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मजदूर आएं आगे तो मनरेगा सरपट भागे

Thu, 07 May 2020 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2020 11:00 PM IST
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इटावा। मजदूर अगर आगे आकर काम मांगने लगें तो मनरेगा में रोजगार मिलने और विकास दो गुना हो जाएगा। प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास ने पिछले महीने ये आश्वासन सभी जिलों के उपयुक्त श्रम रोजगार को दिया था।
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प्रदेश में एक करोड़ 65 लाख 87 हजार 807 परिवारों के जॉबकार्ड बने हैं। दो करोड़ 86 लाख 66 हजार 535 मजदूर पंजीकृत हैं। इतनी बड़ी संख्या में जॉबकार्ड तो बने हैं, लेकिन काम आधे परिवार भी नहीं करते हैं। पंजीकृत जॉबकार्ड में केवल 78 लाख 88 हजार 180 परिवार ही सक्रिय हैं। इन परिवारों के 99 लाख 79 हजार 351 लोगों ने ही पिछले तीन साल में कभी कभार काम किया। इटावा जिले की स्थिति तो इससे भी बदतर है। जिले में पंजीकृत 139378 जॉबकार्ड में 184985 मजदूर हैं। किंतु सक्रिय केवल 61327 जॉबकार्ड के 70798 मजदूर ही है। इसमें करीब 40 फीसदी ने तो वर्ष में 8 से 10 दिन ही काम किया है। मनरेगा मजदूरों की सुस्ती के कारण प्रदेश में मजदूरों के काम करने का औसत 49.90 ही पहुंच पता है। इटावा का औसत 44.02 ही है।
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23 अप्रैल को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने सभी जिले के उपयुक्त श्रम रोजगार (डीसी मनरेगा) के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात की थी। इसमें उन्होंने लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों से आए ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को मनरेगा से गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। तब कई डीसी मनरेगा ने एक परिवार की 100 दिन के बजाय 200 काम देने की बात रखी थी। तब प्रमुख सचिव ने स्पस्ट कहा था कि अगर प्रदेश में रोजगार देने का औसत 90 प्रतिशत हो जाए तो प्रत्येक जॉबकार्डधारक परिवार को 200 दिन काम देने का प्रावधान कर दिया जाएगा।
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मनरेगा में करीब 35 फीसदी काम महिलाओं को देने का नियम है, किंतु वे काम में न के बराबर रुचि लेती है। प्रदेश में 7464777 महिला मजदूर पंजीकृत हैं, जिसमें केवल 3583249 ही सक्रिय हैं। जिले में पंजीकृत 34980 महिलाओं में केवल 18940 ही सक्रिय हैं। इन महिलाओं में 80 प्रतिशत ने केवल वर्ष में 4 से 6 दिन ही काम किया है।

पंजीकृत जॉबकार्ड की अपेक्षा आधे मजदूर भी काम मांगने नहीं आते हैं, अगर पंजीकृत सभी मजदूर सक्रिय हो जाए तो 200 दिन काम की गारंटी मिलते देर नहीं लगेगी। आयुक्त ग्राम्य विकास पदेन आयुक्त रोजगार गारंटी होते हैं। जिले में औसत बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
-शौकत अली, उपायुक्त श्रम रोजगार, इटावा
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