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धान खरीद : नए फरमान से सब परेशान
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 05 Nov 2015 11:43 PM IST
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कभी मौसम की मार तो कभी सरकारी फरमान ने धान किसानों को परेशान कर रखा है। सरकार ने धान खरीद के पैटर्न में जो बदलाव किया है, उससे मिल मालिक धान की खरीद में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वहीं केंद्र प्रभारी भी डरे हुए हैं की कहीं मिल मालिकों ने धान नहीं खरीदा तो उनसे ही रिकवरी की जाएगी।
इसी का नतीजा है की 10 दिन बाद भी पहाड़ सरीके लक्ष्य के सापेक्ष धान की खरीद न के बराबर है। रिकवरी के भय के कारण ही अफसर खरीद में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस नए सरकारी फरमान का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इस बार सरकार ने लेवी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
इससे मिल मालिकों के हाथ बंध गए हैं। अब धान की खरीद वह खुद नहीं कर सकते बल्कि क्रय केंद्रों से खरीदे धान का चावल ही सरकार को बेच सकते हैं। जिले में करीब 60 धान मिलें हैं और इनमें से दो दर्जन मिल मालिकों ने नए नियम कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के तहत एग्रीमेंट किया है।
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नए पैटर्न में केंद्र प्रभारियों पर भी नकेल कसी गई है। जिसके तहत मिल मालिक यदि केंद्र पर खरीदे गए धान को लेने से इंकार कर देता है तो उस खरीदे गए धान के भुगतान की रिकवरी प्रभारी से की जाएगी। इसी नियम ने केंद्र प्रभारियों को डरा रखा है और अब तक धान की खरीद सहीं मायने में शुरू नहीं हो पाई है।
इसकी बानगी पक्का तालाब स्थित खाद्य विभाग के धान क्रय केंद्र पर देखी जा सकती है। इस केंद्र को 2 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद करनी है और अभी तक एक दाना भी नहीं खरीदा गया है। इस संबंध में केंद्र के प्रभारी विवेक सायण ने बताया की मिल मालिक धान लेने के इच्छुक नहीं हैं।
ऐसे में वह खरीद करते हैं तो उनसे ही रिकवरी होगी। इस समस्या से डिप्टी आरएमओ आरएन पाल को अवगत करा दिया गया है। इसी तरह भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्रों पर भी अभी धान की कोई खरीद नहीं हुई है। निगम के खरीद मैनेजर पीके गौतम ने बताया की कुछ पेचीदगी बनी हुई है। इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। उसके बाद ही खरीद शुरू होगी।
इस बाबत धान मिल मालिक दीपक कुमार ने बताया की लेवी को लेकर धान मिल एसोसिएशन की कानपुर में 8 नवंबर को बैठक होनी है। इस बैठक में जो भी निर्णय होगा। वैसे ही कदम उठाए जाएंगे।
खाद्य विभाग के डिप्टी आएएमओ आरएन पाल ने बताया की समस्या के समाधान के लिए धान मिल मालिकों की बैठक बुुलाई है। उम्मीद है कि कोई न कोई हल अवश्य निकलेगा।
ये है सीएमआर
कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) नियम के तहत धान मिल मालिकों को क्रय केंद्रों से खरीदा हुआ धान ही कूट कर चावल बनाना है और एक कुंतल धान की एवज में 67 किलो चावल सरकार को वापस करना है। इस नियम से वह मिल मालिक बंधे रहेंगे, जिन्होंने सरकार के साथ एग्रीमेंट किया है। जबकि लेवी के तहत मिल मालिक सस्ते रेटों में खुद धान की खरीद कर लेते थे। उसके चावल का 60 फीसदी हिस्सा सरकार को बेच देते थे। इससे उन्हें फायदा होता था।
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इसी का नतीजा है की 10 दिन बाद भी पहाड़ सरीके लक्ष्य के सापेक्ष धान की खरीद न के बराबर है। रिकवरी के भय के कारण ही अफसर खरीद में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस नए सरकारी फरमान का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इस बार सरकार ने लेवी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
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इससे मिल मालिकों के हाथ बंध गए हैं। अब धान की खरीद वह खुद नहीं कर सकते बल्कि क्रय केंद्रों से खरीदे धान का चावल ही सरकार को बेच सकते हैं। जिले में करीब 60 धान मिलें हैं और इनमें से दो दर्जन मिल मालिकों ने नए नियम कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के तहत एग्रीमेंट किया है।
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नए पैटर्न में केंद्र प्रभारियों पर भी नकेल कसी गई है। जिसके तहत मिल मालिक यदि केंद्र पर खरीदे गए धान को लेने से इंकार कर देता है तो उस खरीदे गए धान के भुगतान की रिकवरी प्रभारी से की जाएगी। इसी नियम ने केंद्र प्रभारियों को डरा रखा है और अब तक धान की खरीद सहीं मायने में शुरू नहीं हो पाई है।
इसकी बानगी पक्का तालाब स्थित खाद्य विभाग के धान क्रय केंद्र पर देखी जा सकती है। इस केंद्र को 2 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद करनी है और अभी तक एक दाना भी नहीं खरीदा गया है। इस संबंध में केंद्र के प्रभारी विवेक सायण ने बताया की मिल मालिक धान लेने के इच्छुक नहीं हैं।
ऐसे में वह खरीद करते हैं तो उनसे ही रिकवरी होगी। इस समस्या से डिप्टी आरएमओ आरएन पाल को अवगत करा दिया गया है। इसी तरह भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्रों पर भी अभी धान की कोई खरीद नहीं हुई है। निगम के खरीद मैनेजर पीके गौतम ने बताया की कुछ पेचीदगी बनी हुई है। इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। उसके बाद ही खरीद शुरू होगी।
इस बाबत धान मिल मालिक दीपक कुमार ने बताया की लेवी को लेकर धान मिल एसोसिएशन की कानपुर में 8 नवंबर को बैठक होनी है। इस बैठक में जो भी निर्णय होगा। वैसे ही कदम उठाए जाएंगे।
खाद्य विभाग के डिप्टी आएएमओ आरएन पाल ने बताया की समस्या के समाधान के लिए धान मिल मालिकों की बैठक बुुलाई है। उम्मीद है कि कोई न कोई हल अवश्य निकलेगा।
ये है सीएमआर
कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) नियम के तहत धान मिल मालिकों को क्रय केंद्रों से खरीदा हुआ धान ही कूट कर चावल बनाना है और एक कुंतल धान की एवज में 67 किलो चावल सरकार को वापस करना है। इस नियम से वह मिल मालिक बंधे रहेंगे, जिन्होंने सरकार के साथ एग्रीमेंट किया है। जबकि लेवी के तहत मिल मालिक सस्ते रेटों में खुद धान की खरीद कर लेते थे। उसके चावल का 60 फीसदी हिस्सा सरकार को बेच देते थे। इससे उन्हें फायदा होता था।