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इटावा : चंबल का पानी दो गांवों के रास्तों पर भरा
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चकरनगर के चकरपुरा गांव में खेतों में पहुंचा चंबल का पानी। संवाद
- फोटो : ETAWAH
चकरनगर। चंबल नदी का पानी दो गांवों के रास्तों पर भर गया है। जलस्तर में और बढ़ोतरी हुई तो हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं। ग्रामीण भयभीत हैं। तहसील की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
चंबल नदी गुरुवार रात तक खतरे के निशान से 120.80 मीटर से 122.14 मीटर तक पहुंच गई थी। शुक्रवार को पानी घटना शुरू हुआ और यह शाम पांच बजे तक 120.99 मीटर पर पहुंच गया, लेकिन इसके बाद इसमें फिर बढ़ोतरी होने लगी। चंबल के बाद यमुना नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। दोनों नदियों के बीच बसे गांवों के लोगों की बेचैनी बढ़ी हुई है।
ग्रामीण बाढ़ के खतरे से सहमे हुए हैं। गत वर्ष बाढ़ त्रासदी से 50 से अधिक गांवों के लोग अभी भी नहीं उबर पाए हैं। जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से सरकारी कर्मचारियों ने नदी के किनारे वाले गांवों में डेरा डाल रखा है। वहीं, चंबल का पानी भरेह संगम शिवालय के पास से गुजरे चकरपुरा और कांयछी गांवों के रास्तों पर भर गया है। मंदिर की सीढ़ियों को पानी छू रहा है। अगर जलस्तर और बढ़ता है तो भरेह गांव में जल प्लावन हो जाएगा। नदियों के किनारे बसी दो लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित होगी।
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उपजिलाधिकारी चकरनगर मलखान सिंह ने बताया कि प्रशासन चारों तरफ मुस्तैद है। क्षेत्र का कोई भी गांव नदी के पानी प्रभावित नहीं है। नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है। नदी किनारे बाशिंदों को सचेत रहने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल प्रशासनिक मदद लें। बाढ़ चौकियों से निरंतर रिपोर्टिंग की जा रही है। क्षेत्र में सचल दस्ता भ्रमण कर रहा है।
ढकरा पुलिया भी लगी दरकने
चकरनगर। चंबल नदी के बढ़ते जलस्तर से ढकरा पुलिया दरकने लगी है। पुलिया क्षतिग्रस्त होने से 50 गांवों का संपर्क तहसील और जिला मुख्यालय से टूट जाएगा। शुक्रवार को पुलिया से लगी आसपास की मिट्टी धंसकने लगी है। शासन-प्रशासन के किसी प्रकार का कोई ध्यान न देने के चलते क्षेत्रीय लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ता है। लोक निर्माण विभाग सहायक अभियंता गगन पाल ने बताया कि पुलिया की मिट्टी पानी बढ़ने से खिसक गई है। आवागमन में किसी प्रकार की समस्या नहीं है।
यमुना नदी किनारे के 25 गांवों के लोग परेशान
गौहानी, खिरीटी, कछपुरा, नद गंवा, चिंडोली, डिभौली, हरौलीघार, दिलीपनगर, कांयछी, निवी, नौगांवा, पुरा वली, इकनौर, विल्हाटी, नीवरी कचहरी, लखनपुरा घार करावली आदि गांव हैं। जलस्तर बढ़ने से लोग परेशान हैं।
चंबल नदी के किनारे बसे 16 गांवों पर मंडरा रहा खतरा
बंसरी, अचरौली, सलोखरा, कतरौली, पथर्रा, बिहार, इमिलिया, चकरपुरा, महुआ सूडा, जगतौली, बरेछा, मिटहटी, कुंदौल, पालीघार, सहसो और भोआ गांव में चंबल नदी उफनाने से ज्यादा परेशानी होगी। ऐसे में यहां के लोग डरे हुए हैं।
क्वारी नदी से लगे इन 10 गांवों के लोग भयभीत
क्वारी नदी के किनारे ललूपुरा,चौरेला, सिंडौस, विंडवा खुर्द, चमराहीतीर, रीतौर, कुवंर पुरा कुर्छा, बिडौरी, बिठौली पसिया गांव पड़ते हैं। बाढ़ से यहां के लोग भी भयभीत हैं।
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चंबल नदी गुरुवार रात तक खतरे के निशान से 120.80 मीटर से 122.14 मीटर तक पहुंच गई थी। शुक्रवार को पानी घटना शुरू हुआ और यह शाम पांच बजे तक 120.99 मीटर पर पहुंच गया, लेकिन इसके बाद इसमें फिर बढ़ोतरी होने लगी। चंबल के बाद यमुना नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। दोनों नदियों के बीच बसे गांवों के लोगों की बेचैनी बढ़ी हुई है।
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ग्रामीण बाढ़ के खतरे से सहमे हुए हैं। गत वर्ष बाढ़ त्रासदी से 50 से अधिक गांवों के लोग अभी भी नहीं उबर पाए हैं। जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से सरकारी कर्मचारियों ने नदी के किनारे वाले गांवों में डेरा डाल रखा है। वहीं, चंबल का पानी भरेह संगम शिवालय के पास से गुजरे चकरपुरा और कांयछी गांवों के रास्तों पर भर गया है। मंदिर की सीढ़ियों को पानी छू रहा है। अगर जलस्तर और बढ़ता है तो भरेह गांव में जल प्लावन हो जाएगा। नदियों के किनारे बसी दो लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित होगी।
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उपजिलाधिकारी चकरनगर मलखान सिंह ने बताया कि प्रशासन चारों तरफ मुस्तैद है। क्षेत्र का कोई भी गांव नदी के पानी प्रभावित नहीं है। नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है। नदी किनारे बाशिंदों को सचेत रहने की आवश्यकता है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल प्रशासनिक मदद लें। बाढ़ चौकियों से निरंतर रिपोर्टिंग की जा रही है। क्षेत्र में सचल दस्ता भ्रमण कर रहा है।
ढकरा पुलिया भी लगी दरकने
चकरनगर। चंबल नदी के बढ़ते जलस्तर से ढकरा पुलिया दरकने लगी है। पुलिया क्षतिग्रस्त होने से 50 गांवों का संपर्क तहसील और जिला मुख्यालय से टूट जाएगा। शुक्रवार को पुलिया से लगी आसपास की मिट्टी धंसकने लगी है। शासन-प्रशासन के किसी प्रकार का कोई ध्यान न देने के चलते क्षेत्रीय लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ता है। लोक निर्माण विभाग सहायक अभियंता गगन पाल ने बताया कि पुलिया की मिट्टी पानी बढ़ने से खिसक गई है। आवागमन में किसी प्रकार की समस्या नहीं है।
यमुना नदी किनारे के 25 गांवों के लोग परेशान
गौहानी, खिरीटी, कछपुरा, नद गंवा, चिंडोली, डिभौली, हरौलीघार, दिलीपनगर, कांयछी, निवी, नौगांवा, पुरा वली, इकनौर, विल्हाटी, नीवरी कचहरी, लखनपुरा घार करावली आदि गांव हैं। जलस्तर बढ़ने से लोग परेशान हैं।
चंबल नदी के किनारे बसे 16 गांवों पर मंडरा रहा खतरा
बंसरी, अचरौली, सलोखरा, कतरौली, पथर्रा, बिहार, इमिलिया, चकरपुरा, महुआ सूडा, जगतौली, बरेछा, मिटहटी, कुंदौल, पालीघार, सहसो और भोआ गांव में चंबल नदी उफनाने से ज्यादा परेशानी होगी। ऐसे में यहां के लोग डरे हुए हैं।
क्वारी नदी से लगे इन 10 गांवों के लोग भयभीत
क्वारी नदी के किनारे ललूपुरा,चौरेला, सिंडौस, विंडवा खुर्द, चमराहीतीर, रीतौर, कुवंर पुरा कुर्छा, बिडौरी, बिठौली पसिया गांव पड़ते हैं। बाढ़ से यहां के लोग भी भयभीत हैं।