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Etawah News: ईश्वर से जोड़ता है दुख
Thu, 23 Feb 2023 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 23 Feb 2023 12:12 AM IST
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इटावा। जीवन में दो पक्ष होते हैं, पहला सुख और दूसरा दुख। दोनों एक-दूसरे के पूरक बताए गए हैं। दुख ही ईश्वर से जोड़े रखने के लिए श्रद्धा भाव उत्पन्न करता है। यह बात सरस कथा वाचक आचार्य ब्रजकिशोर वशिष्ठ ने श्री सिद्ध गुफा जीव रक्षा गोशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कही।
शंभू नाथ जी महाराज के सानिध्य में चल रही कथा के तीसरे दिन आचार्य ने कहा कि न्याय दर्शन के अनुसार मन की अनुकूलता की अनुभूति ही सुख है। जब कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से जीवन में दुख मांगा तो कृष्ण ने प्रश्न किया कि लोग सुख की अपेक्षा रखते हैं और आप दुख मांग रही हैं। इस पर कुंती ने कहा था कि सुख आने पर भगवान को भूल जाते हैं, जबकि दुख में प्रतिक्षण ईश्वर का ही स्मरण किया जाता है। परमानंद ही परम गति कही गई है।
हरिदास विनोद कुमार द्विवेदी और आचार्य भैया जी ब्रजकिशोर वशिष्ठ ने बताया कि जीवन के अंतिम क्षण में ईश्वर का स्मरण परम गति दिलाता है। परीक्षित के रूप में दया चौहान, नागेंद्र चौहान ने कथा का रसपान किया।
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शंभू नाथ जी महाराज के सानिध्य में चल रही कथा के तीसरे दिन आचार्य ने कहा कि न्याय दर्शन के अनुसार मन की अनुकूलता की अनुभूति ही सुख है। जब कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से जीवन में दुख मांगा तो कृष्ण ने प्रश्न किया कि लोग सुख की अपेक्षा रखते हैं और आप दुख मांग रही हैं। इस पर कुंती ने कहा था कि सुख आने पर भगवान को भूल जाते हैं, जबकि दुख में प्रतिक्षण ईश्वर का ही स्मरण किया जाता है। परमानंद ही परम गति कही गई है।
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हरिदास विनोद कुमार द्विवेदी और आचार्य भैया जी ब्रजकिशोर वशिष्ठ ने बताया कि जीवन के अंतिम क्षण में ईश्वर का स्मरण परम गति दिलाता है। परीक्षित के रूप में दया चौहान, नागेंद्र चौहान ने कथा का रसपान किया।
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