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Etawah News: पकी धान-बाजरा फसल पर बारिश का खतरा, किसान चिंतित

Fri, 30 Oct 2026 11:22 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा Updated Fri, 30 Oct 2026 11:22 PM IST
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Threat of rain to ripened paddy and millet crops; farmers concerned
फोटो 22:::बकेवर क्षेत्र में पकी खड़ी धान की फसल। संवाद
इटावा/बकेवर। खेतों में खड़ी पकी धान की फसल पर बारिश का खतरा मंडरा रहा है। आसमान में छाए काले बादल किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं। हल्की बूंदाबांदी हुई है, लेकिन तेज बारिश से फसलों को भारी नुकसान की आशंका है। यह मौसम में बदलाव किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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पिछले दो दिनों से आसमान में बादल छाए हुए हैं। बकेवर और लखना सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई है। शुक्रवार को रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी से फिलहाल कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, तेज बारिश होने पर खेतों में खड़ी खरीफ सीजन की पकी फसलों को नुकसान होगा।
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जिले में लगभग 60 हजार हेक्टेयर में धान और 22 हजार हेक्टेयर में बाजरा की खेती होती है। इनमें से करीब 10 हजार हेक्टेयर धान की फसल ब्लॉक क्षेत्र में कटाई के लिए तैयार खड़ी है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री सेल्सियस कम रहा।
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खरीफ फसलों पर संकट
खेतों में पकी खड़ी धान, बाजरा और तिल की फसलों को बारिश से बड़ा नुकसान हो सकता है। तेज बारिश से फसलें गिर सकती हैं और उनमें नमी आ सकती है। नमी आने से फसलों की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। किसान इन फसलों को कटवाने में लगे हैं, लेकिन मौसम की अनिश्चितता ने उन्हें परेशान कर दिया है। जनता कॉलेज बकेवर के कृषि विशेषज्ञ डॉ ए के पांडेय ने पकी खड़ी धान और बाजरा को सबसे अधिक नुकसान होने की बात कही है।
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रबी की बोआई पर असर
बारिश केवल खरीफ फसलों को ही नहीं, बल्कि रबी सीजन की बोआई को भी प्रभावित कर सकती है। अब तक कुछ हद तक बोई जा चुकी आलू और सरसों जैसी फसलों को भी नुकसान हो सकता है। हालांकि, जो सरसों 10-15 दिन की हो चुकी है, उसे बारिश से नुकसान नहीं होगा। वहीं, गेहूं, चना और मटर जैसी रबी फसलों की बोआई में देरी हो सकती है। बारिश से खेतों में नमी की कमी या अधिकता दोनों ही बुवाई को प्रभावित कर सकती हैं।

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किसानों और विशेषज्ञों की चिंता
किसान सुबोध कुमार ने बताया कि उनकी 55 बीघा में धान की फसल पकी खड़ी है। उन्हें बारिश होने से भारी नुकसान का डर सता रहा है। अखिलेश कुमार, संतोष, दयाशंकर अवस्थी, बबलू अग्निहोत्री और मनोज कुमार जैसे अन्य किसानों ने भी चिंता जताई है। विशेषज्ञ डॉ. एके पांडेय के अनुसार, जमी हुई सरसों को छोड़कर अन्य सभी फसलों के लिए बारिश नुकसानदायक है। उन्होंने किसानों को मौसम के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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