{"_id":"63430c75114aa64ade12d21d","slug":"lampi-virus-increacess-etawah-news-knp722425224","type":"story","status":"publish","title_hn":"पैर पसार रहा लंपी वायरस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पैर पसार रहा लंपी वायरस
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इटावा/चकरनगर। लंपी वायरस जिले में भी पैर पसार रहा है। जनपद में करीब 200 मवेशी इसकी चपेट में आ चुके हैं। विभागीय आंकड़ों में सिर्फ 80 पशु ही दर्ज हैं। उनके अनुसार, एक भी पशु की मौत नहीं हुई है।
विभाग के अनुसार जिले के 1.04 लाख गोवंशों में से 90 हजार का टीकाकरण किया जा चुका है। ऐसे में बिना टीके वाले गोवंश ही लंपी की चपेट में आ रहे हैं। सीवीओ डॉ. नीरज कुमार गौतम के अनुसार, संक्रमित गोवंश का दूध उबालकर पीने से कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। ये वायरस इंसानों में नहीं फैलता है। अभी तक जिले में 80 पशु लंपी से ग्रसित मिले हैं। सभी को उपचार दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर ही जांच कराई जा रही है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पशुपालकों को भी संक्रमित गोवंशों का ध्यान रखना चाहिए। दवाइयों, इंजेक्शन के अलावा यदि नीम की पत्ती को पानी में उबालकर उससे पशु की त्वचा की धुलाई की जाए तो संक्रमण जल्दी ठीक हो जाता है। बीमारी के दौरान पशु के खानपान का भी विशेष ध्यान रखें।
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गांव के 30 पशु चपेट में
ग्राम प्रधान पसिया जितेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में करीब 30 पशु लंपी की चपेट में हैं। कई-कई बार फोन करने पर पशुपालन विभाग संज्ञान ले रहा है। बिना जांच के ही सीधे इंजेक्शन लगा दिया जा रहा है।
आठ गायों की हो चुकी मौत
पसिया गांव के नंदकुमार ने बताया कि उनकी आठ गाय बीमार होकर मर चुकी हैं। गायों के शरीर में फफोले निकल आए थे। सूचना के बाद भी पशु चिकित्साधिकारी लापरवाही बरतते हैं। इससे पशुओं की हालत बिगड़ जाती है।
निजी चिकित्सक से करा रहे हैं इलाज
शहर के महेरा चुंगी निवासी शिवम यादव ने बताया कि तीन गाय बीमार हैं। सभी का निजी पशु चिकित्सक से उपचार करा रहे हैं। प्रतिदिन 400 से 500 रुपये प्रति गाय के हिसाब से इलाज कराने का खर्च आ रहा है।
नहीं करा रहे जांच
सिंडौस के शांति स्वरूप ने बताया कि उनके चार गोवंश बीमार हैं। कई बार फोन करने के बाद पशु चिकित्सक आए थे। बिना जांच के ही सभी को इंजेक्शन लगाकर चले गए हैं।
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विभाग के अनुसार जिले के 1.04 लाख गोवंशों में से 90 हजार का टीकाकरण किया जा चुका है। ऐसे में बिना टीके वाले गोवंश ही लंपी की चपेट में आ रहे हैं। सीवीओ डॉ. नीरज कुमार गौतम के अनुसार, संक्रमित गोवंश का दूध उबालकर पीने से कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। ये वायरस इंसानों में नहीं फैलता है। अभी तक जिले में 80 पशु लंपी से ग्रसित मिले हैं। सभी को उपचार दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर ही जांच कराई जा रही है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पशुपालकों को भी संक्रमित गोवंशों का ध्यान रखना चाहिए। दवाइयों, इंजेक्शन के अलावा यदि नीम की पत्ती को पानी में उबालकर उससे पशु की त्वचा की धुलाई की जाए तो संक्रमण जल्दी ठीक हो जाता है। बीमारी के दौरान पशु के खानपान का भी विशेष ध्यान रखें।
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गांव के 30 पशु चपेट में
ग्राम प्रधान पसिया जितेंद्र कुमार ने बताया कि गांव में करीब 30 पशु लंपी की चपेट में हैं। कई-कई बार फोन करने पर पशुपालन विभाग संज्ञान ले रहा है। बिना जांच के ही सीधे इंजेक्शन लगा दिया जा रहा है।
आठ गायों की हो चुकी मौत
पसिया गांव के नंदकुमार ने बताया कि उनकी आठ गाय बीमार होकर मर चुकी हैं। गायों के शरीर में फफोले निकल आए थे। सूचना के बाद भी पशु चिकित्साधिकारी लापरवाही बरतते हैं। इससे पशुओं की हालत बिगड़ जाती है।
निजी चिकित्सक से करा रहे हैं इलाज
शहर के महेरा चुंगी निवासी शिवम यादव ने बताया कि तीन गाय बीमार हैं। सभी का निजी पशु चिकित्सक से उपचार करा रहे हैं। प्रतिदिन 400 से 500 रुपये प्रति गाय के हिसाब से इलाज कराने का खर्च आ रहा है।
नहीं करा रहे जांच
सिंडौस के शांति स्वरूप ने बताया कि उनके चार गोवंश बीमार हैं। कई बार फोन करने के बाद पशु चिकित्सक आए थे। बिना जांच के ही सभी को इंजेक्शन लगाकर चले गए हैं।