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Etawah News: शब-ए-बरात की रात मजार पर छाया सन्नाटा
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इटावा। बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद बाबा की मजार शब-ए-बरात की रात इस बार अंधेरे में डूबी नजर आई। हर साल रोशनी, इबादत और श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाली यह दरगाह इस बार पूरी तरह सुनसान रही। वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद प्रशासन ने मजार तक जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया। भारी पुलिस बल और वन विभाग कर्मियों की तैनाती के बीच श्रद्धालुओं को मजार तक पहुंचने से रोक दिया गया, जिससे वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा इस बार टूट गई।
इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ी इलाके में स्थित सैयद बाबा की मजार पर भी हर साल रात भर चहल पहल रहती थी। बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तीन जनवरी को हुई जब एक अज्ञात शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय की आईजीआरएस प्रणाली पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सैयद बाबा की मजार वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से बनी हुई है।
प्रशासन ने मजार तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग पर पूरी तरह रोक लगा दी। रास्ते पर बड़ा सा चेतावनी बोर्ड लगाया गया। शब-ए-बरात की रात कोई भी व्यक्ति अंदर न जा सके, इसके लिए रास्ते में बबूल के कांटे बिछा दिए गए। पुलिस और वन विभाग के कर्मचारी पूरी रात मौके पर तैनात रहे। मजार जहां आमतौर पर रोशनी से जगमग रहती थी, वहां इस बार घना अंधेरा छाया रहा।
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शासन के निर्देश के बाद वन विभाग ने तत्काल प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के बाद मजार के देखरेख करने वाले फजले इलाही को नोटिस भेजा गया। इसके साथ ही मजार परिसर में भी नोटिस चस्पा किया गया। नोटिस में मजार से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत न करने की स्थिति में ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई। इस कार्रवाई के बाद विशेष समुदाय में चिंता और बेचैनी है।
मजार के केयरटेकर फजले इलाही ने वन विभाग के नोटिस का जवाब नोटिस के माध्यम से दिया है। यह मामला अब सामाजिक वानिकी विभाग की अदालत में पहुंच गया है। इस मामले की सुनवाई 5 फरवरी को होनी है।
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इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ी इलाके में स्थित सैयद बाबा की मजार पर भी हर साल रात भर चहल पहल रहती थी। बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तीन जनवरी को हुई जब एक अज्ञात शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय की आईजीआरएस प्रणाली पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सैयद बाबा की मजार वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से बनी हुई है।
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प्रशासन ने मजार तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग पर पूरी तरह रोक लगा दी। रास्ते पर बड़ा सा चेतावनी बोर्ड लगाया गया। शब-ए-बरात की रात कोई भी व्यक्ति अंदर न जा सके, इसके लिए रास्ते में बबूल के कांटे बिछा दिए गए। पुलिस और वन विभाग के कर्मचारी पूरी रात मौके पर तैनात रहे। मजार जहां आमतौर पर रोशनी से जगमग रहती थी, वहां इस बार घना अंधेरा छाया रहा।
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शासन के निर्देश के बाद वन विभाग ने तत्काल प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के बाद मजार के देखरेख करने वाले फजले इलाही को नोटिस भेजा गया। इसके साथ ही मजार परिसर में भी नोटिस चस्पा किया गया। नोटिस में मजार से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत न करने की स्थिति में ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई। इस कार्रवाई के बाद विशेष समुदाय में चिंता और बेचैनी है।
मजार के केयरटेकर फजले इलाही ने वन विभाग के नोटिस का जवाब नोटिस के माध्यम से दिया है। यह मामला अब सामाजिक वानिकी विभाग की अदालत में पहुंच गया है। इस मामले की सुनवाई 5 फरवरी को होनी है।