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तालाबों को बचाने की छेडी़ मुहिम
Updated Sat, 03 Mar 2018 10:44 PM IST
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तालाबों को बचाने की छेड़ी मुहिम
- पांच बड़े रकबों के तालाबों को करा चुके हैं मुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। शहर की तेजी से बढ़ रही आबादी के चलते ताल-तलैया समाप्त हो रहे हैं। शहर में जगह-जगह तालाबों पर अतिक्रमण है। मौजूदा समय में शहर में 46 से अधिक तालाब अतिक्रमित हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। वहीं तालाबों को मुक्त कराने के लिए कुछ समाजसेवियों ने जिलाधिकारी को चिट्ठी सौंपी है। पता चला है कि यह टोली अब तक बड़े रकबों के पांच से अधिक तालाब भू-माफिया से मुक्त करा चुकी है।
तालाब बचाने के अभियान में लगे लोगों ने शहर के तालाबों को मुक्त कराने की शुरुआत जनौरा के इमिलिया तालाब से की। उस समय के कुछ लोगों ने तत्कालीन भगेलू राम के फर्जी हस्ताक्षर बना कर तालाब की भूमि को अपने नाम करा लिया था। सर्वप्रथम जनौरा के राजेश सिंह मानव ने इसके लिए पत्राचार शुरू किया। काफी दौड़भाग व पत्राचार के बाद इमिलिया तालाब मुक्त हो पाया। वह बताते हैं कि इसके बाद गांव व आसपास के लोग तालाबों पर अतिक्रमण की बातें व पत्राचार के लिए उनके पास आते रहे। इसी दौरान पौराणिक सरोवर भवतारा का मामला सामने आया। काफी मशक्कतों के बाद यह तालाब मुक्त हो पाया। इसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यहीं से कुछ जाबाजों ने शहर के तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने का बीड़ा उठाया। अब इस टीम में सुरेंद्र तिवारी, ऋतुराज सिंह, दिग्विजय सिंह, संदीप सिंह, मात प्रसाद, गिरिजेश सिंह व अन्य लोग शामिल हैं। टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 250 बिस्वे में स्थित देकहवा ताल को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इसके अलावा गिरजाकुंड व अंबेडकर सरोवर को मुक्त कराया है। शहर के देवकाली में स्थित 60 बिस्वे तालाब के लिए मौजूदा समय में हाईकोर्ट में मुकदमा लड़ रहे हैं।
राजेश सिंह मानव बताते हैं कि काम आसान नहीं है लेकिन आगामी पीढ़ी को बेहतर कल देने के लिए लड़ाई तो लड़नी ही पड़ेगी। वह बताते हैं कि अब तक पांच तालाबों पर कार्रवाई प्रशासन की ओर से की गई है लेकिन दुखद यह है कि किसी भी आरोपी को जेल के सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया। अगर प्रशासन आरोपियों पर कार्रवाई करे तो अच्छा संदेश जाएगा।
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सुरेंद्र प्रताप तिवारी का कहना है कि अगर शहर के सभी तालाब अतिक्रमण मुक्त हो जाए तो जल सरंक्षण के साथ-साथ बरसात के दिनों में होने वाले जलभराव से भी मुक्ति मिल जाएगी। वह बताते हैं कि सरकार इसका सुंदरीकरण करा दें तो यह अच्छे उद्यानों का भी रूप ले सकते हैं।
श्रावस्ती मॉडल के आधार पर तालाबों से अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा है। कुछ स्थानों पर कार्रवाई हुई है। जल्द ही व्यापक पैमाने पर कार्रवाई की जाएगी। - मधुसूदन नागराज हुल्गी, एसडीएम सदर
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- पांच बड़े रकबों के तालाबों को करा चुके हैं मुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। शहर की तेजी से बढ़ रही आबादी के चलते ताल-तलैया समाप्त हो रहे हैं। शहर में जगह-जगह तालाबों पर अतिक्रमण है। मौजूदा समय में शहर में 46 से अधिक तालाब अतिक्रमित हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। वहीं तालाबों को मुक्त कराने के लिए कुछ समाजसेवियों ने जिलाधिकारी को चिट्ठी सौंपी है। पता चला है कि यह टोली अब तक बड़े रकबों के पांच से अधिक तालाब भू-माफिया से मुक्त करा चुकी है।
तालाब बचाने के अभियान में लगे लोगों ने शहर के तालाबों को मुक्त कराने की शुरुआत जनौरा के इमिलिया तालाब से की। उस समय के कुछ लोगों ने तत्कालीन भगेलू राम के फर्जी हस्ताक्षर बना कर तालाब की भूमि को अपने नाम करा लिया था। सर्वप्रथम जनौरा के राजेश सिंह मानव ने इसके लिए पत्राचार शुरू किया। काफी दौड़भाग व पत्राचार के बाद इमिलिया तालाब मुक्त हो पाया। वह बताते हैं कि इसके बाद गांव व आसपास के लोग तालाबों पर अतिक्रमण की बातें व पत्राचार के लिए उनके पास आते रहे। इसी दौरान पौराणिक सरोवर भवतारा का मामला सामने आया। काफी मशक्कतों के बाद यह तालाब मुक्त हो पाया। इसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यहीं से कुछ जाबाजों ने शहर के तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने का बीड़ा उठाया। अब इस टीम में सुरेंद्र तिवारी, ऋतुराज सिंह, दिग्विजय सिंह, संदीप सिंह, मात प्रसाद, गिरिजेश सिंह व अन्य लोग शामिल हैं। टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 250 बिस्वे में स्थित देकहवा ताल को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इसके अलावा गिरजाकुंड व अंबेडकर सरोवर को मुक्त कराया है। शहर के देवकाली में स्थित 60 बिस्वे तालाब के लिए मौजूदा समय में हाईकोर्ट में मुकदमा लड़ रहे हैं।
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राजेश सिंह मानव बताते हैं कि काम आसान नहीं है लेकिन आगामी पीढ़ी को बेहतर कल देने के लिए लड़ाई तो लड़नी ही पड़ेगी। वह बताते हैं कि अब तक पांच तालाबों पर कार्रवाई प्रशासन की ओर से की गई है लेकिन दुखद यह है कि किसी भी आरोपी को जेल के सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया। अगर प्रशासन आरोपियों पर कार्रवाई करे तो अच्छा संदेश जाएगा।
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सुरेंद्र प्रताप तिवारी का कहना है कि अगर शहर के सभी तालाब अतिक्रमण मुक्त हो जाए तो जल सरंक्षण के साथ-साथ बरसात के दिनों में होने वाले जलभराव से भी मुक्ति मिल जाएगी। वह बताते हैं कि सरकार इसका सुंदरीकरण करा दें तो यह अच्छे उद्यानों का भी रूप ले सकते हैं।
श्रावस्ती मॉडल के आधार पर तालाबों से अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा है। कुछ स्थानों पर कार्रवाई हुई है। जल्द ही व्यापक पैमाने पर कार्रवाई की जाएगी। - मधुसूदन नागराज हुल्गी, एसडीएम सदर