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एक पखवाड़े में हुई छह मौतें, 65 घायल
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Fri, 20 Nov 2015 11:44 PM IST
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इस दौरान सड़क सुरक्षा सप्ताह भी चला। जागरूकता के बाद भी दुर्घटनाएं
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होती रही। बेशक यातायात माह में लोगों को जागरूक किया जाता है, लेकिन इसके
साथ वाहनों की गति पर अंकुश लगाने, नशे की हालत में वाहन चलाने वालों पर
अंकुश लगाने को चेकिंग भी होनी चाहिए। छह से 20 नवंबर तक जिले में करीब 40
सड़क दुर्घटनाएं हुई।
प्रतिदिन के औसत से दो हादसे हुए। इनमें 11 नवंबर को हादसे में मुकेश निवासी लुहन्ना, 16 नवंबर को खुशी निवासी अजीतनगर फ्रेंडस कालोनी, 17 नवंबर को कमलादेवी निवासी ईश्वरीपुरा, 18 नवंबर को सियाराम व महावीर निवासीगण कुम्हावर बसरेहर, 19 नवंबर को अनमोल निवासी मड़ैया ख्यालीराम की मौत हुई।
ये है हादसों के कारण-सड़क हादसे की अधिकांश घटनाएं तेज रफ्तार के कारण हुई है। भारी वाहन ही नहीं दोपहिया वाहन चालक भी तेज गति से वाहनों को दौड़ाते है। ऐसे में यातायात माह के दौरान वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए कोई अभियान भी नहीं चला है।
-शहर के अंदर की सड़कें ऊबड़ खाबड़ होने के साथ पतली होती जा रही है। अतिक्रमण से जहां सड़क की चौड़ाई घटी है, वहीं खस्ताहाल सड़कों के कारण हादसे हो रहे है।
-इस यातायात माह में भी नो इंट्री वाले क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश नहीं रुका है। शहरी क्षेत्र में अक्सर ऐसे वाहनों को देखा जा सकता है। ऐसे में हादसों पर कैसे अंकुश लगे।
यातायात माह में लोगों को नियमों की जानकारी के लिए शिविर लगाए। साथ ही रैली निकाल कर लोगों को जागरूक किया। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया। सड़कों के खराब होने के कारण हादसों की संख्या बढ़ी है]........सुभाष चंद्र यादव, यातायात प्रभारी
ट्रामा सेंटर चालू न हो पाने के पीछे कर्मचारियों की कमी है। डॉक्टर के न होने से ट्रामा सेंटर अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसके साथ ही उपकरणों की भी कमी है। व्यवस्थाओं के लिए लगातार शासन स्तर पर पत्राचार किए जा रहे हैं].......डा. एके पालीवाल, सीएमएस, इटावा
प्रतिदिन के औसत से दो हादसे हुए। इनमें 11 नवंबर को हादसे में मुकेश निवासी लुहन्ना, 16 नवंबर को खुशी निवासी अजीतनगर फ्रेंडस कालोनी, 17 नवंबर को कमलादेवी निवासी ईश्वरीपुरा, 18 नवंबर को सियाराम व महावीर निवासीगण कुम्हावर बसरेहर, 19 नवंबर को अनमोल निवासी मड़ैया ख्यालीराम की मौत हुई।
ये है हादसों के कारण-सड़क हादसे की अधिकांश घटनाएं तेज रफ्तार के कारण हुई है। भारी वाहन ही नहीं दोपहिया वाहन चालक भी तेज गति से वाहनों को दौड़ाते है। ऐसे में यातायात माह के दौरान वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए कोई अभियान भी नहीं चला है।
-शहर के अंदर की सड़कें ऊबड़ खाबड़ होने के साथ पतली होती जा रही है। अतिक्रमण से जहां सड़क की चौड़ाई घटी है, वहीं खस्ताहाल सड़कों के कारण हादसे हो रहे है।
-इस यातायात माह में भी नो इंट्री वाले क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश नहीं रुका है। शहरी क्षेत्र में अक्सर ऐसे वाहनों को देखा जा सकता है। ऐसे में हादसों पर कैसे अंकुश लगे।
यातायात माह में लोगों को नियमों की जानकारी के लिए शिविर लगाए। साथ ही रैली निकाल कर लोगों को जागरूक किया। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया। सड़कों के खराब होने के कारण हादसों की संख्या बढ़ी है]........सुभाष चंद्र यादव, यातायात प्रभारी
ट्रामा सेंटर चालू न हो पाने के पीछे कर्मचारियों की कमी है। डॉक्टर के न होने से ट्रामा सेंटर अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसके साथ ही उपकरणों की भी कमी है। व्यवस्थाओं के लिए लगातार शासन स्तर पर पत्राचार किए जा रहे हैं].......डा. एके पालीवाल, सीएमएस, इटावा