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सैफई आयुर्विज्ञान विवि के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर
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फोटो संख्या 01- हड़ताल पर बैठे सैफई आयुर्विज्ञान विवि के सफाई कर्मचारी
- फोटो : ETAWAH
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के सफाई के ठेके में बदलाव के विरोध में बुधवार को सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। सफाई कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों का ज्ञापन कुलसचिव को सौंपा। इसमें सेवा शर्तों में किसी प्रकार का बदलाव करने पर ऐतराज जताया।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में सफाई कराई रही फर्म की कार्य अवधि बुधवार की सुबह समाप्त हो गई। बुधवार की सुबह सात बजे से राजपूत सिक्योरिटी सर्विसेज एजेंसी अहमदाबाद ने सफाई का काम टेकओवर कर लिया।
इसकी जानकारी सफाई कर्मचारियों को मिली तो एकत्रित होकर काम बंद कर हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों का कहना है नई कंपनी उन्हें आश्वासन दे कि किसी भी कर्मचारी को निकालेगी नहीं और जिस तरह से सभी कर्मचारी अपने निर्धारित वेतन और समय सारणी के हिसाब से ड्यूटी करते आ रहे हैं, उसी हिसाब से ड्यूटी कराई जाए।
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इसमें कोई बदलाव न किया जाए। बताया कि हम लोगों ने कोरोना कॉल में बड़े ही जोखिम से काम किया था। उस समय 500 रुपये अतिरिक्त भत्ता देने की बात कही गई थी, वह आज तक नहीं दिया गया। इससे पूर्व विश्वविद्यालय में कार्यरत फर्म साबरी चौधरी फर्म ने कर्मचारियों का पीएफ घोटाला कर लिया था।
अब यह नई कंपनी आई है। बताया जाता है इस कंपनी ने बहुत ही कम रेट पर ठेका लिया है। इस कारण कर्मचारियों को छंटनी की चिंता सता रही है।
हड़ताल के चलते विश्वविद्यालय की सफाई व्यवस्था चौपट हो गई।
इमरजेंसी ट्रामा सेंटर से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक गंदगी के अंबार लग गए। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने प्रशासनिक भवन में आनन-फानन में बैठक की। सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण करने का निर्णय लिया है। कुलपति डॉक्टर प्रभात कुमार सिंह के आश्वासन पर हड़ताल समाप्त कर दी।
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उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में सफाई कराई रही फर्म की कार्य अवधि बुधवार की सुबह समाप्त हो गई। बुधवार की सुबह सात बजे से राजपूत सिक्योरिटी सर्विसेज एजेंसी अहमदाबाद ने सफाई का काम टेकओवर कर लिया।
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इसकी जानकारी सफाई कर्मचारियों को मिली तो एकत्रित होकर काम बंद कर हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों का कहना है नई कंपनी उन्हें आश्वासन दे कि किसी भी कर्मचारी को निकालेगी नहीं और जिस तरह से सभी कर्मचारी अपने निर्धारित वेतन और समय सारणी के हिसाब से ड्यूटी करते आ रहे हैं, उसी हिसाब से ड्यूटी कराई जाए।
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इसमें कोई बदलाव न किया जाए। बताया कि हम लोगों ने कोरोना कॉल में बड़े ही जोखिम से काम किया था। उस समय 500 रुपये अतिरिक्त भत्ता देने की बात कही गई थी, वह आज तक नहीं दिया गया। इससे पूर्व विश्वविद्यालय में कार्यरत फर्म साबरी चौधरी फर्म ने कर्मचारियों का पीएफ घोटाला कर लिया था।
अब यह नई कंपनी आई है। बताया जाता है इस कंपनी ने बहुत ही कम रेट पर ठेका लिया है। इस कारण कर्मचारियों को छंटनी की चिंता सता रही है।
हड़ताल के चलते विश्वविद्यालय की सफाई व्यवस्था चौपट हो गई।
इमरजेंसी ट्रामा सेंटर से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक गंदगी के अंबार लग गए। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने प्रशासनिक भवन में आनन-फानन में बैठक की। सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण करने का निर्णय लिया है। कुलपति डॉक्टर प्रभात कुमार सिंह के आश्वासन पर हड़ताल समाप्त कर दी।