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पारे ने लगाई छलांग, फसलें प्रभावित, लोग परेशान
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तेज धूप में चेहरा ढंके स्कूटी सवार युवतियां
- फोटो : ETAWAH
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इटावा। मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही अचानक गर्मी बढ़ने से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। इसी समय अभी बच्चों की परीक्षाएं शुरू हुईं हैं और दूसरी तरफ खेत खलिहान का काम भी शुरू हो गया है। दिन में तेज धूप पड़ने की वजह से सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा रात में ठंडक होने की वजह से लोगों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ गई है। दिन में गर्म हवाएं चलने लगीं हैं, हालांकि डाक्टरों का कहना है कि हवाएं भले ही गर्म हैं, लेकिन अभी लू का खतरा नहीं है, इसलिए गर्मी से अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। तापमान अधिक होने से गेहूं की फसल का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
मार्च के पहले पखवाड़े में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास था, लेकिन 14 मार्च के बाद तापमान ने छलांग लगानी शुरू की। 14 और 15 मार्च को तापमान 35 डिग्री रहा। उसके बाद से तापमान 37 से 39 डिग्री के बीच बना हुआ है। इसके अलावा अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी बड़ा अंतर है।
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20 मार्च को अधिकतम तापमान 39 था और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस। दोनों के बीच में 18 डिग्री का अंतर था। इतने बड़े अंतर की वजह से लोगों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों और मौसम की जानकारी देने वाली वेबसाइट के अनुसार इस सप्ताह तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इसकी वजह से लोगों को सावधानी की जरूरत है।
सावधानी रखें, लू का खतरा नहीं
जिला अस्पताल के डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि मार्च में अचानक तापमान तो बढ़ है, लेकिन लोगों को अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। तापमान जब तक 45 के आसपास नहीं होगा तब तक लू का खतरा नहीं रहता है, लेकिन सावधानी की जरूरत है। कहा कि एक तो दिन और रात के तापमान में अंतर अधिक है, इसलिए दोनों में सामंजस्य बनाये रखने के लिए धूप से बचना होगा।
अधिक ठंडी चीजों के सेवन से भी बचें, नहीं तो जुकाम का खतरा रहेगा। ताजा भोजन करें, ताजा फल खाएं, पानी खूब पीयें और सीधे धूप में जाने से बचें। बच्चों को भी धूप से बचाएं। बहुत अधिक ठंडा पानी न पीने दें।
गेहूं को बचाने के लिए नमी ही उपाय
अचानक तापमान बढ़ने की वजह से गेहूं की फसल के जल्दी पकने का खतरा बढ़ गया है। फसल जल्दी पकने की वजह से गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर विपरीत असर पड़ेगा। गेहूं की अगेती फसल तो अपना पूरा समय ले चुकी है, लेकिन पछेती फसल के लिए बढ़ता तापमान बहुत नुकसान दायक है।
कृषि वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि फसल के नुकसान को कम करने के लिए गेहूं के खेतों मेें नमी बरकरार रखें। इसके लिए अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़े तो जरूर करें। उन्होंने अचानक बढ़ते तापमान की वजह प्रदूषण को बताया। कहा कि ऐसी परिस्थितियों से फसल उत्पादन प्रभावित न हो, इसलिए जैविक खेती ही उपाय है।
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इसके अलावा रात में ठंडक होने की वजह से लोगों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ गई है। दिन में गर्म हवाएं चलने लगीं हैं, हालांकि डाक्टरों का कहना है कि हवाएं भले ही गर्म हैं, लेकिन अभी लू का खतरा नहीं है, इसलिए गर्मी से अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। तापमान अधिक होने से गेहूं की फसल का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
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मार्च के पहले पखवाड़े में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास था, लेकिन 14 मार्च के बाद तापमान ने छलांग लगानी शुरू की। 14 और 15 मार्च को तापमान 35 डिग्री रहा। उसके बाद से तापमान 37 से 39 डिग्री के बीच बना हुआ है। इसके अलावा अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी बड़ा अंतर है।
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20 मार्च को अधिकतम तापमान 39 था और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस। दोनों के बीच में 18 डिग्री का अंतर था। इतने बड़े अंतर की वजह से लोगों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों और मौसम की जानकारी देने वाली वेबसाइट के अनुसार इस सप्ताह तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। इसकी वजह से लोगों को सावधानी की जरूरत है।
सावधानी रखें, लू का खतरा नहीं
जिला अस्पताल के डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि मार्च में अचानक तापमान तो बढ़ है, लेकिन लोगों को अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। तापमान जब तक 45 के आसपास नहीं होगा तब तक लू का खतरा नहीं रहता है, लेकिन सावधानी की जरूरत है। कहा कि एक तो दिन और रात के तापमान में अंतर अधिक है, इसलिए दोनों में सामंजस्य बनाये रखने के लिए धूप से बचना होगा।
अधिक ठंडी चीजों के सेवन से भी बचें, नहीं तो जुकाम का खतरा रहेगा। ताजा भोजन करें, ताजा फल खाएं, पानी खूब पीयें और सीधे धूप में जाने से बचें। बच्चों को भी धूप से बचाएं। बहुत अधिक ठंडा पानी न पीने दें।
गेहूं को बचाने के लिए नमी ही उपाय
अचानक तापमान बढ़ने की वजह से गेहूं की फसल के जल्दी पकने का खतरा बढ़ गया है। फसल जल्दी पकने की वजह से गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर विपरीत असर पड़ेगा। गेहूं की अगेती फसल तो अपना पूरा समय ले चुकी है, लेकिन पछेती फसल के लिए बढ़ता तापमान बहुत नुकसान दायक है।
कृषि वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि फसल के नुकसान को कम करने के लिए गेहूं के खेतों मेें नमी बरकरार रखें। इसके लिए अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़े तो जरूर करें। उन्होंने अचानक बढ़ते तापमान की वजह प्रदूषण को बताया। कहा कि ऐसी परिस्थितियों से फसल उत्पादन प्रभावित न हो, इसलिए जैविक खेती ही उपाय है।