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वेदों से नई पीढ़ी को दिशा देना जरूरी: डॉ देवी सहाय
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:18 AM IST
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वेदों से नई पीढ़ी को दिशा देना जरूरी : दीप
- साहित्य सेवा के लिए मिलेगा साहित्य भूषण सम्मान
अयोध्या। साहित्य जगत के जाने-माने किरदार अयोध्या निवासी डॉ. देवी सहाय पांडेय ‘दीप’ को साहित्य सेवा के लिये वर्ष 2017 के साहित्य भूषण सम्मान के लिये चुना गया है। ‘अमर उजाला’ से उन्हें सम्मान मिलने की सूचना मिली तो पहले वे अचरज में थे। बोले, हमें तो कुछ पता ही नहीं चला है। आपसे से साहित्य भूषण सम्मान के लिए चयनित होने की सूचना मिल रही है। उनका कहना था कि समाज को सार्थक दिखा देने वाली रचनाएं ही कालजयी होती हैं।
साहित्यकार डॉ. देवी सहाय पांडेय 1954 से साहित्य लेखन कर रहे है। अभी 80 की उम्र में भी लगभग आठ घंटे तक साहित्य सृजन करते हैं। वर्तमान में जयतुभारतम् संस्कृत उपन्यास लिख रहे हैं। उनकी पहली पुस्तक द्रोणोच्छास 1994 में प्रकाशित हुई थी।
महाकाव्य, खंडकाव्य, गीत काव्य, संस्कृत उपन्यास सहित दीप जी अब तक हिंदी, संस्कृत मिलाकर 25 पुस्तकों का संपादन कर चुके है। उन्हें पतंजलि योग दर्शन सम्मान, गीता ज्ञान दीपिका सम्मान, भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान, साहित्य समीक्षा सम्मान ,राष्ट्रीय मधुकर सम्मान, पुरुषोत्तम दास टंडन पुरस्कार सहित एक दर्जन से अधिक सम्मान मिल चुके है।
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उन्होंने बताया कि चारों वेदों के सभी मंत्रों का हिंदी में अन्वयपरक शब्दार्थ, अनुवाद व पद्यानुवाद कर रहे हैं। चारों वेदों के अनुवाद व पद्यानुवाद के पाण्डुलिपि का वजन 80 किलो से भी ज्यादा है। यह चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली द्वारा प्रकाशित भी हो रहा है। संभवत: 2018 के अंत तक छप जायेगा व बाजार में उपलब्ध होगा।
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- साहित्य सेवा के लिए मिलेगा साहित्य भूषण सम्मान
अयोध्या। साहित्य जगत के जाने-माने किरदार अयोध्या निवासी डॉ. देवी सहाय पांडेय ‘दीप’ को साहित्य सेवा के लिये वर्ष 2017 के साहित्य भूषण सम्मान के लिये चुना गया है। ‘अमर उजाला’ से उन्हें सम्मान मिलने की सूचना मिली तो पहले वे अचरज में थे। बोले, हमें तो कुछ पता ही नहीं चला है। आपसे से साहित्य भूषण सम्मान के लिए चयनित होने की सूचना मिल रही है। उनका कहना था कि समाज को सार्थक दिखा देने वाली रचनाएं ही कालजयी होती हैं।
साहित्यकार डॉ. देवी सहाय पांडेय 1954 से साहित्य लेखन कर रहे है। अभी 80 की उम्र में भी लगभग आठ घंटे तक साहित्य सृजन करते हैं। वर्तमान में जयतुभारतम् संस्कृत उपन्यास लिख रहे हैं। उनकी पहली पुस्तक द्रोणोच्छास 1994 में प्रकाशित हुई थी।
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महाकाव्य, खंडकाव्य, गीत काव्य, संस्कृत उपन्यास सहित दीप जी अब तक हिंदी, संस्कृत मिलाकर 25 पुस्तकों का संपादन कर चुके है। उन्हें पतंजलि योग दर्शन सम्मान, गीता ज्ञान दीपिका सम्मान, भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान, साहित्य समीक्षा सम्मान ,राष्ट्रीय मधुकर सम्मान, पुरुषोत्तम दास टंडन पुरस्कार सहित एक दर्जन से अधिक सम्मान मिल चुके है।
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उन्होंने बताया कि चारों वेदों के सभी मंत्रों का हिंदी में अन्वयपरक शब्दार्थ, अनुवाद व पद्यानुवाद कर रहे हैं। चारों वेदों के अनुवाद व पद्यानुवाद के पाण्डुलिपि का वजन 80 किलो से भी ज्यादा है। यह चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली द्वारा प्रकाशित भी हो रहा है। संभवत: 2018 के अंत तक छप जायेगा व बाजार में उपलब्ध होगा।