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भागवत कथा को आचरण में उतारने से होगा कल्याण

Fri, 12 Mar 2021 11:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 11:23 PM IST
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Welfare will be done by putting Bhagwat Katha into practice
महेवा। ग्राम आनेपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत में शुक्रवार को आचार्य अरविंद महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीकृष्ण की लीला जीव के हृदय के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का विकास करती है। उसी ज्ञान के माध्यम से जीव पूर्ण ब्रह्म श्रीकृष्ण से साक्षात्कार करता है। भागवत कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य का उद्धार नही होने वाला है। इसे आचरण में उतारने से ही कल्याण होगा।
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आचार्य ने महारास की कथा सुनाते हुए कहा कि रास शब्द रस से बना है। आजकल रास को बहुत गंदा शब्द बना दिया गया है। जहां एक रस अनेक रूपों में प्रकट होता है, वह रास कहलाता है। भक्त भी रस से भरे होते हैं। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों को रसिक कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का एहसास ही रास है। भगवान श्रीकृष्ण का रास देखने देवी-देवता भी आते हैं।
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आचार्य ने कथा के बीच में जब भगवान राधाकृष्ण के भजनों की राग छेड़ी तो पंडाल में उपस्थित श्रोता खुद को नाचने से नहीं रोक पाए। पूरा पंडाल श्रद्धा भक्ति से आनंदित होकर भगवान के भजनों में थिरकने लगा। परीक्षित सुखदेव चौबे और उनकी पत्नी मुन्नी देवी हैं। कथा में अतुल तिवारी, अनुरुद्ध चौबे, आलोक तिवारी, शिवम, अवनीश, अमन चौबे समेत कई लोग मौजूद रहे।
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