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ऐतिहासिक दरा का एक गुंबद ढहा
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2015 12:33 AM IST
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नवाब शुजाउद्दौला के मकबरे गुलाबबाड़ी के सौंदर्य को बढ़ाने वाले ऐतिहासिक दरा का एक गुंबद भरभरा कर गिर गया। नेपाल में आए भूकंपके दौरान फैजाबाद की भी धरती डोली थी।
जिसके कारण इमारत में दरारें पड़ गई थी। लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता के कारण इन दरारों की मरम्मत नहीं हुई। इसी नतीजा रहा कि दरे का एक गुंबद गिर गया।
ऐतिहासिक दरा की दीवार भूकंप के बाद कमजोर हो गई थी तथा इनमें दरारें भी पड़ गई थी। इसको लेकर कई बार चेताया गया लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।
यदि समय रहते मरम्मत हो गई होती तो दरे का गुंबद का वजूद सुरक्षित रहता। अभी कुछ दिन पहले इसके भीतर लगी कई लकड़ियां भी गिर गई थीं। बावजूद इसके इसे बचाने का कोई पहल नहीं की गई।
गौरतलब है कि 1720 में सआदत अली खां ने अवध में नवाब साम्राज्य की स्थापना की। फैजाबाद इसकी राजधानी बना। ईरानी मूल के निवासी होने के कारण यहां पर उस युग में बनी इमारतों में फारसी स्थापत्य शैली का सौंदर्य अपने शबाब पर रहा।
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चाहे वह नाका का मकबरा हो या शुजाउद्दौला का नकबरा गुलाबबाड़ी हो। लेकिन मरम्मत के अभाव में अवध की कई नामचीन इमारतों का सौंदर्य छीन रहा है।
पुरातत्व संरक्षण सहायक डीके जायसवाल का कहना है यद्यपि संरक्षित नहीं है, तथापि हेरिटेज है। जिला प्रशासन का दायित्व है कि वह देखरेख करे।
चाहे विकास प्राधिकरण से कराए या नगर पालिका से। लेकिन संभवत नजूल विभाग ने अवैध तरीके से इसे लोगों को आवंटित कर दिया है। जिसके कारण अवैध रूप से लोग रह रहे हैं।
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जिसके कारण इमारत में दरारें पड़ गई थी। लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता के कारण इन दरारों की मरम्मत नहीं हुई। इसी नतीजा रहा कि दरे का एक गुंबद गिर गया।
ऐतिहासिक दरा की दीवार भूकंप के बाद कमजोर हो गई थी तथा इनमें दरारें भी पड़ गई थी। इसको लेकर कई बार चेताया गया लेकिन जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया।
यदि समय रहते मरम्मत हो गई होती तो दरे का गुंबद का वजूद सुरक्षित रहता। अभी कुछ दिन पहले इसके भीतर लगी कई लकड़ियां भी गिर गई थीं। बावजूद इसके इसे बचाने का कोई पहल नहीं की गई।
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गौरतलब है कि 1720 में सआदत अली खां ने अवध में नवाब साम्राज्य की स्थापना की। फैजाबाद इसकी राजधानी बना। ईरानी मूल के निवासी होने के कारण यहां पर उस युग में बनी इमारतों में फारसी स्थापत्य शैली का सौंदर्य अपने शबाब पर रहा।
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चाहे वह नाका का मकबरा हो या शुजाउद्दौला का नकबरा गुलाबबाड़ी हो। लेकिन मरम्मत के अभाव में अवध की कई नामचीन इमारतों का सौंदर्य छीन रहा है।
पुरातत्व संरक्षण सहायक डीके जायसवाल का कहना है यद्यपि संरक्षित नहीं है, तथापि हेरिटेज है। जिला प्रशासन का दायित्व है कि वह देखरेख करे।
चाहे विकास प्राधिकरण से कराए या नगर पालिका से। लेकिन संभवत नजूल विभाग ने अवैध तरीके से इसे लोगों को आवंटित कर दिया है। जिसके कारण अवैध रूप से लोग रह रहे हैं।