{"_id":"6ad27010b94a6a5efe0833e4","slug":"zahiruddin-has-been-thundering-on-the-ramlila-stage-for-45-years-etawah-news-c-216-1-etw1012-151554-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: 45 साल से रामलीला में गरज रहे जहीरुद्दीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: 45 साल से रामलीला में गरज रहे जहीरुद्दीन
Sat, 17 Oct 2026 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:12 AM IST
विज्ञापन
फोटो: 5 रावण के अभिनय के लिए तैयार जहीरुद्दीन। संवाद
ताखा। रामलीला के मंच पर जब रावण की गर्जना गूंजती है तो दर्शक रोमांचित हो उठते हैं। सरसई नावर के जहीरुद्दीन खां पिछले 45 वर्षों से अपने अभिनय के दम पर रामलीला में अलग पहचान बनाए हुए हैं। पहले बाणासुर फिर मेघनाद और अब रावण के किरदार में उतरकर वह दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। 70 वर्ष की उम्र में भी जहीरुद्दीन का रामलीला के प्रति जुनून आज भी बरकरार है।
जहीरुद्दीन खां बताते हैं कि रामलीला से उनका जुड़ाव स्कूल के दिनों में ही हो गया था। 1980 के दशक में उन्होंने बाणासुर का किरदार निभाकर अभिनय की शुरुआत की थी। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद कई वर्षों तक उन्होंने मेघनाद की भूमिका निभाई। बीते चार वर्षों से वह सरसई नावर की रामलीला में रावण का किरदार निभा रहे हैं।
धनुष यज्ञ की लीला में रावण के रूप में मंच पर उतरना उनके लिए खास अनुभव होता है। उनकी बुलंद आवाज, प्रभावशाली संवाद और अभिनय दर्शकों को आकर्षित करते हैं। रामलीला के प्रति उनका समर्पण इस बात का उदाहरण है कि कला के प्रति लगाव उम्र का मोहताज नहीं होता।
विज्ञापन
जहीरुद्दीन खां ने बताया कि वह रामलीला में केवल अभिनय नहीं, बल्कि वर्षों से जुड़ी एक परंपरा और जुनून है। चार दशक से अधिक समय तक अलग-अलग पात्रों को जीवंत करने वाले जहीरुद्दीन आज भी मंच पर उसी उत्साह से उतरते हैं।
विज्ञापन
जहीरुद्दीन खां बताते हैं कि रामलीला से उनका जुड़ाव स्कूल के दिनों में ही हो गया था। 1980 के दशक में उन्होंने बाणासुर का किरदार निभाकर अभिनय की शुरुआत की थी। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद कई वर्षों तक उन्होंने मेघनाद की भूमिका निभाई। बीते चार वर्षों से वह सरसई नावर की रामलीला में रावण का किरदार निभा रहे हैं।
विज्ञापन
धनुष यज्ञ की लीला में रावण के रूप में मंच पर उतरना उनके लिए खास अनुभव होता है। उनकी बुलंद आवाज, प्रभावशाली संवाद और अभिनय दर्शकों को आकर्षित करते हैं। रामलीला के प्रति उनका समर्पण इस बात का उदाहरण है कि कला के प्रति लगाव उम्र का मोहताज नहीं होता।
विज्ञापन
जहीरुद्दीन खां ने बताया कि वह रामलीला में केवल अभिनय नहीं, बल्कि वर्षों से जुड़ी एक परंपरा और जुनून है। चार दशक से अधिक समय तक अलग-अलग पात्रों को जीवंत करने वाले जहीरुद्दीन आज भी मंच पर उसी उत्साह से उतरते हैं।