फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Spent two and a half million are not getting water

ढाई करोड़ खर्च फिर भी सूख रहे हलक

Tue, 19 May 2015 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Tue, 19 May 2015 11:31 PM IST
विज्ञापन
Spent two and a half million are not getting water

गर्मी पड़ने के साथ ही वाटर लेबल में भी गिरावट आने लगी है। जगह-जगह लगे हैंडपंप पानी छोड़ने लगे हैं। पेयजल की सबसे ज्यादा किल्लत बीहड़ी क्षेत्र चकरनगर में है।

विज्ञापन


यहां पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए शासन ने दस वर्ष पूर्व ढाई करोड़ रुपये खर्च किए थे। इससे पानी की टंकी बनने के साथ ही चकरनगर ग्राम पंचायत के सभी आठ गांव में पाइप लाइन बिछाई गई।
विज्ञापन


बोरिंग फेल होने से पिछले छह वर्षों से ढाई करोड़ के प्रोजेक्ट कर पब्लिक को लाभ नहीं मिल रहा है। सब कुछ होने के बाद भी अफसरों की उदासीनता के कारण यहां के बाशिंदे बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गौरतलब है कि वर्ष 2004-05 में चकरनगर कस्बे में करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से टंकी निर्माण के साथ ही ग्राम पंचायत के सभी गांवों में पाइप लाइन बिछवाई गई थी। टंकी शुरू हुई तो पब्लिक की समस्याएं दूर हो गई। शहर की तर्ज पर गांवों में पानी नलों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंचने लगा।

गर्मी में लोगों को बहुत राहत मिलती थी लेकिन वर्ष 2009 में टंकी के लिए लगाए गए नलकूप की बोरिंग फेल हो गई। इसे ठीक कराने के लिए काफी कोशिशें की गईं लेकिन मामला ग्राम पंचायत और जल निगम के बीच उलझ गया। न तो ग्राम पंचायत रीबोर कराने को तैयार हुई और न ही जल निगम के अफसर।

स्थिति यह है कि छह वर्ष से टंकी सफेद हाथी की तरह खड़ी हुई है। गांवों में बिछाई गई पाइप लाइन भी जर्जर हो चुकी है। कुल मिलाकर रिबोर न होने के कारण ढाई करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट होने के बाद भी क्षेत्र की जनता आज पानी के लिए जूझ रही है। 

चकरनगर में टंकी निर्माण के बाद उसे ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दिया गया था। लगभग पांच वर्षों से बोरिंग फेल होने से टंकी बंद पड़ी है। मेंटीनेंस की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है।

सहायक विकास अधिकारी, सोमेश अवस्थी कहते हैं कि बजट के अभाव में ग्राम पंचायत स्तर पर नलकूप को रीबोर कराने का काम कराया नहीं जा सका। जल निगम ने भी कभी बजट की डिमांड नहीं की। अगर जल निगम की ओर से बजट की डिमांड की जाती है तो पंचायत स्तर पर बजट की व्यवस्था भी कराई जाएगी।

इस संबंध में जल निगम में अधिशासी अभियंता गंगा सिंह कहते हैं पब्लिक की समस्याओं को देखते हुए जल निगम ने हाल ही में शासन को स्टीमेट भेजा है। यह पास होने पर बजट मिलता है तो रीबोर कराकर टंकी से सप्लाई शुरू करा दी जाएगी। साथ ही जर्जर हो चुकी पाइप लाइनों की भी मरम्मत करा दी जाएगी।

रिबोर में यह है विवाद
जल निगम ने टंकी, नलकूप और पाइप लाइन बिछवाने के बाद पूरे प्रोजेक्ट को चकरनगर ग्राम पंचायत के हैंडओवर कर दिया। बोरिंग फेल होने पर जल निगम ने यह कहकर हाथ खडे़ कर दिए कि मेंटीनेंस का काम ग्राम पंचायत का है।

वहीं ग्राम पंचायत ने भी रीबोर का खर्च उठाने से इंकार करते हुए जिम्मेदारी जल निगम पर डाल दी। नतीजा नलकूप रीबोर नहीं हो सका। 

इन गांवों को मिल रहा था लाभ
चकरनगर कस्बे में बनी खड़ी टंकी का लाभ कस्बा चकरनगर के साथ ही ग्राम पंचायत के गांव बंधा, नगला चौप, नगला महानंद, फूटाताल, नीम डांडा, सगरा व अहेरिया को मिल रहा था।

सभी गांवों में पाइप लाइन होने से पानी सीधे गांव में घर-घर तक पहुंच रहा था। आज यहां के ग्रामीण पेयजल के लिए भटक रहे हैँ। वाटर लेबल डाउन होने से गांवों में लगे ज्यादातर हैंडपंप पानी छोड़ गए हैं। कुआं भी सूखे पड़े हुए हैं।

पब्लिक बोली
वर्ष 2003-04 में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी एमके सिंह चौहान के अनुरोध पर मैने पानी की टंकी के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध करवाई थी। मैने यह कभी नहीं सोचा था कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आम जनता को पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा और यह टंकी मात्र सफेद हाथी साबित होगी। -राजा हिम्मत बहादुर सिंह, चकरनगर

पारपट्टी क्षेत्र हमेशा ही उपेक्षा का शिकार रहा है। वर्ष 2010 से लगातार पानी की टंकी ठीक कराए जाने के लिए पब्लिक शिकायत करती आ रही है, लेकिन सुनवाई आज तक नहीं हुई। हर वर्ष गर्मी के मौसम में पेयजल किल्लत से यहां के बाशिंदों को जूझना पड़ता है। -शेखर सिंह चौहान, चकरनगर

कई बार मैने टंकी के नलकूप को रिबोर कराने की मांग की है, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। मौजूदा समय में पूरा क्षेत्र पेयजल किल्लत से जूझ रहा है। टंकी चालू हो जाए तो पब्लिक को राहत मिल जाएगी। -भूरे सिंह चौहान, चकरनगर

गर्मी की शुरुआत होने के साथ ही पेयजल किल्लत गहराने लगी है। कई हैंडपंप भी पानी देने बंद कर गए हैं। टंकी चालू हो जाए तो पब्लिक को राहत मिल जाएगी। अफसर इस ओर ध्यान दें और नलकूप को जल्द से जल्द रीबोर कराएं। -सुरेशचंद्र जैन, चकरनगर

गांवों में पेयजल व्यवस्था सुधारने को पैसा ही नहीं
इटावा। जिले के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है लेकिन विभाग के पास पैसा नहीं है, जिससे वह लंबित योजनाओं का काम शुरू करा सके। कई योजनाओं के तो टेंडर भी निकाले जा चुके हैं लेकिन शासन से अभी तक पैसा नहीं मिला है।

इसी तरह शासन ने कई अन्य योजनाओं को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन धनराशि आवंटित नहीं की जबकि ये योजनाएं गत वित्तीय वर्ष की हैं और अभी तक अटकी पड़ी है। 

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ताखा ब्लाक के लिए गत वित्तीय वर्ष में बछरोई के लिए 195.22 लाख रुपये, हिंदूपुर वैदपुर के लिए 218.05 लाख रुपये, कौआ की 202.53, केंशोंपुर की 177.07, मुर्चा की 196.86, नगला गुजराती की 130.82, सोंथना की 155.49 और सोरों के लिए 166.94 लाख रुपये की योजना तैयार की गई थी।

इन योजनाओं को शासन ने मंजूरी दे दी। धनराशि मिलने की प्रत्याशा में विभाग ने टेंडर भी निकाल दिए लेकिन अभी तक धनराशि नहीं मिली। तभी योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है।

इसी तरह तिरखी त्रिलोकपुर के लिए 129.88 लाख रुपये, भरतिया के लिए 146 लाख रुपये, कदमपुर के लिए 273.37 लाख रुपये की योजनाओं को भी शासन ने मंजूरी तो दे रखी है लेकिन धनराशि मुहैया नहीं कराई है।

ऐसे में ये योजनाएं भी अटकी पड़ी हैं। धनराशि न मिलने से योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग की ओर से योजनाओं के तहत गांव में ओवरहेड टैंक, नलकूप और पाइप लाइन बिछाई जानी है।


ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष की योजनाओं पर काम समय से शुरू हो जाता तो पीने के पानी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाती।

जल निगम अष्टम शाखा में एर्क्सईएन गंगा सिंह कहते हैं कि इस वित्तीय वर्ष में योजनाओं का पैसा मिलने की उम्मीद है। ये योजनाएं गत वित्तीय वर्ष की हैं, जिनके इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजे जा चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed