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सूख रहीं धान-उड़द की फसलें
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2015 11:35 PM IST
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विभाग कुल नलकूपों से महज पांच फीसदी नलकूप खराब होने की रिपोर्ट प्रति माह प्रशासन को देता है। बाराबंकी के दो ब्लॉक के अलावा जिले के सभी नौ ब्लॉक नलकूप खंड फैजाबाद में आते हैं।
इनसे करीब 1174 एकड़ कृषि भूमि सींचने का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन ब्लॉकों करीब 50 फीसदी नलकूप मोटर, केबिल, नाली और ट्रांसफार्मर आदि दोषों में बंद पड़े हैं।
लो वोल्टेज के चलते कई राजकीय नलकूप सही होते हुए भी पानी नहीं उगल रहे हैं। बरसात न होने और अवर्षण से सूखे की स्थिति है। जिसके चलते किसान धान की सिंचाई को लेकर परेशान हैं। उड़द की फसल भी सूख रही है।
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शासन की ओर से प्रति नलकूप के रखरखाव, मरम्मत और दूसरे मदों के लिए 22 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन इसका बंदरबांट हो जाता है। इसके चलते कई नलकूप महीनों से तो कई वर्षों से पानी नहीं उगल रहे हैं।
तमाम नलकूपों की तो हौज और नालियां तक ध्वस्त हो गई हैं। मोटर से पानी निकलता है तो हौज से आगे ही नहीं बढ़ता। किसानों ने नाली दोष, मोटर दोष, ट्रांसफार्मर दोष, केबिल दोष और लो वोल्टेज में बंद पड़े नलकूपों को सही कराकर चालू कराने की मांग को लेकर कई बार विभाग को पत्र भेजा मगर सुनवाई नहीं हुई।
अधिशासी अभियंता नलकूप खंड मुरलीधर ने कहा कि जिले के पचास फीसदी नलकूप खराब होने की बात सही नहीं है। करीब 40-45 नलकूप विभिन्न दोषों में बंद जरूर हैं।
मगर इनमें से अधिकांश विद्युत दोष के चलते बंद हैं। विभाग को इस बाबत पत्र लिखा गया है। छोटे-छोटे दोषों में बंद पड़े राजकीय नलकूपों को शीघ्र सही कराया जाएगा।
नलकूप खंड के सिंचाई संघ के अध्यक्ष आरके पांडेय ने कहा कि सरकारी नलकूपों की हालत बहुत खराब है। आधे से अधिक नलकूप विभिन्न दोषों में पानी नहीं उगल रहे हैं। हेड से आगे पानी नहीं बढ़ता।
कई नलकूपों की नालियां तक दुरुस्त नहीं हैं। किसान दूसरे संसाधनों अथवा प्राइवेट नलकूपों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। किसान नेता पारसनाथ वर्मा बोले कि तारुन ब्लॉक के कनपुरिया गांव के सरकारी नलकूप का ट्रांसफार्मर डेढ़ माह से खराब है। निजी और सरकारी नलकूप ठप हैं। खेतों की सिंचाई नहीं हो रही है।
किसान चंदूभाई पटेल ने कहा कि रामदासपुर कछौली में छह माह से नलकूप बंद है। इससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। पानी बरस रहा न सरकारी स्तर पर सिंचाई का कोई इंतजाम है।
सहसीपुर गांव के किसान में अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि सात माह से नलकूप खराब होने से सिंचाई नहीं हो पा रही है। ऊपर वाला साथ नहीं दे रहा है तो अधिकारी भी मुंह मोड़ लिए हैं।
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इनसे करीब 1174 एकड़ कृषि भूमि सींचने का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन ब्लॉकों करीब 50 फीसदी नलकूप मोटर, केबिल, नाली और ट्रांसफार्मर आदि दोषों में बंद पड़े हैं।
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लो वोल्टेज के चलते कई राजकीय नलकूप सही होते हुए भी पानी नहीं उगल रहे हैं। बरसात न होने और अवर्षण से सूखे की स्थिति है। जिसके चलते किसान धान की सिंचाई को लेकर परेशान हैं। उड़द की फसल भी सूख रही है।
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शासन की ओर से प्रति नलकूप के रखरखाव, मरम्मत और दूसरे मदों के लिए 22 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन इसका बंदरबांट हो जाता है। इसके चलते कई नलकूप महीनों से तो कई वर्षों से पानी नहीं उगल रहे हैं।
तमाम नलकूपों की तो हौज और नालियां तक ध्वस्त हो गई हैं। मोटर से पानी निकलता है तो हौज से आगे ही नहीं बढ़ता। किसानों ने नाली दोष, मोटर दोष, ट्रांसफार्मर दोष, केबिल दोष और लो वोल्टेज में बंद पड़े नलकूपों को सही कराकर चालू कराने की मांग को लेकर कई बार विभाग को पत्र भेजा मगर सुनवाई नहीं हुई।
अधिशासी अभियंता नलकूप खंड मुरलीधर ने कहा कि जिले के पचास फीसदी नलकूप खराब होने की बात सही नहीं है। करीब 40-45 नलकूप विभिन्न दोषों में बंद जरूर हैं।
मगर इनमें से अधिकांश विद्युत दोष के चलते बंद हैं। विभाग को इस बाबत पत्र लिखा गया है। छोटे-छोटे दोषों में बंद पड़े राजकीय नलकूपों को शीघ्र सही कराया जाएगा।
नलकूप खंड के सिंचाई संघ के अध्यक्ष आरके पांडेय ने कहा कि सरकारी नलकूपों की हालत बहुत खराब है। आधे से अधिक नलकूप विभिन्न दोषों में पानी नहीं उगल रहे हैं। हेड से आगे पानी नहीं बढ़ता।
कई नलकूपों की नालियां तक दुरुस्त नहीं हैं। किसान दूसरे संसाधनों अथवा प्राइवेट नलकूपों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। किसान नेता पारसनाथ वर्मा बोले कि तारुन ब्लॉक के कनपुरिया गांव के सरकारी नलकूप का ट्रांसफार्मर डेढ़ माह से खराब है। निजी और सरकारी नलकूप ठप हैं। खेतों की सिंचाई नहीं हो रही है।
किसान चंदूभाई पटेल ने कहा कि रामदासपुर कछौली में छह माह से नलकूप बंद है। इससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। पानी बरस रहा न सरकारी स्तर पर सिंचाई का कोई इंतजाम है।
सहसीपुर गांव के किसान में अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि सात माह से नलकूप खराब होने से सिंचाई नहीं हो पा रही है। ऊपर वाला साथ नहीं दे रहा है तो अधिकारी भी मुंह मोड़ लिए हैं।