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महात्मा गांधी दो बार आए थे अयोध्या, सरयू में किया था स्थान

Tue, 01 Oct 2019 11:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Oct 2019 11:42 PM IST
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Mahatma Gandhi came twice to Ayodhya
अयोध्या। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का रामनगरी से गहरा लगाव रहा। इसकी पुष्टि उनकी रामभक्ति और रामराज्य के आदर्श से भी पारिभाषित होती है। 1921 में गांधी ने पहली बार अयोध्या का दौरा किया।
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गांधी जी 1929 में विभिन्न प्रांतों का दौरा करते हुए दूसरी बार भी अयोध्या आगमन के मोह से नहीं बच सके। इस बार उन्होंने मोतीबाग में सभा से पहले सरयू में स्नान किया था।
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बापू ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय व्यस्तता के बीच अयोध्या के लिए भी समय निकाला था। चौरी-चौरा कांड की हिंसा के विरोध में बापू राष्ट्रव्यापी दौरा के क्रम में 20 फरवरी 1921 को रामनगरी पहुंचे और इसी दिन सूरज ढलने तक उन्होंने जालपादेवी मंदिर के करीब के मैदान में सभा की।
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फैजाबाद के धारा रोड स्थित बाबू शिवप्रसाद की कोठी में रात्रि गुजारने के बाद बापू अगले दिन यानी 22 फरवरी की सुबह रामनगरी पहुंचे और सरयू स्नान कर अपनी आस्था का इजहार किया।
हालांकि, एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि उन्होंने सबसे दृढ़ता से और असमान रूप से हिंसा की निंदा की, और कहा कि वह इसे भगवान और मनुष्य के खिलाफ पाप मानते हैं। गांधी जी 1929 में विभिन्न प्रांतों का दौरा करते हुए दूसरी बार भी अयोध्या आगमन के मोह से नहीं बच सके। इस बार उन्होंने मोतीबाग में सभा की।
अयोेध्या आए लेकिन मंदिर नहीं गए गांधी: इतिहासकार
इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक द इयर्स चैट चेंजेड द वर्ल्ड में भी महात्मा गांधी के आगमन का जिक्र करते हुए लिखा है कि गांधी जी ने अयोध्या आकर सरयू स्नान तो किया लेकिन किसी भी मंदिर में दर्शन पूजन करने नहीं गए।
उन्होंने कभी भी राममंदिर मुद्दे पर कुछ नहीं बोला। जबकि महात्मा के पोते, दार्शनिक रामचंद्र गांधी ने दुनिया में प्राचीनतम आध्यात्मिकता की प्राचीन परंपरा का सम्मान करने के लिए राम-रहीम चबूतरा के निर्माण का सुझाव दिया था।

सरयू में भी विसर्जित हुईं थीं बापू की अस्थियां
बापू की अस्थियां देश की जिन चुनिंदा पवित्र नदियों में विसर्जित की गईं, उनमें से एक सरयू भी थी। बापू के निधन के कुछ दिनों बाद संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष एवं कालांतर में आजाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने डॉ. राजेंद्र प्रसाद कई अन्य कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बापू की अस्थियां लेकर अयोध्या आए और सरयू में विसर्जित किया। बापू के अस्थि विसर्जन की स्मृति को जीवंत रखने के उद्देश्य से सरयू तट पर ही गांधी ज्ञानमंदिर की स्थापना की गई और यह मंदिर बापू के विचारों और आदर्शों का गत 70 वर्षों से वाहक बना हुआ है। गांधी ज्ञान मंदिर में ही प्रतिवर्ष बापू की पुण्यतिथि से अगले 15 दिनों के लिए सर्वोदय पखवारा मनाए जाने की परंपरा भी तभी से संचालित है। 1988 में सरयू के इसी तट पर बापू की स्मृति सहेजते हुए उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई।
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