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12 हजार प्रीमियम लेकर मुआवजा दिया सिर्फ 101 रुपये
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इटावा। जिन किसानों की फसल का बीमा करने के लिए कंपनी ने करीब 12 हजार रुपये वसूले, उन्हें मुआवजे के नाम पर सिर्फ 101 रुपये दिए गए। रबी सीजन में जिन 843 किसानों को मुआवजा मिला, उनमें 127 ऐसे हैं जिन्हें 500 रुपये से भी कम का भुगतान किया गया। अब अन्नदाता किसे दर्द बताएं। जिम्मेदार नियमों की बात कह रहे हैं।
रबी सीजन 2021-22 में गेहूं, सरसों और आलू अधिसूचित फसलें थीं। जिले के 13,085 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लिया। यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से 1.83 करोड़ रुपये इन किसानों से प्रीमियम के तौर पर वसूले गए। जबकि राज्य सरकार की ओर से 1.16 करोड़ और केंद्र सरकार की ओर भी इतनी ही धनराशि बीमा कंपनी को अंश के तौर पर दी गई। जनवरी में जिले में ओलावृष्टि हुई, इसमें बड़ी संख्या में किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। किसानों ने मुआवजे के लिए बीमा कंपनी का दरवाजा खटखटाया। जिन्हें जानकारी नहीं थी उनकी फरियाद जिला प्रशासन की ओर से बीमा कंपनी तक पहुंची।
सर्वे के बाद कंपनी ने बीमित 13,085 किसानों में सिर्फ 843 को ही मुआवजे के योग्य माना। बाकी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। कंपनी की ओर से इन किसानों को करीब 52 लाख रुपये मुआवजा अगस्त माह से बांटना शुरू किया गया। पैसा जब खाते में पहुंचा तो किसान भी चौंक गए। मुआवजा पाने वाले 127 किसान ऐसे सामने आए जिन्हें 500 रुपये से भी कम दिए गए। बकेवर न्याय पंचायत के रतनपुर गांव निवासी विक्रम सिंह की आलू की फसल का बीमा करने के लिए कंपनी ने करीब 12 हजार रुपये प्रीमियम लिया। जबकि मुआवजा सिर्फ 101 रुपये मिला।
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केस-1
बकेवर न्याय पंचायत के गांव रतनपुर निवासी अशोक कुमार तिवारी से कंपनी ने आलू के फसल बीमा के लिए 4544 रुपये प्रीमियम लिया। केंद्र और राज्य सरकारों का अंश मिलाकर कंपनी को करीब 12 हजार रुपये मिले। 18 अगस्त को उनके पंजाब नेशनल बैंक के खाते में मुआवजे की रकम के तौर पर 113 रुपये पहुंचे।
केस-2
रतनपुर गांव की रामपुति ने भी रबी के सीजन में आलू की फसल की थी। उनसे कंपनी ने 4617 रुपये प्रीमियम लिया था। केंद्र और राज्य सरकार का अंश मिला मिला लें तो ये रकम करीब 13 हजार रुपये से ज्यादा होती है। रामपुति के पीएनबी के खाते में 18 अगस्त को मुआवजे के तौर पर सिर्फ 115 रुपये ही पहुंचे।
केस-3
रतनपुर गांव के सतीश बाबू की आलू की फसल का बीमा करने के लिए कंपनी ने 18 हजार रुपये वसूले। इन्हें मुआवजा 152 रुपये मिला। इसी तरह, इसी गांव की रामवती की फसल का बीमा करने के लिए करीब 13 हजार रुपये लिए गए, लेकिन 114 रुपये ही प्राप्त हुए।
केस-4
गेहूं की फसल का बीमा कराने वाले सैफई के उजियानी गांव निवासी सुरेश चंद्र को 112 रुपये, इसी गांव के राम भरोसे को 123 रुपये, हरिओम को 132 रुपये, आशुतोष यादव को 119 रुपये, लरखौर गांव के कायम सिंह को 169 रुपये और जसवंतनगर के श्यामबाबू को 175 रुपये मुआवजे के तौर पर दिए गए।
फसल के नुकसान की जानकारी यदि 72 घंटे के भीतर किसान की ओर से दे दी जाती है तो तुरंत नुकसान का आकलन कराया जाता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो क्रॉप कटिंग के आधार पर मुआवजा तय किया जाता है। जिन किसानों को 101 रुपये या इससे कुछ ज्यादा मुआवजा मिला है तो उनका नुकसान कम हुआ होगा। मुआवजा नियमों के तहत ही तय किया जाता है।
- प्रशांत शर्मा, जिला कोआर्डिनेटर, यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी।
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रबी सीजन 2021-22 में गेहूं, सरसों और आलू अधिसूचित फसलें थीं। जिले के 13,085 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लिया। यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से 1.83 करोड़ रुपये इन किसानों से प्रीमियम के तौर पर वसूले गए। जबकि राज्य सरकार की ओर से 1.16 करोड़ और केंद्र सरकार की ओर भी इतनी ही धनराशि बीमा कंपनी को अंश के तौर पर दी गई। जनवरी में जिले में ओलावृष्टि हुई, इसमें बड़ी संख्या में किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। किसानों ने मुआवजे के लिए बीमा कंपनी का दरवाजा खटखटाया। जिन्हें जानकारी नहीं थी उनकी फरियाद जिला प्रशासन की ओर से बीमा कंपनी तक पहुंची।
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सर्वे के बाद कंपनी ने बीमित 13,085 किसानों में सिर्फ 843 को ही मुआवजे के योग्य माना। बाकी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। कंपनी की ओर से इन किसानों को करीब 52 लाख रुपये मुआवजा अगस्त माह से बांटना शुरू किया गया। पैसा जब खाते में पहुंचा तो किसान भी चौंक गए। मुआवजा पाने वाले 127 किसान ऐसे सामने आए जिन्हें 500 रुपये से भी कम दिए गए। बकेवर न्याय पंचायत के रतनपुर गांव निवासी विक्रम सिंह की आलू की फसल का बीमा करने के लिए कंपनी ने करीब 12 हजार रुपये प्रीमियम लिया। जबकि मुआवजा सिर्फ 101 रुपये मिला।
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केस-1
बकेवर न्याय पंचायत के गांव रतनपुर निवासी अशोक कुमार तिवारी से कंपनी ने आलू के फसल बीमा के लिए 4544 रुपये प्रीमियम लिया। केंद्र और राज्य सरकारों का अंश मिलाकर कंपनी को करीब 12 हजार रुपये मिले। 18 अगस्त को उनके पंजाब नेशनल बैंक के खाते में मुआवजे की रकम के तौर पर 113 रुपये पहुंचे।
केस-2
रतनपुर गांव की रामपुति ने भी रबी के सीजन में आलू की फसल की थी। उनसे कंपनी ने 4617 रुपये प्रीमियम लिया था। केंद्र और राज्य सरकार का अंश मिला मिला लें तो ये रकम करीब 13 हजार रुपये से ज्यादा होती है। रामपुति के पीएनबी के खाते में 18 अगस्त को मुआवजे के तौर पर सिर्फ 115 रुपये ही पहुंचे।
केस-3
रतनपुर गांव के सतीश बाबू की आलू की फसल का बीमा करने के लिए कंपनी ने 18 हजार रुपये वसूले। इन्हें मुआवजा 152 रुपये मिला। इसी तरह, इसी गांव की रामवती की फसल का बीमा करने के लिए करीब 13 हजार रुपये लिए गए, लेकिन 114 रुपये ही प्राप्त हुए।
केस-4
गेहूं की फसल का बीमा कराने वाले सैफई के उजियानी गांव निवासी सुरेश चंद्र को 112 रुपये, इसी गांव के राम भरोसे को 123 रुपये, हरिओम को 132 रुपये, आशुतोष यादव को 119 रुपये, लरखौर गांव के कायम सिंह को 169 रुपये और जसवंतनगर के श्यामबाबू को 175 रुपये मुआवजे के तौर पर दिए गए।
फसल के नुकसान की जानकारी यदि 72 घंटे के भीतर किसान की ओर से दे दी जाती है तो तुरंत नुकसान का आकलन कराया जाता है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो क्रॉप कटिंग के आधार पर मुआवजा तय किया जाता है। जिन किसानों को 101 रुपये या इससे कुछ ज्यादा मुआवजा मिला है तो उनका नुकसान कम हुआ होगा। मुआवजा नियमों के तहत ही तय किया जाता है।
- प्रशांत शर्मा, जिला कोआर्डिनेटर, यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कंपनी।