‘हमें भी खाक होना है तुम्हें भी खाक होना है’
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इटावा। इटावा महोत्सव एवं जनपद प्रदर्शनी पंडाल में बीती रात हुए अखिल भारतीय मुशायरे में जाने माने शायरों ने एक से एक बढ़िया कलाम पेश किए। मुशायरे का उद्घाटन जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल एवं सदर विधायक रघुराज शाक्य ने मंच पर शमां रोशन कर किया।
मुशायरे का शुभारंभ विलाल अहमद ने बेदमशाह वारसी और आमिर हुसैन ने निसार सीमावी की गजल पढ़कर किया। इसके बाद शायर अल्ताफ जिया महाराष्ट्र ने ‘दामन में तेरे यूं ही उजाला नहीं फैला, आंखों से कोई चीज चमकदार गिरी है।’ इसी कड़ी में डॉ. नदीम शाद ने ‘वो क्या रुकेगा भला चार बूंद की खातिर, जो आ रहा हो समंदर को मारकर ठोकर।’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। काबिश रुधौलवी ने सुनाया- ‘सुना है हिंद की सरहद ने खून मांगा है, मैं जा रहा हूं मेरे साथ चल रहा है क्या।’ तथा वसीम रामपुरी ने ‘फातिमा से प्यार था शाहे दो आलम को बहुत, इसलिए हमको भी घर में बेटियां बहुत अच्छी लगीं।’ सुनाई तो श्रोता वाह वाह कर उठे।
जलाल महकश भोपाली ने ‘नेजों पे ये चराग उछाले न जाएंगे, बुझ भी गए तो उनके उजाले न जाएंगे।’ सुनाकर उम्मीद की अलख जगाई। शहजादा कलीम (लखनऊ) ने ‘गुरुर-ए-हुस्न में इतना न डूबो एक दिन आखिर, हमें भी खाक होना है तुम्हें भी खाक होना है।’ सुनाकर जीवन की सच्चाई से रुबरु कराया। मुजाबिर मालेगांव ने पढ़ा ‘इतनी गजलें कहां से लाते हो, खुद ही कहते या सुनाते हो।’ हास्य शायर जहाज देवबंदी ने अपने रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने सुनाया ‘वो था कि मेरी बीबी को लेकर हुआ फरार, मैं दोस्तों को शेर सुनाने में रह गया।’
इटावा के युवा शायर अफजल इटावी ने ‘दिलाओ दीन की तालीम अपने बच्चों को, सितमगारों से अगर इंतकाम लेना है।’ सुनाकर सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम संयोजक पूर्व नगर पालिका चेयरमैन जहीर अहमद अंसारी और सपा शहर अध्यक्ष मुबारक अंजुम ने शायरों को सम्मानित किया।
मुशायरे की अध्यक्षता नईम अख्तर बुरहानपुरी और संचालन नदीम फर्रुख ने किया। मुशायरे में इमरान प्रतापगढ़ी, अंजुम रहबर नदीम अख्तर बुरहानपुरी, हाशिम फीरोजाबादी, निकहत अमरोहवी, नदीम फर्रुख आदि ने भी शायरी सुनाई। मुशायरे में एडीएम ईश्वर चंद्र, एसडीएम सदर महेंद्र कुमार सिंह, लक्ष्मीपति वर्मा, नफीसुल अंसारी, फीरोज अंसारी, फुरकान अहमद, शावेज नकवी, तनवीर फरहत, कमरुद्दीन पन्ना, धीरेंद्र यादव, डॉ. आशीष दीक्षित, नईम अख्तर, वकील अहमद, मसरूर इटावी, डॉ. फीरोज, डॉ. अयाज अली, डॉ. मरगूब आदि मौजूद रहे।
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