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एक माह में एक हजार क्विंटल हुई सरकारी खरीद
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इटावा। जनपद में सरकारी गेहूं खरीद की रफ्तार इतनी कम है कि एक माह बीतने के बावजूद अभी तक 58 केंद्रों में से सिर्फ 12 केंद्रों पर 1033 क्विंटल ही खरीद हो सकी है। आढ़तों पर भी किसानों की आमद कम हो गई है।
जनपद में गेहूं के क्रय केंद्रों पर मंडी से कम भाव होने की वजह से ज्यादातर किसान मंडी पर अधिक भाव में गेहूं बेच रहे हैं। बुधवार को नई मंडी में भी आढ़त पर गेहूं की आमद कम देखने को मिली। आढ़त के सामने भी अब न गेहूं के ऊंचे-ऊंचे ढेर नजर आ रहे हैं और न किसानों की भीड़ नजर आ रही है। यही वजह है कि ज्यादातर आढ़त पर कांटा सूने पड़े हैं। पल्लेदारों का काम भी लगभग ठप्प सा पड़ता जा रहा है। सरकारी भाव 2015 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी में बुधवार का भाव 2080 से लेकर अच्छी फसल का भाव 2200 रुपये होने की वजह से सरकारी खरीद प्रभावित हो रही है। आढ़ती सतीश यादव से मंडी में गेहूं की आवक कम होने पर बात करने पर उनका कहना था, गेहूं कटाई कार्य आखिरी दौर में है। लगभग 80 फीसदी गेहूं कट चुका है। इस वजह से जितना गेहूं आना था आ चुका। बताया उत्पादन ही कम हुआ है। छोटे किसान तो आए ही नहीं। उनके सामने संकट है कि गेहूं बेचे या खुद के लिए बचाएं।
चौपालों में किसानों को किया जा रहा प्रेरित
क्रय केंद्रों की ओर गेहूं बेचने वाले किसान पंजीकरण कराने के बावजूद दाम अच्छे मिलने पर मंडियों में गेहूं बेच रहे हैं। कुछ ही किसानों ने ही क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचे हैं। इस वजह से चिंतित कृषि विभाग गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित कर रहा है। जिला कृषि विपणन अधिकारी संतोष कुमार पटेल ने बताया इसी के तहत बुधवार को भरथना तहसील के ग्राम जैतपुर और सैफई तहसील के ग्राम सहसारपुर में चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें गेहूं उत्पादक किसानों को क्रय केंद्रों पर ही गेहूं बेचने के प्रेरित किया।
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जनपद में गेहूं के क्रय केंद्रों पर मंडी से कम भाव होने की वजह से ज्यादातर किसान मंडी पर अधिक भाव में गेहूं बेच रहे हैं। बुधवार को नई मंडी में भी आढ़त पर गेहूं की आमद कम देखने को मिली। आढ़त के सामने भी अब न गेहूं के ऊंचे-ऊंचे ढेर नजर आ रहे हैं और न किसानों की भीड़ नजर आ रही है। यही वजह है कि ज्यादातर आढ़त पर कांटा सूने पड़े हैं। पल्लेदारों का काम भी लगभग ठप्प सा पड़ता जा रहा है। सरकारी भाव 2015 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि मंडी में बुधवार का भाव 2080 से लेकर अच्छी फसल का भाव 2200 रुपये होने की वजह से सरकारी खरीद प्रभावित हो रही है। आढ़ती सतीश यादव से मंडी में गेहूं की आवक कम होने पर बात करने पर उनका कहना था, गेहूं कटाई कार्य आखिरी दौर में है। लगभग 80 फीसदी गेहूं कट चुका है। इस वजह से जितना गेहूं आना था आ चुका। बताया उत्पादन ही कम हुआ है। छोटे किसान तो आए ही नहीं। उनके सामने संकट है कि गेहूं बेचे या खुद के लिए बचाएं।
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चौपालों में किसानों को किया जा रहा प्रेरित
क्रय केंद्रों की ओर गेहूं बेचने वाले किसान पंजीकरण कराने के बावजूद दाम अच्छे मिलने पर मंडियों में गेहूं बेच रहे हैं। कुछ ही किसानों ने ही क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचे हैं। इस वजह से चिंतित कृषि विभाग गांवों में चौपाल लगाकर किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित कर रहा है। जिला कृषि विपणन अधिकारी संतोष कुमार पटेल ने बताया इसी के तहत बुधवार को भरथना तहसील के ग्राम जैतपुर और सैफई तहसील के ग्राम सहसारपुर में चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें गेहूं उत्पादक किसानों को क्रय केंद्रों पर ही गेहूं बेचने के प्रेरित किया।
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