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सम्मान निधि लौटाई, पर खाते नहीं खुले
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इटावा। किसान सम्मान निधि का लाभ ले चुके 1153 लोग बुरे फंस गए हैं। सम्मान निधि का पैसा भी वापस करना पड़ा और बैंक खाता बंद होने से कभी बैंक तो कभी कृषि विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
बैंक ने ऐसे खातों पर स्टाप पेमेंट लगा दिया है। जिससे उनके खातों से सामान्य जमा निकासी भी बंद है। बैंक खाता से लेनदेन शुरू कराने में ऐसे लोगों के सर्दी के मौसम में भी पसीने छूट रहे हैं।
सरकार ने किसानों के खातों में हर साल 6000 रुपये किसान सम्मान निधि के रूप में देने की योजना संचालित की है। किसानों को यह राशि वर्ष में तीन बार दो-दो हजार रुपये के हिसाब से भेजी जाती है।
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किसान सम्मान निधि में कई लोग ऐसे भी आवेदन कर बैठे जो पात्रता मापदंडों में फेल हो गए। जैसे कोई भी सरकारी कर्मचारी जिसे 10 हजार रुपये से ज्यादा वेतन हो, उससे निधि नहीं मिलेगी।
हालांकि, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को इसमें छूट है। इसके अलावा शहर में मकान, लक्जरी गाड़ियां रखने वाले इनकम टैक्स देने वाले किसानों को भी निधि का लाभ नहीं मिलेगा। शुरुआती दौर में किसानों के खातों में निधि का पैसा भेज दिया गया।
आवेदन पत्रों की जांच के दौरान 1153 किसान योजना की शर्तों को पूरा नहीं करने पर अपात्र घोषित हो गए। इनमें से किसी के खाते एक तो किसी के में चार किस्तों का भुगतान हो चुका है।
जांच में जैसे ही मामला पकड़ में आया, इन किसानों के बैंक खातों पर स्टाप पेमेंट लगा दिया गया। किसान जब बैंक खाते से जमा निकासी करने पहुंचे तो उन्हें स्टाप पेमेंट की जानकारी मिली। इससे किसानों में खलबली मच गई।
अब किसान सम्मान निधि वापस कर रहे हैं। इसके बाद भी बैंक उनके खातों को खोल नहीं रहे हैं। किसानों को उपकृषि निदेशक कार्यालय से पत्र लिखवाकर देना होगा। किसान कभी बैंक तो कभी उपनिदेशक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
ऐसे हुए अपात्र
अपात्रों में बहुत से कर्मचारी और पेंशनर भी हैं। उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सकता। योजना में पति पत्नी और पुत्र में से किसी एक को ही योजना का लाभ मिलेगा। इसके विपरीत यदि पति-पत्नी और पुत्र के नाम कृषि भूमि हैं तो तीनों ने ही आवेदन कर दिया।
अब एक साथ तीनों को तो किसान सम्मान निधि नहीं दी जा सकती। सरकार ने यह योजना उन किसानों के लिए बनाई है। आर्थिक रूप से संपन्न किसानों ने भी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर दिया।
जब जांच हुई तो इसकी पोल खुल गई। कुछ ऐसे लोगों ने भी आवेदन कर दिए जो इनकम टैक्स जमा करते हैं और फिर भी किसान पेंशन चाहते हैं।
325 करोड़ का होता है भुगतान
जिले के दो लाख 45 हजार 41 किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है। पूरे साल में छह हजार रुपये की राशि तीन किस्तों में डीबीटी से सीधे खातों में ट्रांसफर की जाती है। एक किस्त में करीब 325 करोड़ रुपये का भुगतान खातों में होता है।
करीब 50 फीसदी किसानों ने सम्मान निधि की राशि वापस कर दी है। कोई दिवंगत हो गया है, ऐसे मामलों में दिक्कत आ रही है। किसानों के सामने अब सबसे बड़ी समस्या खाता आपरेट कराने को लेकर आ रही है।
जो भी किसान उपकृषि निदेशक कार्यालय आता है, उसकी हर संभव मदद की जा रही है। बैंकों से भी इस मामले में बातचीत की जा रही है।
- अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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बैंक ने ऐसे खातों पर स्टाप पेमेंट लगा दिया है। जिससे उनके खातों से सामान्य जमा निकासी भी बंद है। बैंक खाता से लेनदेन शुरू कराने में ऐसे लोगों के सर्दी के मौसम में भी पसीने छूट रहे हैं।
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सरकार ने किसानों के खातों में हर साल 6000 रुपये किसान सम्मान निधि के रूप में देने की योजना संचालित की है। किसानों को यह राशि वर्ष में तीन बार दो-दो हजार रुपये के हिसाब से भेजी जाती है।
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किसान सम्मान निधि में कई लोग ऐसे भी आवेदन कर बैठे जो पात्रता मापदंडों में फेल हो गए। जैसे कोई भी सरकारी कर्मचारी जिसे 10 हजार रुपये से ज्यादा वेतन हो, उससे निधि नहीं मिलेगी।
हालांकि, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को इसमें छूट है। इसके अलावा शहर में मकान, लक्जरी गाड़ियां रखने वाले इनकम टैक्स देने वाले किसानों को भी निधि का लाभ नहीं मिलेगा। शुरुआती दौर में किसानों के खातों में निधि का पैसा भेज दिया गया।
आवेदन पत्रों की जांच के दौरान 1153 किसान योजना की शर्तों को पूरा नहीं करने पर अपात्र घोषित हो गए। इनमें से किसी के खाते एक तो किसी के में चार किस्तों का भुगतान हो चुका है।
जांच में जैसे ही मामला पकड़ में आया, इन किसानों के बैंक खातों पर स्टाप पेमेंट लगा दिया गया। किसान जब बैंक खाते से जमा निकासी करने पहुंचे तो उन्हें स्टाप पेमेंट की जानकारी मिली। इससे किसानों में खलबली मच गई।
अब किसान सम्मान निधि वापस कर रहे हैं। इसके बाद भी बैंक उनके खातों को खोल नहीं रहे हैं। किसानों को उपकृषि निदेशक कार्यालय से पत्र लिखवाकर देना होगा। किसान कभी बैंक तो कभी उपनिदेशक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
ऐसे हुए अपात्र
अपात्रों में बहुत से कर्मचारी और पेंशनर भी हैं। उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सकता। योजना में पति पत्नी और पुत्र में से किसी एक को ही योजना का लाभ मिलेगा। इसके विपरीत यदि पति-पत्नी और पुत्र के नाम कृषि भूमि हैं तो तीनों ने ही आवेदन कर दिया।
अब एक साथ तीनों को तो किसान सम्मान निधि नहीं दी जा सकती। सरकार ने यह योजना उन किसानों के लिए बनाई है। आर्थिक रूप से संपन्न किसानों ने भी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर दिया।
जब जांच हुई तो इसकी पोल खुल गई। कुछ ऐसे लोगों ने भी आवेदन कर दिए जो इनकम टैक्स जमा करते हैं और फिर भी किसान पेंशन चाहते हैं।
325 करोड़ का होता है भुगतान
जिले के दो लाख 45 हजार 41 किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है। पूरे साल में छह हजार रुपये की राशि तीन किस्तों में डीबीटी से सीधे खातों में ट्रांसफर की जाती है। एक किस्त में करीब 325 करोड़ रुपये का भुगतान खातों में होता है।
करीब 50 फीसदी किसानों ने सम्मान निधि की राशि वापस कर दी है। कोई दिवंगत हो गया है, ऐसे मामलों में दिक्कत आ रही है। किसानों के सामने अब सबसे बड़ी समस्या खाता आपरेट कराने को लेकर आ रही है।
जो भी किसान उपकृषि निदेशक कार्यालय आता है, उसकी हर संभव मदद की जा रही है। बैंकों से भी इस मामले में बातचीत की जा रही है।
- अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी