{"_id":"635d70400464952aee297b1b","slug":"rules-are-difficult-for-loan-no-benifit-etawah-news-knp725566252","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्ज के लिए नियम अपार... कैसे शुरू हो व्यापार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्ज के लिए नियम अपार... कैसे शुरू हो व्यापार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। बैंकें व्यापार के लिए कर्ज देने में आनाकानी कर रही हैं। लोन की फाइल पहुंचने के बाद आवेदक नियमों में ही उलझा रहता है। कई आवेदक ऐसे हैं, जिनकी फाइल लौटा दी गई या फिर दो साल बाद भी उन्हें ऋण नहीं मिल पाया है। ऐसे मामले उद्योग बंधु की बैठक में भी उठ चुके हैं लेकिन बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा। इस वित्त वर्ष में 434 आवेदनों में 331 निरस्त कर दिए गए। 79 को ही ऋण मिल सका है।
व्यापार या उद्योग शुरू करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के जरिये तीन योजनाओं के तहत ऋण दिया जाता है। इनमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 50 लाख रुपये तक, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 25 लाख व एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) में दो करोड़ रुपये का ऋण मिलता है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत बैंकों के पास 120 आवेदन चालू वित्त वर्ष में अभी तक भेजे जा चुके हैं। इनमें नियमों के पेच फंसाकर बैंकों ने 80 आवेदन खारिज कर दिए और 40 को लोन के लिए योग्य मांगा। इनमें भी सिर्फ 23 को ही ऋण दिया गया। 17 आवेदक फाइलें लेकर बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 124 आवेदनों में 103 कोई न कोई कारण बताकर कैंसल कर दिए गए। 21 स्वीकृत हुए लेकिन 14 को ही ऋण मिल सका। अन्य ऋण मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
ओडीओपी योजना के तहत 190 ऑनलाइन आवेदन आए। जांच में 148 आवेदनों में कमियां बता दी गईं। 42 को ऋण के लिए योग्य माना। इनमें से नौ लोग अभी भी पैसा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
अजीत नगर निवासी अमित वर्मा का स्टेशन रोड पर किशोर फर्नीचर नाम से स्टोर है। टेक्सटाइल उद्योग शुरू करने के लिए अमित ने दो साल पहले ओडीओपी के तहत पंजाब नेशनल बैंक से 65 लाख रुपये का ऋण मांगा था। गारंटी के तौर पर उन्होंने अपनी दुकान के कागजात लगाए थे। तहसील में कागजात सही मिले लेकिन बैंक ने चौहद्दी के नाम पर पेंच फंसा दिया। उन्होंने बताया कि आज तक लोन की फाइल बैंक में फंसी पड़ी है।
शांति कालोनी निवासी राजबहादुर सिंह ने दोना-पत्तल का व्यापार शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत जिला उद्योग केंद्र में ऑनलाइन आवेदन किया। इसे पूर्वांचल बैंक भेज दिया गया। सारे दस्तावेज जांच में ठीक निकले। प्रोजेक्ट भी पास हो गया, लेकिन जब बात लोन देने की आई तो बैंक ने क्रेडिट कार्ड पर 18 हजार रुपये बकाया होने की बात कहकर कर्ज देने से मना कर दिया।
60 रेटिंग अंक पर बैंक पहुंचता है आवेदन
व्यापार या उद्योग के लिए बैंक से कर्ज लेने के लिए कई दुश्वारियां आवेदक के सामने होती हैं। ऑनलाइन आवेदन के समय 16 बिंदुओं पर जानकारी मांगी जाती है। हर बिंदु के रेटिंग अंक निर्धारित होते हैं। जैसे ही बिंदुवार जानकारी भरी जाती हैं वैसे-वैसे रेटिंग अंक भी जुड़ते जाते हैं। सभी 16 बिंदुओं पर जानकारी भरने के बाद यदि रेटिंग अंक 60 से कम होते हैं तो जिला उद्योग केंद्र उस आवेदन को खारिज कर देता है। इससे अधिक अंक वाले आवेदन बैंक के पास जाते हैं। इसके बाद बैंक की ओर से कई और नियम समझा दिए जाते हैं। आवेदक उन्हीं में उलझा रह जाता है।
एलडीएम नहीं, बैठक में औपचारिकता
सरकार एक ओर उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है तो दूसरी ओर यहां एक माह से एलडीएम तक की तैनाती नहीं है। जिले की लीड बैंक सेंट्रल बैंक है। इसके क्षेत्रीय ब्रांच के प्रबंधक एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एलडीएम की जिम्मेदारी आरसीटी इंचार्ज को दी गई है जो ट्रेनिंग पर गए हैं। एक माह से उद्योग बंधु की बैठक में व्यापारियों और उद्यमियों की समस्या सुनने के लिए बैंक की ओर से कोई पहुंच ही नहीं रहा है।
- बैंकों के पैमाने पर खरा उतरने पर ऋण दिया जाता है। आवेदन में कमी होने पर ही उसे खारिज किया जाता है। कई आवेदकों का सिविल स्कोर ही इतना कम होता है कि ऋण देना मुश्किल होता है। अगर दो साल से कोई आवेदन लंबित है तो ये जरूर बैंक की कमी होगी। वह इस मामले को संबंधित बैंक के क्षेत्रीय अधिकारी तक पहुंचाएंगी। - श्रेया जैन, एलडीएम पटल प्रभारी, सेंट्रल बैंक।
- ऑनलाइन आवेदन आने के बाद उसे बैंक के पास भेजा जाता है। बैंक बड़ी संख्या में कोई न कोई कारण बताकर आवेदन खारिज कर देते हैं। कई आवेदन ऋण योग्य होते हैं लेकिन फिर भी पेच फंसा दिया जाता है। ऐसे मामलों को ही उद्योग बंधु की बैठक में रखा जाता है लेकिन एक माह से एलडीएम के न होने से समस्या हो रही है। - सुधीर कुमार, उपायुक्त उद्योग।
विज्ञापन
व्यापार या उद्योग शुरू करने के लिए जिला उद्योग केंद्र के जरिये तीन योजनाओं के तहत ऋण दिया जाता है। इनमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 50 लाख रुपये तक, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 25 लाख व एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) में दो करोड़ रुपये का ऋण मिलता है।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत बैंकों के पास 120 आवेदन चालू वित्त वर्ष में अभी तक भेजे जा चुके हैं। इनमें नियमों के पेच फंसाकर बैंकों ने 80 आवेदन खारिज कर दिए और 40 को लोन के लिए योग्य मांगा। इनमें भी सिर्फ 23 को ही ऋण दिया गया। 17 आवेदक फाइलें लेकर बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 124 आवेदनों में 103 कोई न कोई कारण बताकर कैंसल कर दिए गए। 21 स्वीकृत हुए लेकिन 14 को ही ऋण मिल सका। अन्य ऋण मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
ओडीओपी योजना के तहत 190 ऑनलाइन आवेदन आए। जांच में 148 आवेदनों में कमियां बता दी गईं। 42 को ऋण के लिए योग्य माना। इनमें से नौ लोग अभी भी पैसा मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
अजीत नगर निवासी अमित वर्मा का स्टेशन रोड पर किशोर फर्नीचर नाम से स्टोर है। टेक्सटाइल उद्योग शुरू करने के लिए अमित ने दो साल पहले ओडीओपी के तहत पंजाब नेशनल बैंक से 65 लाख रुपये का ऋण मांगा था। गारंटी के तौर पर उन्होंने अपनी दुकान के कागजात लगाए थे। तहसील में कागजात सही मिले लेकिन बैंक ने चौहद्दी के नाम पर पेंच फंसा दिया। उन्होंने बताया कि आज तक लोन की फाइल बैंक में फंसी पड़ी है।
शांति कालोनी निवासी राजबहादुर सिंह ने दोना-पत्तल का व्यापार शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत जिला उद्योग केंद्र में ऑनलाइन आवेदन किया। इसे पूर्वांचल बैंक भेज दिया गया। सारे दस्तावेज जांच में ठीक निकले। प्रोजेक्ट भी पास हो गया, लेकिन जब बात लोन देने की आई तो बैंक ने क्रेडिट कार्ड पर 18 हजार रुपये बकाया होने की बात कहकर कर्ज देने से मना कर दिया।
60 रेटिंग अंक पर बैंक पहुंचता है आवेदन
व्यापार या उद्योग के लिए बैंक से कर्ज लेने के लिए कई दुश्वारियां आवेदक के सामने होती हैं। ऑनलाइन आवेदन के समय 16 बिंदुओं पर जानकारी मांगी जाती है। हर बिंदु के रेटिंग अंक निर्धारित होते हैं। जैसे ही बिंदुवार जानकारी भरी जाती हैं वैसे-वैसे रेटिंग अंक भी जुड़ते जाते हैं। सभी 16 बिंदुओं पर जानकारी भरने के बाद यदि रेटिंग अंक 60 से कम होते हैं तो जिला उद्योग केंद्र उस आवेदन को खारिज कर देता है। इससे अधिक अंक वाले आवेदन बैंक के पास जाते हैं। इसके बाद बैंक की ओर से कई और नियम समझा दिए जाते हैं। आवेदक उन्हीं में उलझा रह जाता है।
एलडीएम नहीं, बैठक में औपचारिकता
सरकार एक ओर उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है तो दूसरी ओर यहां एक माह से एलडीएम तक की तैनाती नहीं है। जिले की लीड बैंक सेंट्रल बैंक है। इसके क्षेत्रीय ब्रांच के प्रबंधक एक माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एलडीएम की जिम्मेदारी आरसीटी इंचार्ज को दी गई है जो ट्रेनिंग पर गए हैं। एक माह से उद्योग बंधु की बैठक में व्यापारियों और उद्यमियों की समस्या सुनने के लिए बैंक की ओर से कोई पहुंच ही नहीं रहा है।
- बैंकों के पैमाने पर खरा उतरने पर ऋण दिया जाता है। आवेदन में कमी होने पर ही उसे खारिज किया जाता है। कई आवेदकों का सिविल स्कोर ही इतना कम होता है कि ऋण देना मुश्किल होता है। अगर दो साल से कोई आवेदन लंबित है तो ये जरूर बैंक की कमी होगी। वह इस मामले को संबंधित बैंक के क्षेत्रीय अधिकारी तक पहुंचाएंगी। - श्रेया जैन, एलडीएम पटल प्रभारी, सेंट्रल बैंक।
- ऑनलाइन आवेदन आने के बाद उसे बैंक के पास भेजा जाता है। बैंक बड़ी संख्या में कोई न कोई कारण बताकर आवेदन खारिज कर देते हैं। कई आवेदन ऋण योग्य होते हैं लेकिन फिर भी पेच फंसा दिया जाता है। ऐसे मामलों को ही उद्योग बंधु की बैठक में रखा जाता है लेकिन एक माह से एलडीएम के न होने से समस्या हो रही है। - सुधीर कुमार, उपायुक्त उद्योग।