{"_id":"5824acad4f1c1ba16fb39880","slug":"the-anticipation-of-change-the-scramble-by-evening","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोट बदलवाने की बेकरारी, शाम तक रही मारमारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोट बदलवाने की बेकरारी, शाम तक रही मारमारी
ब्यूरो/अमर उजाला,इटावा
Updated Thu, 10 Nov 2016 10:51 PM IST
विज्ञापन
बैंक में लगी भ्ाीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चलन से बाहर हुए हजार-पांच सौ के नोटों से पिंड छुड़ाने के लिए बृहस्पतिवार को बैंकों में भीड़ नजर आई। बेकरारी इस कदर कि सैकड़ों लोग बैंकों व डाकघरों के खुलने से कई घंटे पहले आकर जम गए। सुबह से शुरू हुई कतार तब तक जारी रही, जब तक बैंकें बंद नहीं हो गए।
कई बैंकों में करेंसी खत्म हो गई, फिर भी भीड़ जुटी रही। पुलिस प्रशासन के कड़े बंदोबस्त रहे। नतीजतन नोटों को बदलने से लेकर जमा-निकासी का काम बगैर किसी व्यवधान के चलता रहा। हालांकि इसके लिए लोगों को कई घंटे बर्बाद करने पड़े।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलान के बाद से जरूरतमंद बेहाल हैं, तो कालाधन जमा करने वालों की नींद उड़ी है। गुरुवार से बैंकों में एक हजार और पांच सौ के नोट बदलने और जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। लोग इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
विज्ञापन
शास्त्री चौराहा स्थित स्टेट बैंक मुख्य शाखा पर तड़के 5 बजे से ही लोगों के आने का क्रम शुरू हो गया था। 7 बजने तक अच्छी खासी भीड़ जमा हो चुकी थी। बैंक अपने निर्धारित समय 10 बजे पर खुली। उससे पहले बैंक के बाहर सड़क पर करीब एक फर्लांग लंबी लाइन लग चुकी थी।
यहां चीफ मैनेजर अरुण गुप्ता ने नोट बदलने के लिए कुल दो अतिरिक्त काउंटरों की व्यवस्था रखी। इसमें एक काउंटर महिलाओं के लिए रहा। मैन गेट पर ही एक्सचेंज स्लिप देने का काउंटर बनाया गया। यहां प्रबंधक प्रतिमा शंकर दीक्षित, विनीत शुक्ला व क्षितिज श्रीवास्तव लोगों को काउंटर आदि की जानकारी देने के जिम्मेदारी संभाले दिखे।
नई बिल्ंिडग के हाल में दो-दो काउंटरों पर जमा व निकासी के इंतजाम रहे। एक लाख से अधिक धनराशि के नोट जमा करने के लिए पुरानी बिल्ंिडग में हैवी डिपाजिट काउंटर की व्यवस्था रही। हरेक काउंटर पर लोगों की कतारों का क्रम टूटता नजर नहीं आया।
यहीं हाल स्टेट बैंक के करीब मौजूद प्रधान डाकघर में दिखा। यहां डाक अधीक्षक आरएन यादव व्यवस्था पर नजर टिकाए दिखे। प्रधान डाकघर एवं 24 उप डाकघरों में करेंसी एक्सचेंज के काउंटर लगाए गए। जबकि करीब पौने दो सौ ब्रांच आफिसों में सिर्फ नोटों के जमा व निकासी की सुविधा रही।
प्रधान डाकघर में एक्सचेंज के लिए तीन अतिरिक्त काउंटरों की व्यवस्था की गई। तीन अन्य काउंटरों पर सीबीएस सिस्टम के तहत जमा-निकासी साथ साथ चली। खासतौर पर आरडी डिपाजिट के तहत महिला अभिकर्ताओं को भी उक्त नोट जमा करने की सहूलियत दी गई।कचहरी रोड पंजाब नेशनल बैंक शाखा में मैनेजर राजेंद्र कुमार की देखरेख में तीन अतिरिक्त काउंटर एक्सचेंज के लिए और एक रकम जमा करने के लिए बनाया गया।
इसके अलावा तीन रुटीन काउंटर चालू रहे। बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, एक्सिस बैंक आदि कई बैंकों में लोगों की काफी भीड़ रही। जमा या निकासी की अपेक्षा नोट बदलने वाले अधिक संख्या में नजर आए। शाम तक कई बैंकों में एक्सचेंज के लिए करेंसी खत्म हो गई। लेकिन शाम 7 बजे तक नोट जमा किए गए।
विज्ञापन
कई बैंकों में करेंसी खत्म हो गई, फिर भी भीड़ जुटी रही। पुलिस प्रशासन के कड़े बंदोबस्त रहे। नतीजतन नोटों को बदलने से लेकर जमा-निकासी का काम बगैर किसी व्यवधान के चलता रहा। हालांकि इसके लिए लोगों को कई घंटे बर्बाद करने पड़े।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलान के बाद से जरूरतमंद बेहाल हैं, तो कालाधन जमा करने वालों की नींद उड़ी है। गुरुवार से बैंकों में एक हजार और पांच सौ के नोट बदलने और जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। लोग इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
विज्ञापन
शास्त्री चौराहा स्थित स्टेट बैंक मुख्य शाखा पर तड़के 5 बजे से ही लोगों के आने का क्रम शुरू हो गया था। 7 बजने तक अच्छी खासी भीड़ जमा हो चुकी थी। बैंक अपने निर्धारित समय 10 बजे पर खुली। उससे पहले बैंक के बाहर सड़क पर करीब एक फर्लांग लंबी लाइन लग चुकी थी।
यहां चीफ मैनेजर अरुण गुप्ता ने नोट बदलने के लिए कुल दो अतिरिक्त काउंटरों की व्यवस्था रखी। इसमें एक काउंटर महिलाओं के लिए रहा। मैन गेट पर ही एक्सचेंज स्लिप देने का काउंटर बनाया गया। यहां प्रबंधक प्रतिमा शंकर दीक्षित, विनीत शुक्ला व क्षितिज श्रीवास्तव लोगों को काउंटर आदि की जानकारी देने के जिम्मेदारी संभाले दिखे।
नई बिल्ंिडग के हाल में दो-दो काउंटरों पर जमा व निकासी के इंतजाम रहे। एक लाख से अधिक धनराशि के नोट जमा करने के लिए पुरानी बिल्ंिडग में हैवी डिपाजिट काउंटर की व्यवस्था रही। हरेक काउंटर पर लोगों की कतारों का क्रम टूटता नजर नहीं आया।
यहीं हाल स्टेट बैंक के करीब मौजूद प्रधान डाकघर में दिखा। यहां डाक अधीक्षक आरएन यादव व्यवस्था पर नजर टिकाए दिखे। प्रधान डाकघर एवं 24 उप डाकघरों में करेंसी एक्सचेंज के काउंटर लगाए गए। जबकि करीब पौने दो सौ ब्रांच आफिसों में सिर्फ नोटों के जमा व निकासी की सुविधा रही।
प्रधान डाकघर में एक्सचेंज के लिए तीन अतिरिक्त काउंटरों की व्यवस्था की गई। तीन अन्य काउंटरों पर सीबीएस सिस्टम के तहत जमा-निकासी साथ साथ चली। खासतौर पर आरडी डिपाजिट के तहत महिला अभिकर्ताओं को भी उक्त नोट जमा करने की सहूलियत दी गई।कचहरी रोड पंजाब नेशनल बैंक शाखा में मैनेजर राजेंद्र कुमार की देखरेख में तीन अतिरिक्त काउंटर एक्सचेंज के लिए और एक रकम जमा करने के लिए बनाया गया।
इसके अलावा तीन रुटीन काउंटर चालू रहे। बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, एक्सिस बैंक आदि कई बैंकों में लोगों की काफी भीड़ रही। जमा या निकासी की अपेक्षा नोट बदलने वाले अधिक संख्या में नजर आए। शाम तक कई बैंकों में एक्सचेंज के लिए करेंसी खत्म हो गई। लेकिन शाम 7 बजे तक नोट जमा किए गए।