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-- किसानों को दूध के बकाये का नहीं हुआ भुगतान, अवशीतन केंद्र बंद
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इटावा। बकेवर स्थित पराग दुग्ध अवशीतन केंद्र चार महीने से बंद पड़ा है। बकाया न मिलने से किसानों ने डेयरी में दूध देना बंद कर दिया। यहां कार्यरत पीसीडीएफ व दुग्ध संघ के कर्मचारियों को 20 माह से पगार भी नहीं मिली है। अनदेखी के चलते केंद्र की इमारत भी जर्जर होती जा रही है।
पराग दुग्ध अवशीतन केंद्र करीब दो दशक पहले बना था। दुग्ध समितियां किसानों से दूध लेकर यहां सप्लाई करती थीं। यहां दूध को ठंडा करके कानपुर स्थित पराग डेयरी भेजा जाता था। फिर दूध का पाउडर तैयार कर बाजार में बेचा जाता था। कर्मचारियों की मानें तो किसानों का लाखों रुपया बकाया हो गया तो समितियों ने केंद्र में दूध की आपूर्ति बंद कर दी। मार्च 2021 में केंद्र में कामकाज पूरी तरह बंद हो गया। कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए।
केंद्र प्रभारी शंभू प्रसाद, विमलेश यादव, फील्ड सुपरवाइजर उमेश शुक्ला, लैब सहायक राधेश्याम गुप्ता, कर्मचारी संगीता देवी को 20 माह से वेतन नहीं दिया गया। 2016 से भविष्य निधि (प्रोविडेंट फंड) का भी पैसा नहीं जमा किया गया। कर्मचारियों ने बताया कि होली, दीपावली, रक्षाबंधन पर पांच से दस हजार रुपये वेतन के नाम पर मिल जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अफसरों से वेतन भुगतान की मांग कई बार की जा चुकी है।
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लैब सहायक राधेश्याम गुप्ता की पत्नी का कोरोना संक्रमण से 26 अप्रैल को निधन हो गया था। फील्ड सुपरवाइजर उमेश शुक्ला की पत्नी व भाई का भी निधन हो गया। वेतन न मिलने से इनका सही ढंग से इलाज तक नहीं हो सका। केंद्र प्रभारी विमलेश यादव ने बताया कि पराग डेयरी के जीएम व डीएम को इस संबंध में शिकायती पत्र दिया जा चुका है।
केंद्र में दुग्ध संघ के 11 कर्मचारी तैनात थे। नौ कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। इन्हें न तो वेतन मिला और न ही किसी भी अन्य देय का भुगतान। कर्मचारियों ने अफसरों से बकाया राशि के भुगतान की गुजारिश की है।
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पराग दुग्ध अवशीतन केंद्र करीब दो दशक पहले बना था। दुग्ध समितियां किसानों से दूध लेकर यहां सप्लाई करती थीं। यहां दूध को ठंडा करके कानपुर स्थित पराग डेयरी भेजा जाता था। फिर दूध का पाउडर तैयार कर बाजार में बेचा जाता था। कर्मचारियों की मानें तो किसानों का लाखों रुपया बकाया हो गया तो समितियों ने केंद्र में दूध की आपूर्ति बंद कर दी। मार्च 2021 में केंद्र में कामकाज पूरी तरह बंद हो गया। कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गए।
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केंद्र प्रभारी शंभू प्रसाद, विमलेश यादव, फील्ड सुपरवाइजर उमेश शुक्ला, लैब सहायक राधेश्याम गुप्ता, कर्मचारी संगीता देवी को 20 माह से वेतन नहीं दिया गया। 2016 से भविष्य निधि (प्रोविडेंट फंड) का भी पैसा नहीं जमा किया गया। कर्मचारियों ने बताया कि होली, दीपावली, रक्षाबंधन पर पांच से दस हजार रुपये वेतन के नाम पर मिल जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अफसरों से वेतन भुगतान की मांग कई बार की जा चुकी है।
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लैब सहायक राधेश्याम गुप्ता की पत्नी का कोरोना संक्रमण से 26 अप्रैल को निधन हो गया था। फील्ड सुपरवाइजर उमेश शुक्ला की पत्नी व भाई का भी निधन हो गया। वेतन न मिलने से इनका सही ढंग से इलाज तक नहीं हो सका। केंद्र प्रभारी विमलेश यादव ने बताया कि पराग डेयरी के जीएम व डीएम को इस संबंध में शिकायती पत्र दिया जा चुका है।
केंद्र में दुग्ध संघ के 11 कर्मचारी तैनात थे। नौ कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। इन्हें न तो वेतन मिला और न ही किसी भी अन्य देय का भुगतान। कर्मचारियों ने अफसरों से बकाया राशि के भुगतान की गुजारिश की है।