सतगुरु नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरै पार
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इटावा। सर्व धर्म के अग्रदूत श्री गुरुनानक देव का प्रकाशोत्सव श्रद्धापूर्वक व उल्लास के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा श्री गुरुतेग बहादुर साहिब में अरदास गूंजती रही। इस पर्व को मनाये जाने की तैयारियां फर्रुखाबाद फाटक स्थित गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा में पिछले दस दिनों से चल रही थीं। प्रभात फेरी, सबद-कीर्तन का गायन चल रहा था, जिसका समापन मध्य रात्रि को प्रकाशोत्सव के साथ और सबद-कीर्तन व कवि दरबार के साथ हुआ। दीवान समाप्ति पर फूलों की वर्षा के साथ आरती करते हुए गुरु नानक देव जी की जय-जयकार की गई। गुरुवाणी का गायन करने पर इनाम दिए गए और गुरुद्वारा में अखंड पाठ कराने वाले दस परिवारों को गुरुद्वारों के खजांची सरदार तरनजीत सिंह ने सिरोपा देकर सम्मानित किया और फिर आतिशबाजी की गई।
शनिवार सुबह से ही गुरुद्वारे में माथा टेकने वालों का तांता लगा रहा। गुरुद्वारा के मुख्य ग्रन्थी राजेन्दर सिंह व उनके साथियों ने कीर्तन तथा कथावाचकों ने प्रवचन द्वारा संगतों को निहाल किया। गुरु नानक जयंती पर सभी समुदाय के लोगों ने गुरुद्वारा आकर गुरु का लंगर छका। लंगर की सेवा गुरुमुख सिंह अरोरा, चरनजीत सिंह काका,जसवीर सिंह पप्पी,मनदीप सिंह सन्ता,त्रिलोचन सिंह,गुरुमीत सिंह,तरनताल सिंह,दलजीत सिंह आदि ने संगत के साथ मिलकर की। इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी श्री गुरुसिंह तथा गुरुद्वारा गुरमति प्रचार सभा के अध्यक्ष करतार सिंह कालड़ा ने सभी को गुरु पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरुनानक साहिब ने मनुष्य के लिए समानता का रास्ता बताया।
कहा कि हम सभी एक ही पिता की संतान हैं। लिहाजा हम सभी बराबर हैं। मनुष्य को हिन्दू-मुसलमान में बांटना, वर्ण में बांटना ऊंच-नीच समझना बहुत बड़ा अधर्म है। गुरु साहिब ने संगत व पंगत की परंपरा को चलाकर मानवता को एकता व बराबरी का संदेश दिया और गुरुग्रंथ साहिब में अंकित किया। श्रीगुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में 18 नवंबर को नगर कीर्तन निकलेगा। उधर, दूसरी ओर सिंधी कॉलोनी स्थित श्री झूलेलाल जी मंदिर में सुबह से शब्द कीर्तन शुरु हुआ जो दोपहर तक जारी रहा। इस मौके पर मंदिर परिसर में भक्तों को लंगर खिलाया गया। इस दौरान फत्तूराम, जैनू हरि बुलानी, गुरुमुख, पप्पन सिंधी, आनंद भोजवानी, शनि जैनी, पं.राजकुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।