{"_id":"6176f0bc52f1b8678a0fa613","slug":"the-road-is-not-left-now-it-is-a-compulsion-to-get-out-of-the-pits-etawah-news-knp660360179","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क तो बची नहीं अब गड्ढों से निकलना मजबूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क तो बची नहीं अब गड्ढों से निकलना मजबूरी
विज्ञापन
बकेवर। बकेवर क्षेत्र की कई ऊबड़-खाबड़ और क्षतिग्रस्त सड़कों को मरम्मत का इंतजार है। इन सड़कों से आवागमन के दौरान लोग गिरकर चुटहिल हो जाते हैं।
बकेवर क्षेत्र के हाईवे से कुड़रिया गांव तक जाने वाला संपर्क मार्ग पिछले कई सालों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। हालत यह है कि इस मार्ग से गुजरने में तमाम दुश्वारियां का सामना करना पड़ता है।
साइकिल, बाइक से गुजरने के दौरान ऊबड़-खाबड़ सड़क पर लोग गिरकर चुटहिल हो जाते हैं। सड़क उखड़ी पड़ी है। कई गड्ढे ऐसे हैं जिन पर वाहनों के गुजरने से उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
सिक्सलेन हाईवे से कुड़रिया गांव तक इस संपर्क मार्ग की लंबाई एक किलोमीटर है। पिछले करीब सात साल पूर्व इस सड़क की मरम्मत का कार्य ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने कराया था।
विज्ञापन
ग्रामीण सुमन पांडेय, सुभाष त्रिपाठी एडवोकेट, एमपी पाल, पूते ठाकुर, लालजी, रज्जन त्रिपाठी, सुरेश दोहरे, ज्ञान चंद दोहरे का कहना है कि सड़क के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न रखने के कारण यह मार्ग जल्द क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
कुड़रिया गांव से हिमायुपुरा तक जाने वाली सड़क पिछले कई साल से मरम्मत के इंतजार में है। कुड़रिया गांव के बाद से लेकर हिमायुंपुरा गांव तक डेढ़ किलोमीटर लंबे इस सड़क मार्ग का निर्माण आरईएस विभाग ने वर्ष 2007 में कराया था।
ग्रामीणों का कहना है कि तब से सड़क पर कोई मरम्मत कार्य भी नहीं कराया गया है। सड़क की छोटी गिट्टी पैदल चलने के दौरान भी छिटक कर लगती है। जिसके कारण इस सड़क से जाने वाले हिमायुपुरा व रम्पुरा गांव को जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस मार्ग के अलावा हिमायुपुरा तक जाने का कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।
समाजसेवी ने खुद के खर्चे पर भरवाए गड्ढे
लवेदी। लखना-ईकरी नवादा गांव में घरों का गंदा पानी सड़क पर भरा रहता है। राहगीरों को निकलने में दिक्कत होने पर अपने निजी खर्चे पर ईंटें डलवाई। कहीं राहगीरों को निकलने में राहत मिली।
करवाचौथ को करीब दो दर्जन गांवों के लोग लखना बाजार करने आने के चलते लखना नहर पुल पार से ईकरी नबादा मार्ग पर शुरुआत में ही सड़क पर स्थानीय निवासियों के मकानों का गंदा पानी भरने से जलभराव की स्थिति रहती है।
ग्राम ईकरी के समाजसेवी अवधेश तिवारी ने अपने खर्चे पर ईंटों को डलवाकर राहगीरों को सहूलियत दी।
विज्ञापन
बकेवर क्षेत्र के हाईवे से कुड़रिया गांव तक जाने वाला संपर्क मार्ग पिछले कई सालों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। हालत यह है कि इस मार्ग से गुजरने में तमाम दुश्वारियां का सामना करना पड़ता है।
साइकिल, बाइक से गुजरने के दौरान ऊबड़-खाबड़ सड़क पर लोग गिरकर चुटहिल हो जाते हैं। सड़क उखड़ी पड़ी है। कई गड्ढे ऐसे हैं जिन पर वाहनों के गुजरने से उनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
विज्ञापन
सिक्सलेन हाईवे से कुड़रिया गांव तक इस संपर्क मार्ग की लंबाई एक किलोमीटर है। पिछले करीब सात साल पूर्व इस सड़क की मरम्मत का कार्य ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने कराया था।
विज्ञापन
ग्रामीण सुमन पांडेय, सुभाष त्रिपाठी एडवोकेट, एमपी पाल, पूते ठाकुर, लालजी, रज्जन त्रिपाठी, सुरेश दोहरे, ज्ञान चंद दोहरे का कहना है कि सड़क के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न रखने के कारण यह मार्ग जल्द क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
कुड़रिया गांव से हिमायुपुरा तक जाने वाली सड़क पिछले कई साल से मरम्मत के इंतजार में है। कुड़रिया गांव के बाद से लेकर हिमायुंपुरा गांव तक डेढ़ किलोमीटर लंबे इस सड़क मार्ग का निर्माण आरईएस विभाग ने वर्ष 2007 में कराया था।
ग्रामीणों का कहना है कि तब से सड़क पर कोई मरम्मत कार्य भी नहीं कराया गया है। सड़क की छोटी गिट्टी पैदल चलने के दौरान भी छिटक कर लगती है। जिसके कारण इस सड़क से जाने वाले हिमायुपुरा व रम्पुरा गांव को जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस मार्ग के अलावा हिमायुपुरा तक जाने का कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है।
समाजसेवी ने खुद के खर्चे पर भरवाए गड्ढे
लवेदी। लखना-ईकरी नवादा गांव में घरों का गंदा पानी सड़क पर भरा रहता है। राहगीरों को निकलने में दिक्कत होने पर अपने निजी खर्चे पर ईंटें डलवाई। कहीं राहगीरों को निकलने में राहत मिली।
करवाचौथ को करीब दो दर्जन गांवों के लोग लखना बाजार करने आने के चलते लखना नहर पुल पार से ईकरी नबादा मार्ग पर शुरुआत में ही सड़क पर स्थानीय निवासियों के मकानों का गंदा पानी भरने से जलभराव की स्थिति रहती है।
ग्राम ईकरी के समाजसेवी अवधेश तिवारी ने अपने खर्चे पर ईंटों को डलवाकर राहगीरों को सहूलियत दी।