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यात्रियों का हाईवे तक ही सफर
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बकेवर। रोडवेज बस कंडक्टर किराया कस्बा तक का ले लेते हैं और बसें यात्रियों को हाईवे पर ही उतारकर चली जातीं हैं। रोडवेज बसों के कस्बे तक न आने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस परेशानी के संबंध में लोगों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन परिवहन विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया है। कानपुर, आगरा, इटावा से कानपुर के बीच पड़ने वाले कस्बों के यात्रियों को रोडवेज बस चालकों परिचालकों की मनमानी से सफर में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बसों के चालक-परिचालक बकेवर-महेवा व अन्य कस्बों में न जाकर सवारियों को हाईवे पर उतारकर चले जाते हैं। सवारियां उनसे ओवरब्रिज के नीचे चलकर उतारने को कहती, तो चालक झगड़ने लगते हैं।
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चालक-परिचालक बसों को कस्बों के निर्धारित मार्ग से होकर नहीं ले जाते, जिससे सवारियों को अतिरिक्त खर्च के साथ काफी दूर तक पैदल भी सफर करना पड़ता है।
सफर के दौरान यात्रियों के साथ महिलाएं बुजुर्ग और छोटे बच्चों के अलावा लगेज होने से भी समस्या होती है। सबसे अधिक समस्या रात में होती है। एक तो ओवरब्रिज के पास से रात में ऑटो आदि कोई साधन नहीं मिल पाता, दूसरे रात में आपराधिक वारदात की भी आशंका बनी रहती है।
इस बाबत परिवहन विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई थी। विधायक सावित्री कठेरिया के शिकायत करने पर कुछ समय के लिए बसें निर्धारित मार्ग से गईं, बाद में फिर वही स्थिति बन गई।
शनिवार को बकेवर क्षेत्र के पृथ्वीरामपुर गांव के माया देवी व जयराज सिंह आगरा से एक रोडवेज बस से आए, जिन्हें बस चालक ने बकेवर में हाईवे पर ही उतार दिया।
मायादेवी ने बताया कि उनके पास सामान भी था। उन्होंने चालक से ओवरब्रिज के नीचे ले जाकर उतारने को कहा, लेकिन उन्होंने बस को नीचे ले जाकर उतारने से मना कर दिया।
इसके बाद वह पैदल ही सिर पर सामान रखकर करीब तीन सौ मीटर तक गई, जबकि यही बस कंडक्टर और ड्राइवर ढाबों पर बहुत देर-देर तक बसें खड़ी किए रहते हैं। इस मुसाफिरों को तो परेशानी होती है, लंबी दूरी के मुसाफिरों का भी समय बर्बाद होता है।
बसों के ऐसे सभी चालक-परिचालकों के विरुद्ध एक हजार रुपये का जुर्माना किया जा रहा है। कुछ चालक-परिचालकों की बसों की बदली भी कर दी गई है। अनुबंधित ढाबा दो हैं, इनके अलावा किसी ढाबा पर बस खड़ी होने पर कार्रवाई की जाएगी।
- बीपी अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज, इटावा
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इस परेशानी के संबंध में लोगों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन परिवहन विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया है। कानपुर, आगरा, इटावा से कानपुर के बीच पड़ने वाले कस्बों के यात्रियों को रोडवेज बस चालकों परिचालकों की मनमानी से सफर में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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बसों के चालक-परिचालक बकेवर-महेवा व अन्य कस्बों में न जाकर सवारियों को हाईवे पर उतारकर चले जाते हैं। सवारियां उनसे ओवरब्रिज के नीचे चलकर उतारने को कहती, तो चालक झगड़ने लगते हैं।
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चालक-परिचालक बसों को कस्बों के निर्धारित मार्ग से होकर नहीं ले जाते, जिससे सवारियों को अतिरिक्त खर्च के साथ काफी दूर तक पैदल भी सफर करना पड़ता है।
सफर के दौरान यात्रियों के साथ महिलाएं बुजुर्ग और छोटे बच्चों के अलावा लगेज होने से भी समस्या होती है। सबसे अधिक समस्या रात में होती है। एक तो ओवरब्रिज के पास से रात में ऑटो आदि कोई साधन नहीं मिल पाता, दूसरे रात में आपराधिक वारदात की भी आशंका बनी रहती है।
इस बाबत परिवहन विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई थी। विधायक सावित्री कठेरिया के शिकायत करने पर कुछ समय के लिए बसें निर्धारित मार्ग से गईं, बाद में फिर वही स्थिति बन गई।
शनिवार को बकेवर क्षेत्र के पृथ्वीरामपुर गांव के माया देवी व जयराज सिंह आगरा से एक रोडवेज बस से आए, जिन्हें बस चालक ने बकेवर में हाईवे पर ही उतार दिया।
मायादेवी ने बताया कि उनके पास सामान भी था। उन्होंने चालक से ओवरब्रिज के नीचे ले जाकर उतारने को कहा, लेकिन उन्होंने बस को नीचे ले जाकर उतारने से मना कर दिया।
इसके बाद वह पैदल ही सिर पर सामान रखकर करीब तीन सौ मीटर तक गई, जबकि यही बस कंडक्टर और ड्राइवर ढाबों पर बहुत देर-देर तक बसें खड़ी किए रहते हैं। इस मुसाफिरों को तो परेशानी होती है, लंबी दूरी के मुसाफिरों का भी समय बर्बाद होता है।
बसों के ऐसे सभी चालक-परिचालकों के विरुद्ध एक हजार रुपये का जुर्माना किया जा रहा है। कुछ चालक-परिचालकों की बसों की बदली भी कर दी गई है। अनुबंधित ढाबा दो हैं, इनके अलावा किसी ढाबा पर बस खड़ी होने पर कार्रवाई की जाएगी।
- बीपी अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज, इटावा