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‘गौरैया विलुप्त हो रही, इसे बचाना होगा’
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:03 AM IST
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सामाजिक वानिकी प्रभाग एवं सोसाइटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के तत्वावधान में बुधवार को कई विद्यालयों में गौरैया संरक्षण जागरूकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में बच्चों को घरेलू चिड़िया गौरैया के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए उसके संरक्षण को लेकर प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में नेस्ट बाक्स बनाने एवं उसके उपयोग के तरीके बताए गए। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कांधनी में हुए कार्यक्रम में बाल वन कार्यक्रम के सह समन्वयक संजीव सिंह चौहान ने कहा कि गौरैया हमारे आसपास रहने वाली घरेलू चिड़िया है, जिसका जीवन हमारे दैनिक जीवन के क्रियाकलापों से जुड़ा रहा।
लेकिन बढ़ती जनसंख्या एवं आधुनिक रहन सहन से इस घरेलू चिड़िया का जीवन प्रभावित हुआ है। आज यह चिड़िया हमारे बीच से विलुप्त होने के कगार पर है। इसलिए इसके बचाव के लिए सरकार सबके सहयोग से इसे प्राकृतवास उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।
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प्रधानाचार्य संध्या तोमर ने बच्चों से कहा कि वे अपने घरों में गौरैया के लिए घोंसले बनाने का स्थान उपलब्ध करवाने का प्रयास करें। इसके लिए चाहे नेस्ट बाक्स स्थापित करना पडे़ या फिर अन्य कोई ऐसा सामान, जिसमें यह चिड़िया अपना घोंसला बना सके।
वन दरोगा प्रबल प्रताप ने कहा पर्यावरण में चिड़िया एक सूचक की तरह काम करती है। यदि हमारे वातावरण में कोई बदलाव होगा तो इनकी संख्या या इनकी उपस्थिति में बदलाव होने लगता है। शहरों में बढ़ता हुआ प्रदूषण प्राकृतिक आवास स्थलों की कमी एवं इलेक्ट्रानिक उपकरणों का बढ़ना पक्षियों को नुकसान पहुंचाता हैं।
इसलिए पर्यावरण को स्वच्छ एवं शुद्ध रखने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में भूपेंद्र भदौरिया ने नेस्ट बाक्स बनाने एवं उसके उपयोग के तरीके बताए। इस दौरान प्रतिभा तिवारी, प्रेम नारायण सिंह, आशीष गुप्ता, रितू भदौरिया, सरोजनी देवी, मंजुला शर्मा, ब्रजेश मिश्रा, रमा कांत सिंह आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में नेस्ट बाक्स बनाने एवं उसके उपयोग के तरीके बताए गए। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कांधनी में हुए कार्यक्रम में बाल वन कार्यक्रम के सह समन्वयक संजीव सिंह चौहान ने कहा कि गौरैया हमारे आसपास रहने वाली घरेलू चिड़िया है, जिसका जीवन हमारे दैनिक जीवन के क्रियाकलापों से जुड़ा रहा।
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लेकिन बढ़ती जनसंख्या एवं आधुनिक रहन सहन से इस घरेलू चिड़िया का जीवन प्रभावित हुआ है। आज यह चिड़िया हमारे बीच से विलुप्त होने के कगार पर है। इसलिए इसके बचाव के लिए सरकार सबके सहयोग से इसे प्राकृतवास उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।
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प्रधानाचार्य संध्या तोमर ने बच्चों से कहा कि वे अपने घरों में गौरैया के लिए घोंसले बनाने का स्थान उपलब्ध करवाने का प्रयास करें। इसके लिए चाहे नेस्ट बाक्स स्थापित करना पडे़ या फिर अन्य कोई ऐसा सामान, जिसमें यह चिड़िया अपना घोंसला बना सके।
वन दरोगा प्रबल प्रताप ने कहा पर्यावरण में चिड़िया एक सूचक की तरह काम करती है। यदि हमारे वातावरण में कोई बदलाव होगा तो इनकी संख्या या इनकी उपस्थिति में बदलाव होने लगता है। शहरों में बढ़ता हुआ प्रदूषण प्राकृतिक आवास स्थलों की कमी एवं इलेक्ट्रानिक उपकरणों का बढ़ना पक्षियों को नुकसान पहुंचाता हैं।
इसलिए पर्यावरण को स्वच्छ एवं शुद्ध रखने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में भूपेंद्र भदौरिया ने नेस्ट बाक्स बनाने एवं उसके उपयोग के तरीके बताए। इस दौरान प्रतिभा तिवारी, प्रेम नारायण सिंह, आशीष गुप्ता, रितू भदौरिया, सरोजनी देवी, मंजुला शर्मा, ब्रजेश मिश्रा, रमा कांत सिंह आदि मौजूद रहे।