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रोक, फिर भी जला रहे पराली
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लवेदी। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने धान की पराली जलाने पर रोक लगा रखी है। डीएम ने भी पराली जलाने वाले किसानों की किसान सम्मान निधि रोकने के आदेश दे रखे हैं, ताकि प्रदूषण फैलने से रोका जा सके। बावजूद इसके किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जिले में अभी भी किसान पराली जला रहे हैं। लखना क्षेत्र में सोमवार को एक किसान ने अपने खेत में पराली जलाई। लखना कस्बा, रीखेडा, भीमनगर, पुठियां, नगला सावतखां, मानपुरा के तमाम किसान खेतों पर धान की पराली रात के समय अपने खेतों पर ही जला रहे हैं।
इससे इलाके में प्रदूषण फैल रहा है। इसके अलावा लखना बेरी खेड़ा मार्ग पर भी किसान अपने खेतों में धान की पराली जला रहे हैं।
पर्यावरण प्रेमी ठाकुर अजय प्रताप सिंह राठौर का कहना है कि शासन जहां पराली जलाने पर रोक लगा रखी, जबकि डीएम ने ऐसे किसानों की सम्मान निधि को रोकने के निर्देश दिए हैं।
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इसके बावजूद भी किसान धान की पराली खेतों में जलाने का काम शाम ढलते ही शुरू कर देते हैं। इससे प्रदूषण फैल रहा है। वहीं, पराली जलाने वालों किसानों में शासन और प्रशासन का भय भी नहीं नजर आ रहा है।
ऐसा नहीं कि खेतों में पराली जला रहे किसानों की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं मिल रही है, लेकिन अभी तक तहसील प्रशासन अथवा क्षेत्रीय लेखपालों द्वारा अभी तक पराली जलाने के मामले में एक भी किसान को नोटिस भी जारी नहीं किया गया है।
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जिले में अभी भी किसान पराली जला रहे हैं। लखना क्षेत्र में सोमवार को एक किसान ने अपने खेत में पराली जलाई। लखना कस्बा, रीखेडा, भीमनगर, पुठियां, नगला सावतखां, मानपुरा के तमाम किसान खेतों पर धान की पराली रात के समय अपने खेतों पर ही जला रहे हैं।
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इससे इलाके में प्रदूषण फैल रहा है। इसके अलावा लखना बेरी खेड़ा मार्ग पर भी किसान अपने खेतों में धान की पराली जला रहे हैं।
पर्यावरण प्रेमी ठाकुर अजय प्रताप सिंह राठौर का कहना है कि शासन जहां पराली जलाने पर रोक लगा रखी, जबकि डीएम ने ऐसे किसानों की सम्मान निधि को रोकने के निर्देश दिए हैं।
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इसके बावजूद भी किसान धान की पराली खेतों में जलाने का काम शाम ढलते ही शुरू कर देते हैं। इससे प्रदूषण फैल रहा है। वहीं, पराली जलाने वालों किसानों में शासन और प्रशासन का भय भी नहीं नजर आ रहा है।
ऐसा नहीं कि खेतों में पराली जला रहे किसानों की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं मिल रही है, लेकिन अभी तक तहसील प्रशासन अथवा क्षेत्रीय लेखपालों द्वारा अभी तक पराली जलाने के मामले में एक भी किसान को नोटिस भी जारी नहीं किया गया है।