इटावा सफारी पार्क में शेरनी कुंवरि की मौत
इटावा। इटावा सफारी पार्क में शेरनी कुंवरि की मौत हो गई है। शेरनी दो साल से बीमार चल रही थी। शेरनी की मौत के साथ ही सफारी पार्क में वन्यजीवों की होने वाली मौत की संख्या 13 पहुंच गई है । सफारी पार्क के निदेशक पीपी सिंह ने बताया कि शनिवार रविवार की सुबह करीब 8:55 बजे शेरनी कुंवरि ने दम तोड़ दिया। मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी से पीड़ित होना है। इस बीमारी से शेरनी के मूत्राशय की आकार 15 गुना तक बढ़ गया था। शेरनी के शव का पोस्टमार्टम मथुरा और बरेली के डॉक्टरों की मौजूदगी में कराने के बाद उसके शव को जला दिया। शेरनी के शरीर के कुछ हिस्सों को परीक्षण के लिए आईबीआरआई बरेली भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि शेरनी पिछले दो सालों से बीमार चल रही थी। दो दिन पहले हालात नाजुक होने पर उसे ड्रिप लगाई गई। इलाज के लिए आरबीआरआई बरेली और मथुरा के डॉक्टरों को बुलाया गया था। सफारी के डॉ. गौरव श्रीवास्तव व अन्य डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में लगी रही।
सबसे पहले शेरनी लक्ष्मी ने तोड़ा था दम
इटावा। लायन सफारी में 30 अक्तूबर 2014 को हैदराबाद से लाए गए शेरों के जोड़े में शामिल शेरनी लक्ष्मी की मौत हुई थी। उसके बाद से सफारी में मौतों के रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसके बाद 16 नवंबर 2014 को शेर विष्णु। गुजरात से लाई गई स्वस्थ शेरनी तपस्या ने तो 15 दिन के अंदर 8 जनवरी 2016 को सफारी में पहुंचते ही दम तोड़ दिया था। 2 जून 2016 को शेर कुबेर, 8 नवंबर 2016 को शेरनी ग्रीष्मा, 18 जुलाई 2015 को शेरनी हीर के दो शावक, 21 जुलाई 2015 को शेरनी ग्रीष्मा के दो शावक, 14 अगस्त 2015 को शेरनी ग्रीष्मा का एक शावक, चंबल के बीहड़ से लाए गए घायल तेंदुए के बच्चे ने 27 सितंबर 2017 को, 24 दिसंबर 2017 को शंकर भालू, 5 जनवरी 18 को हिरन की मौत हो चुकी है।
पांच डाक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
शेरनी कुंवरि के शव का पांच डाक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। डाक्टरों की टीम में मथुरा के डा. आरपी पांडेय, बरेली के डा. एएन पावड़े, डा. अभिषेक कुमार, डा. अभिषेक सक्सेना एवं डा. गौरव श्रीवास्तव शामिल रहे। मौत का कारण किडनी फेल होना एवं शेरनी का मूत्राशय नार्मल से 15 गुना बढ़ जाना पाया गया है।
टीबी से पांच जनवरी को हुई थी काले हिरन की मौत
पांच जनवरी को टीबी की बीमारी से काले हिरन की मौत हो गई थी। उसे करीब एक वर्ष पहले लखनऊ जू से इटावा सफारी पार्क में लाया गया था। तभी से वह टीबी से ग्रसित था। इसका इलाज भी किया गया लेकिन चार वर्षीय हिरन एक साल में भी सेहतमंद नहीं हो सका।
भालू सहित अब तक 13 की हो चुकी है मौत
इटावा सफारी पार्क में 24 दिसंबर को शंकर भालू की मौत हो गई थी। वह भी टीबी से पीड़ित था। ऐसी उम्मीदें लगाई गई थी कि वर्ष 2018 अच्छा गुजरेगा लेकिन इस वर्ष की शुरूआत में ही एक काले हिरन की मौत के बाद शेरनी कुंवरि की भी मौत हो गई । हिरन सफारी का उदघाटन 6 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था । इटावा सफारी पार्क के बनने से लेकर अब तक 13 वन्य जीवों की मौत हो चुकी हैं। इनमें से दो शेर व दो शेरनी तथा पांच शावक शामिल हैं । सफारी में लाए जाने के छह महीने के अंदर ही एक भालू की भी मौत हो गई है । इसी तरह सितंबर के महीने में बीहड़ी क्षेत्र से घायल हुए तेंदुए के एक बच्चे को सफारी में लाया गया था। उसकी भी सफारी में चार दिन बाद मौत हो गई थी ।
इटावा सफारी पार्क की हिरन सफारी में फिलहाल काले हिरनों की संख्या 22 है, जिनमें नर व मादा दोनों शामिल है। इनमें से एक की मौत हो जाने के बाद अब हिरनों की संख्या घट कर 21 रह गई है। दो दर्जन से अधिक एंटीलोप भी सफारी पार्क में हैं ।