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Etawah News: मानपुरा में पशु आरोग्य मेले में 266 पशुओं का पंजीकरण
Fri, 30 Oct 2026 11:31 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Fri, 30 Oct 2026 11:31 PM IST
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फोटो 07::: पशुपालकों को जानकारी देते डिप्टी सीवीओ डॉ. अशोक कुमार। स्रोत: स्वयं
चकरनगर। मानपुरा गांव में शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु आरोग्य शिविर एवं मेले का आयोजन किया गया। ब्लॉक प्रमुख राकेश यादव ने आरोग्य मेला का उद्घाटन किया।शिविर में पशु चिकित्सकों की टीम ने 266 पशुओं का पंजीकरण कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान पशुपालकों को पशुओं के रखरखाव, बेहतर स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी जानकारी दी गई। साथ ही पशुपालकों को निशुल्क दवाओं का वितरण भी किया गया।
शासन के निर्देश पर प्रत्येक ब्लॉक में तीन पशु आरोग्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 28 अक्तूबर को पिपरौली गढ़िया गांव में शिविर लगाया गया था। शुक्रवार को मानपुरा में दूसरे शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में डिप्टी सीवीओ डॉ. अशोक कुमार ने पशुपालकों को बताया कि पशुओं को प्रत्येक तीन महीने में पेट के कीड़े मारने की दवा देनी चाहिए।
इसके साथ ही बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए भी नियमित उपचार जरूरी है। पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की समस्या और ब्यांत (बच्चा देने) के बीच बढ़ते अंतराल को कम करने के लिए नियमित रूप से मिनरल मिक्सचर खिलाने की सलाह दी गई। चिकित्सकों ने बताया कि चकरनगर क्षेत्र का बीहड़ इलाका पशुपालन के लिहाज से अनुकूल है।
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यहां पशुओं के चारे के लिए विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां उपलब्ध हैं। पशुपालक वैज्ञानिक तरीके अपनाकर पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बना सकते हैं। इस दौरान पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शशांक कुमार समेत पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौजूद रही।
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शासन के निर्देश पर प्रत्येक ब्लॉक में तीन पशु आरोग्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 28 अक्तूबर को पिपरौली गढ़िया गांव में शिविर लगाया गया था। शुक्रवार को मानपुरा में दूसरे शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में डिप्टी सीवीओ डॉ. अशोक कुमार ने पशुपालकों को बताया कि पशुओं को प्रत्येक तीन महीने में पेट के कीड़े मारने की दवा देनी चाहिए।
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इसके साथ ही बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए भी नियमित उपचार जरूरी है। पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की समस्या और ब्यांत (बच्चा देने) के बीच बढ़ते अंतराल को कम करने के लिए नियमित रूप से मिनरल मिक्सचर खिलाने की सलाह दी गई। चिकित्सकों ने बताया कि चकरनगर क्षेत्र का बीहड़ इलाका पशुपालन के लिहाज से अनुकूल है।
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यहां पशुओं के चारे के लिए विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां उपलब्ध हैं। पशुपालक वैज्ञानिक तरीके अपनाकर पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बना सकते हैं। इस दौरान पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शशांक कुमार समेत पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौजूद रही।