उसे पहनते ही सज्जादा नशीन मूर्छित हो गए। उन्हें डोले में बैठाकर शेखपुर दरगाह ले जाया गया। दरगाह पर सज्जादानशीन को हजरत शेख मखदूम की मजार शरीफ का तवाफ कराया गया और विशेष लिबास उतारा गया। कव्वाल लतीफ शेखपुरी ने फारसी भाषा में रूबाई पढ़ी तो सज्जादानशीन अजीजुलहक होश में आ गए। सज्जादा नशीन ने कुल शरीफ के दौरान मुल्क की तरक्की व शांति की दुआ मांगी गई।
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